'अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डुबा के देख', आज पेश हैं कश्‍ती पर अशआर

'अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डुबा के देख', आज पेश हैं कश्‍ती पर अशआर
आज बात 'कश्‍ती' की और साहिल की...

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में मुहब्‍बत (Love) की बात की गई है. मगर इसमें दूसरे विषयों को भी अहमियत मिली है. शायरी में हर जज्‍़बात (Emotion) को पूरी ख़ूबसूरती के साथ पेश किया गया है...

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  • Last Updated: September 3, 2020, 1:06 PM IST
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शायरी (Urdu Shayari) में हर विषय को अहमियत मिली है. फिर चाहे बात मुहब्‍बत (Love) की हो या आरज़ू का जिक्र हो. शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में हर जज्‍़बात (Emotion) को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. इसी तरह शायरी में 'कश्‍ती' की बात की गई है, शायरों ने साहिल और मौजों को अपनी क़लम का विषय बनाया है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात 'कश्‍ती' की हो, समुद्र और साहिल की हो. आप भी इसका लुत्‍़फ़ उठाइए...

अच्छा यक़ीं नहीं है तो कश्ती डुबा के देख
इक तू ही नाख़ुदा नहीं ज़ालिम ख़ुदा भी है
क़तील शिफ़ाई
मैं कश्ती में अकेला तो नहीं हूं
मेरे हमराह दरिया जा रहा है


अहमद नदीम क़ासमी

कश्ती चला रहा है मगर किस अदा के साथ
हम भी न डूब जाएं कहीं ना-ख़ुदा के साथ
अब्दुल हमीद अदम

आता है जो तूफ़ां आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है
मुमकिन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जाए
बहज़ाद लखनवी

दरिया के तलातुम से तो बच सकती है कश्ती
कश्ती में तलातुम हो तो साहिल न मिलेगा
मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद

उस ना-ख़ुदा के ज़ुल्म ओ सितम हाए क्या करूं
कश्ती मेरी डुबोई है साहिल के आस-पास
हसरत मोहानी

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कश्ती-ए-एतबार तोड़ के देख
कि ख़ुदा भी है ना-ख़ुदा ही नहीं
फ़ानी बदायूंनी

सरक ऐ मौज सलामत तो रह-ए-साहिल ले
तुझ को क्या काम जो कश्ती मेरी तूफ़ान में है
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

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कश्तियां डूब रही हैं कोई साहिल लाओ
अपनी आंखें मेरी आंखों के मुक़ाबिल लाओ
जमुना प्रसाद राही
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