'तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं', पेश हैं ख्‍़वाब पर अशआर

'तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं', पेश हैं ख्‍़वाब पर अशआर
शायरी में ख्‍़वाबों की बात...

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में मुहब्‍बत (Love) की बात की गई है. इसमें दर्दे-जुदाई और इससे लबरेज़ जज्‍़बात (Emotion) को भी पूरी ख़ूबसूरती के साथ पेश किया गया है. इसी तरह जागती आंखों के ख्‍़वाबों (Dreams) को भी शायरी में अहमियत के साथ जगह मिली है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 20, 2020, 11:56 AM IST
  • Share this:
ख्‍़वाब सिर्फ़ नींद में ही नहीं देखे जाते, कुछ जागती आंखों के ख्‍़वाब (Dream) भी होते हैं. इन ख्‍़वाबों की अपनी अलग अहमियत है. इसका चर्चा शायरों ने भी अपने कलाम में किया है. जिस तरह शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में हर जज्‍़बात (Emotion) को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. इसी तरह शायरी में ख्‍़वाबों की बात की गई है, इनकी अहमियत को पूरी तरह तवज्‍जो मिली है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात 'ख्‍़वाबों' की हो और शायर की कैफियत, उसके दिल की हालत का जिक्र हो. तो आप भी इसका लुत्‍़फ़ उठाइए...



आशिक़ी में 'मीर' जैसे ख़्वाब मत देखा करो
बावले हो जाओगे महताब मत देखा करो


अहमद फ़राज़
और तो क्या था बेचने के लिए
अपनी आंखों के ख़्वाब बेचे हैं
जौन एलिया

उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए
कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए
इरफ़ान सिद्दीक़ी

इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का
ज़िंदगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का
फ़ानी बदायूंनी

तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएं भेज दो हम ने ख़ताएं भेजी हैं
गुलज़ार

आंखें खुलीं तो जाग उठीं हसरतें तमाम
उस को भी खो दिया जिसे पाया था ख़्वाब में
सिराज लखनवी

यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
निदा फ़ाज़ली

ख़्वाब होते हैं देखने के लिए
उन में जा कर मगर रहा न करो
मुनीर नियाज़ी

ये ज़रूरी है कि आंखों का भरम क़ाएम रहे
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो
राहत इंदौरी

रोज़ वो ख़्वाब में आते हैं गले मिलने को
मैं जो सोता हूं तो जाग उठती है क़िस्मत मेरी
जलील मानिकपुरी

ये भी पढ़ें - 'कर रहा था ग़म-ए-जहां का हिसाब', आज पेश हैं उदासी पर अशआर

बारहा तेरा इंतिज़ार किया
अपने ख़्वाबों में इक दुल्हन की तरह
परवीन शाकिर

मेरे ख़्वाबों में भी तू मेरे ख़यालों में भी तू
कौन सी चीज़ तुझे तुझ से जुदा पेश करूं
साहिर लुधियानवी

रात को सोना न सोना सब बराबर हो गया
तुम न आए ख़्वाब में आंखों में ख़्वाब आया तो क्या
जलील मानिकपुरी

ये भी पढ़ें - 'बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानां किए हुए', पेश हैं 'तसव्‍वुर' पर अशआर

मैंने देखा है बहारों में चमन को जलते
है कोई ख़्वाब की ताबीर बताने वाला
अहमद फ़राज़
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज