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किडनी की समस्या हो सकती है या नहीं, इस टेस्ट से पता चलेगा

किडनी की समस्या हो सकती है या नहीं, इस टेस्ट से पता चलेगा

किडनी की समस्या हो सकती है या नहीं, इस टेस्ट से पता चलेगा

किडनी की समस्या हो सकती है या नहीं, इस टेस्ट से पता चलेगा

किडनी की समस्या होने से शरीर की मशीनरी को ठीक ढंग से काम करने में काफी परेशानी होती है.

    किडनी के जरिए हमारे शरीर की गन्दगी बाहर निकलती है. दरअसल, किडनी में मौजूद नेफरोंस फ़िल्टर की तरह काम करते हैं, यह ब्लड को फ़िल्टर करते हैं. किडनी के फ़िल्टर की वजह से ही बॉडी में खून साफ होता है और अशुद्धियां शरीर जैसे मूत्र शरीर से बाहर निकलता है. इसके अलावा यह रेड ब्लड सेल्स बनने में मदद करती है और उन हार्मोंस को रिलीज करती है जो ब्लड प्रेशर कण्ट्रोल करने में अहम भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा यह वितामिन डी के निर्माण में भी मददगार होती है. विटामिन डी हड्डियों के लिए काफी अहम होता है. लेकिन कई बार किडनी की समस्या होने से शरीर की मशीनरी को ठीक ढंग से काम करने में काफी परेशानी होती है.

    शुरुआत में किडनी की परेशानी का पता नहीं चलता है. लेकिन आगे जाकर काफी दिक्कतें होती हैं लेकिन अब शोधकर्ताओं ने एक ऐसा सस्ता परीक्षण विकसित किया है जो भविष्य में होने वाली गुर्दे की गंभीर बीमारियों या डायलिसिस की आवश्यकता की पहचान करने में सक्षम है.

    शोधकर्ताओं ने एक ऐसा सस्ता परीक्षण विकसित किया है जो भविष्य में होने वाली गुर्दे की गंभीर बीमारियों या डायलिसिस की आवश्यकता की पहचान करने में सक्षम है.
    शोधकर्ताओं ने एक ऐसा सस्ता परीक्षण विकसित किया है जो भविष्य में होने वाली गुर्दे की गंभीर बीमारियों या डायलिसिस की आवश्यकता की पहचान करने में सक्षम है.


    प्रत्यारोपण से बच सकेंगे मरीज :
    सैन फ्रांसिस्को की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के शोधकर्ताओं ने यह परीक्षण विकसित किया है जो गुर्दे की समस्या से पीड़ित मरीजों के यूरिन में मौजूद अत्यधिक प्रोटीन की मात्रा को मापकर यह बता सकेगा कि उन्हें भविष्य में गुर्दे से संबंधित कोई गंभीर बीमारी होने की संभावना है या नहीं. इस परीक्षण के परिणामों से कई मरीजों को डायलिसिस और गुर्दे के प्रत्यारोपण से बचाया जा सकेगा.

    इस परीक्षण के परिणामों से कई मरीजों को डायलिसिस और गुर्दे के प्रत्यारोपण से बचाया जा सकेगा.
    इस परीक्षण के परिणामों से कई मरीजों को डायलिसिस और गुर्दे के प्रत्यारोपण से बचाया जा सकेगा.


    प्रोटीन से होती है पहचान :
    प्रमुख शोधकर्ता चिवुआन ने कहा, यूरिन में मौजूद अत्यधिक प्रोटीन भविष्य में होने वाली गुर्दे की बीमारी के संकेतक होता है. हालांकि इसका इस्तेमाल एक्यूट किडनी इंज्यूरी वाले मरीजों पर नहीं किया जाता. यह एक सस्ती और बिना चीर-फाड़ वाली प्रक्रिया है जो कई अन्य जगहों पर इस्तेमाल की जाती है. इन मरीजों का प्रोटीन परीक्षण किया जाना चाहिए. इस बीमारी से उबरने वाले मरीजों में इसके दोबारा होने का खतरा बना रहता है. इससे गुर्दे के फेल होने, दिल की बीमारी और मौत होने का खतरा भी बढ़ जाता है.
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    Tags: Health, Health News, Lifestyle

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