'बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानां किए हुए', पेश हैं 'तसव्‍वुर' पर अशआर

बात 'तसव्‍वुर' की हो और मुहब्‍बत का जिक्र...Image Credit/Pixabay
बात 'तसव्‍वुर' की हो और मुहब्‍बत का जिक्र...Image Credit/Pixabay

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में इश्‍क़ (Love) की लज्‍़ज़त से लबरेज़ जज्‍़बात (Emotion) और महबूब के तसव्‍वुर को बहुत ही ख़ूबसूरत अंदाज़ में पेश किया गया है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 7, 2020, 9:52 AM IST
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शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में हर जज्‍़बात को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. बात चाहे इश्‍क़ो-मुहब्‍बत (Love) की हो या किसी और मसले पर क़लम उठाई गई हो. शायरी में हर जज्‍़बात (Emotion) को ख़ूबसूरती के साथ तवज्‍जो मिली है. आज हम शायरों के इसी बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजि़र हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात 'तसव्‍वुर' की हो और मुहब्‍बत का जिक्र हो. तो आप भी इसका लुत्‍़फ़ उठाइए...

जी ढूंढ़ता है फिर वही फ़ुर्सत के रात दिन
बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानां किए हुए
मिर्ज़ा ग़ालिब
उन का ग़म उन का तसव्वुर उन के शिकवे अब कहां
अब तो ये बातें भी ऐ दिल हो गईं आई गई


साहिर लुधियानवी

मैं जब भी उस के ख़यालों में खो सा जाता हूं
वो ख़ुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे
जां निसार अख़्तर

फिर नज़र में फूल महके दिल में फिर शमएं जलीं
फिर तसव्वुर ने लिया उस बज़्म में जाने का नाम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

घर की तामीर तसव्वुर ही में हो सकती है
अपने नक़्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है
शहरयार

ख़फ़ा हैं फिर भी आ कर छेड़ जाते हैं तसव्वुर में
हमारे हाल पर कुछ मेहरबानी अब भी होती है
अख़्तर शीरानी

हां दिखा दे ऐ तसव्वुर फिर वो सुब्ह ओ शाम तू
दौड़ पीछे की तरफ़ ऐ गर्दिश-ए-अय्याम तू
अल्लामा इक़बाल

चाहिए उस का तसव्वुर ही से नक़्शा खींचना
देख कर तस्वीर को तस्वीर फिर खींची तो क्या
बहादुर शाह ज़फ़र

तसव्वुर में भी अब वो बे-नक़ाब आते नहीं मुझ तक
क़यामत आ चुकी है लोग कहते हैं शबाब आया
हफ़ीज़ जालंधरी

हम हैं उस के ख़याल की तस्वीर
जिस की तस्वीर है ख़याल अपना
फ़ानी बदायूंनी

इक तेरी याद से इक तेरे तसव्वुर से हमें
आ गए याद कई नाम हसीनाओं के
हबीब जालिब

यूं बरसती हैं तसव्वुर में पुरानी यादें
जैसे बरसात की रिम-झिम में समां होता है
क़तील शिफ़ाई

रात भर उन का तसव्वुर दिल को तड़पाता रहा
एक नक़्शा सामने आता रहा जाता रहा
अख़्तर शीरानी

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खुल नहीं सकती हैं अब आंखें मेरी
जी में ये किस का तसव्वुर आ गया
ख़्वाजा मीर दर्द
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