'सामने आईना रख लिया कीजिए', आज पेश हैं 'आईने' पर अशआर

'सामने आईना रख लिया कीजिए', आज पेश हैं 'आईने' पर अशआर
बात 'आईने' की और शायर का दिलकश अंदाज़े-बयां...

उर्दू शायरी (Urdu Shayari) में हर जज्‍़बात (Emotion) को बहुत ही ख़ूबसूरत अंदाज़ में पेश किया गया है. बात मुहब्‍बत की हो, दर्द की या जिक्र आईने का हो...

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शेरो-सुख़न (Shayari) की दुनिया में मुहब्‍बत (Love) भरे जज्‍़बात हों या दर्द की कैफियत इन्‍हें बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है. शायरी में हर जज्‍़बात (Emotion) को अहमियत के साथ तवज्‍जो मिली है. आज हम शायरों के इसी बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर (Sher) आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजि़र हुए हैं. शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात 'आईने' की हो और शायर का दिलकश अंदाज़े-बयां हो, तो आप भी इसका लुत्‍़फ़ उठाइए...

आईना क्यों न दूं कि तमाशा कहें जिसे
ऐसा कहां से लाऊं कि तुझ सा कहें जिसे
मिर्ज़ा ग़ालिब
ज़रा विसाल के बाद आईना तो देख ऐ दोस्त
तेरे जमाल की दोशीज़गी निखर आई


फ़िराक़ गोरखपुरी

दूसरों पर अगर तब्सिरा कीजिए
सामने आईना रख लिया कीजिए
ख़ुमार बाराबंकवी

आईनों को ज़ंग लगा
अब मैं कैसा लगता हूं
जौन एलिया

आईना देख अपना सा मुंह ले के रह गए
साहब को दिल न देने पे कितना ग़ुरूर था
मिर्ज़ा ग़ालिब

देखना अच्छा नहीं ज़ानू पे रख कर आईना
दोनों नाज़ुक हैं न रखियो आईने पर आईना
दाग़ देहलवी

मैं तो 'मुनीर' आईने में ख़ुद को तक कर हैरान हुआ
ये चेहरा कुछ और तरह था पहले किसी ज़माने में
मुनीर नियाज़ी

मुश्किल बहुत पड़ेगी बराबर की चोट है
आईना देखिएगा ज़रा देख-भाल के
अमीर मीनाई

देखिएगा संभल कर आईना
सामना आज है मुक़ाबिल का
रियाज़ ख़ैराबादी

आईना देख के फ़रमाते हैं
किस ग़ज़ब की है जवानी मेरी
इम्दाद इमाम असर

ये सुब्ह की सफ़ेदियां ये दोपहर की ज़र्दियां
अब आईने में देखता हूं मैं कहां चला गया
नासिर काज़मी

इस लिए कहते थे देखा मुंह लगाने का मज़ा
आईना अब आप का मद्द-ए-मुक़ाबिल हो गया
आग़ा शाएर क़ज़लबाश

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वहदत में तेरी हर्फ़ दुई का न आ सके
आईना क्या मजाल तुझे मुंह दिखा सके
ख़्वाजा मीर दर्द
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