'वो अक्स बन के मेरी चश्म-ए-तर में रहता है', पेश हैं 'आंसू' पर अशआर

'वो अक्स बन के मेरी चश्म-ए-तर में रहता है', पेश हैं 'आंसू' पर अशआर
शायरी में हर जज्‍़बात aको ख़ूबसूरती के साथ तवज्‍जो मिली है.

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में दर्द और इससे लबरेज़ जज्‍़बात (Emotion) को बहुत ही ख़ूबसूरत अंदाज़ में पेश किया गया है...

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 30, 2020, 11:19 AM IST
  • Share this:
शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में हर जज्‍़बात को बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. बात चाहे इश्‍क़ो-मुहब्‍बत (Love) की हो या किसी और मसले पर क़लम उठाई गई हो. शायरी में हर जज्‍़बात (Emotion) को ख़ूबसूरती के साथ तवज्‍जो मिली है. आज हम शायरों के इसी बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजि़र हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें 'आंसू' हों और दर्द का जिक्र हो. आप भी दर्द की इस शिद्दत को महसूस कीजिए...

वो अक्स बन के मेरी चश्म-ए-तर में रहता है
अजीब शख़्स है पानी के घर में रहता है
बिस्मिल साबरी
रोने वाले तुझे रोने का सलीक़ा ही नहीं
अश्क पीने के लिए हैं कि बहाने के लिए


आनंद नारायण मुल्ला

एक आंसू ने डुबोया मुझ को उन की बज़्म में
बूंद भर पानी से सारी आबरू पानी हुई
शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

उन के रुख़्सार पे ढलके हुए आंसू तौबा
मैं ने शबनम को भी शोलों पे मचलते देखा
साहिर लुधियानवी

मुद्दत के बाद उस ने जो की लुत्फ़ की निगाह
जी ख़ुश तो हो गया मगर आंसू निकल पड़े
कैफ़ी आज़मी

इस क़दर रोया हूं तेरी याद में
आईने आंखों के धुंधले हो गए
नासिर काज़मी

हसीं तेरी आंखें हसीं तेरे आंसू
यहीं डूब जाने को जी चाहता है
जिगर मुरादाबादी

फिर मेरी आंख हो गई नमनाक
फिर किसी ने मिज़ाज पूछा है
असरार-उल-हक़ मजाज़

और कुछ तोहफ़ा न था जो लाते हम तेरे नियाज़
एक दो आंसू थे आंखों में सो भर लाएं हैं हम
मीर हसन

क्या कहूं किस तरह से जीता हूं
ग़म को खाता हूं आंसू पीता हूं
मीर असर

जो आग लगाई थी तुम ने उस को तो बुझाया अश्कों ने
जो अश्कों ने भड़काई है उस आग को ठंडा कौन करे
मुईन अहसन जज़्बी

इतने आंसू तो न थे दीदा-ए-तर के आगे
अब तो पानी ही भरा रहता है घर के आगे
मीर हसन

अश्क-ए-ग़म दीदा-ए-पुर-नम से संभाले न गए
ये वो बच्चे हैं जो मां बाप से पाले न गए
मीर अनीस

समझता हूं सबब काफ़िर तेरे आंसू निकलने का
धुआं लगता है आंखों में किसी के दिल के जलने का
अमीर मीनाई

आ देख कि मेरे आंसुओं में
ये किस का जमाल आ गया है
अदा जाफ़री

ये भी पढ़ें - 'अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें', पेश हैं 'दर्दे-जुदाई' पर अशआर

 
मुहब्बत में इक ऐसा वक़्त भी दिल पर गुज़रता है
कि आंसू ख़ुश्क हो जाते हैं तुग़्यानी नहीं जाती
जिगर मुरादाबादी
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading