'नशे की बात नहीं एतबार के क़ाबिल', आज पेश हैं नशा पर अशआर

'नशे की बात नहीं एतबार के क़ाबिल', आज पेश हैं नशा पर अशआर
बात बेखुदी की और शायर की कैफियत का जिक्र...

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में मुहब्‍बत (Love) की बात की गई है. मगर इसमें नशा और बेखुदी से लबरेज़ जज्‍़बात (Emotion) को भी पूरी ख़ूबसूरती के साथ पेश किया गया है. शायरों के इस कलाम पर ग़ौर फ़रमाइए...

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 23, 2020, 9:35 AM IST
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शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में हर जज्‍़बात (Emotion) को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. इसी तरह शायरी में नशा, बेखुदी, खुमार की बात की गई है. बेखुदी यानी नशे की कैफियत को और मय-कशों को बड़े ही दिल-चस्प अंदाज़ में तवज्‍जो दी गई है. आज हम शायरों के ऐसे ही बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजिर हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात 'नशा' की हो, बेखुदी की और शायर की कैफियत, उसके दिल की हालत का जिक्र हो. आप भी इस कलाम का लुत्‍़फ़ उठाइए...

इतनी पी जाए कि मिट जाए मैं और तू की तमीज़
यानी ये होश की दीवार गिरा दी जाए
फ़रहत शहज़ाद
न तुम होश में हो न हम होश में हैं
चलो मय-कदे में वहीं बात होगी


बशीर बद्र

तर्क-ए-मय ही समझ इसे नासेह
इतनी पी है कि पी नहीं जाती
शकील बदायूंनी 

लोग कहते हैं रात बीत चुकी
मुझ को समझाओ मैं शराबी हूं
साग़र सिद्दीक़ी

ख़ुश्क बातों में कहां है शैख़ कैफ़-ए-ज़िंदगी
वो तो पी कर ही मिलेगा जो मज़ा पीने में है
अर्श मलसियानी

इतनी पी है कि बाद-ए-तौबा भी
बे-पिए बे-ख़ुदी सी रहती है
रियाज़ ख़ैराबादी

मेरी शराब की तौबा पे जा न ऐ वाइज़
नशे की बात नहीं एतबार के क़ाबिल
हफ़ीज़ जौनपुरी

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आलम से बे-ख़बर भी हूं आलम में भी हूं मैं
साक़ी ने इस मक़ाम को आसां बना दिया
असग़र गोंडवी

मय-कदे में नशा की ऐनक दिखाती है मुझे
आसमां मस्त ओ ज़मीं मस्त ओ दर-ओ-दीवार मस्त
हैदर अली आतिश

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नशे में सूझती है मुझे दूर दूर की
नदी वो सामने है शराब-ए-तुहूर की
नज़्म तबातबाई
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