फेसबुक को सब पता है, कब आपके पीरियड्स हुए, कब आपने सेक्‍स किया

फेसबुक को सब पता है कि आपके आखिरी पीरियड कब आए, कब वक्‍त से पहले आए, कब वक्‍त से देर से आए, कब आपने सेक्‍स किया, कब आप प्रेग्‍नेंट हुईं या नहीं हुईं.

Manisha Pandey | News18Hindi
Updated: September 13, 2019, 12:36 PM IST
फेसबुक को सब पता है, कब आपके पीरियड्स हुए, कब आपने सेक्‍स किया
प्रतीकात्‍मक चित्र
Manisha Pandey | News18Hindi
Updated: September 13, 2019, 12:36 PM IST
पिछले महीने की 5 तारीख को आपको पीरियड्स हुए थे. इस महीने 13 तारीख हो गई. अभी तक नहीं हुए. कहीं आप प्रेग्‍नेंट तो नहीं.

आपका लास्‍ट पीरियड पिछले महीने की 16 तारीख को हुआ था. नॉक-नॉक. अगला बस आने ही वाला है.
आपके पीरियड की डेट के मुताबिक ये ओव्‍यूलेशन टाइम चल रहा है. पीरियड ट्रैकर का अलार्म तो कल रात से दो बार बजकर आपको आगाह कर चुका.

आप सोच रही होंगी, मयतारीख ये सब यहां क्‍यों लिखना. ये तो बड़ी निजी किस्‍म की बातें हैं, जो सिर्फ आप जानती हैं या ज्‍यादा से ज्‍यादा आपका पार्टनर. फिर हमें कैसे पता.

हमें ऐसे पता चला कि कोई तो है, जिससे आपने ये सारी इतनी निजी जानकारियां साझा की थीं. इस भरोसे पर कि ये बात सिर्फ आपके और उसके बीच ही रहेगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. आपने भरोसा कर उसे बताया, उसने जाकर किसी और को बता दिया. अब आपकी प्राइवेट बात प्राइवेट नहीं रही. उसे सब पता है, आपके आखिरी पीरियड कब आए, कब वक्‍त से पहले आए, कब वक्‍त से देर से, कब आपने सेक्‍स किया, कब आप प्रेग्‍नेंट हुईं या नहीं हुईं.

आपका ये भरोसेमंद दोस्‍त है आपके मोबाइल में इंस्‍टॉल किया हुआ पीरियड ट्रैकर एप और उसने ये सारी निजी जानकारी दे दी है फेसबुक को.

एक ऐप, जिसे एक दिन आपने अपनी सुविधा के लिए फोन में इंस्‍टॉल किया था. खुद पीरियड की तारीख याद नहीं रहती तो सोचा कि ऐप सब याद रखेगा और याद दिलाएगा. लेकिन वो तो आपकी सारी प्राइवेट बातें फेसबुक को बता रहा है. बज फीड में छपी एक रिपोर्ट ये कह रही है.
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यूके के एक एडवोकेसी ग्रुप प्राइवेसी इंटरनेशनल ने इस बात की छानबीन की और अपनी स्‍टडी प्रकाशित की. “नो बॉडीज बिजनेस बट माइन: हाउ मेन्‍सट्रुएशन एप्‍स आर शेयरिंग योर डेटा” नाम से प्रकाशित यह रिपोर्ट बताती है कि कैसे दो मेन्‍सुट्रुएशन ट्रैकिंग ऐप माया और एमआईए ने लाखों औरतों के शरीर और उनके पीरियड साइकिल से जुड़ा बहुत निजी डेटा फेसबुक को बेच दिया ताकि एडवर्टाइजिंग कंपनियां इस डेटा की मदद से इन औरतों को टारगेट कर सकें.

डेटा का बाजार और व्‍यापार उससे कहीं ज्‍यादा बड़ा है, जितना हम अपने मोबाइल और कंप्‍यूटर के छोटी सी दुनिया में टहलते हुए सोच पा रहे हैं. डेटा इस दुनिया का सबसे महंगा प्रोडक्‍ट है. जिसके पास डेटा है, वो सबसे ज्‍यादा अमीर है. दुनिया की बड़ी कंपनियों अरबों डॉलर इस डेटा को जुटाने और सुरक्षित रखने के लिए खर्च कर रही हैं.

वैसे तो हमें ये भी लगता है कि खरबों लोगों की इस दुनिया में एक मामूली से इंसान की जिंदगी से जुड़ी बातों की क्‍या अहमियत है. कोई जान भी जाए हमारे पीरियड, मेन्‍सट्रुएशन, ओव्‍यूलेशन और सेक्‍स की तारीखें तो क्‍या फर्क पड़ता है. लेकिन सच तो ये है कि बात इतनी सीधी है भी नहीं.

डेटा कैसी करारी और दुधारी तलवार है, ये समझने के लिए एक फिल्‍म देखनी चाहिए. इस साल जुलाई में नेटफ्लिक्‍स पर रिलीज हुई कैरिम एमर की डॉक्‍यूमेंट्री “द ग्रेट हैक.” वैसे तो ये फिल्‍म अमेरिकन डेटा अनालिसस कंपनी कैंब्रिज एनालिटिका के बारे में है कि कैसे अमेरिकन इलेक्‍शन से लेकर ब्रेक्जिट तक में इस कंपनी के जुटाए और फैलाए हुए डेटा ने संदेहास्‍पद भूमिका निभाई थी और इस काम में उसकी मदद की थी फेसबुक ने. फेसबुक ने अपने करोड़ों यूजर्स का पर्सनल डेटा कैंब्रिज एनालिटिका को मुहैया कराया था. अगर आपको डेटा की अहमियत और गंभीरता का अंदाजा नहीं है तो ये फिल्‍म देखें जो इतनी खतरनाक है कि आपके रोंगटे खड़े कर सकती है.

बात चाहे हमारी निजी जिंदगियों या विचारों की हो, पसंद-नापसंद की, राजनैतिक रूझानों की या फिर ये कि मेरे आखिरी पीरियड कब आए थे, ये सारी जानकारियां बेहद निजी हैं. और ये बातें दुनिया में सिर्फ उसी को जानने का हक है, जिसे हम चाहते हैं कि वो जाने. ऐप हमारी सुविधा के लिए था, हमारी निजता को पब्लिक करने के लिए नहीं.

अब चूंकि ये बात छिपी नहीं रही तो जाहिर है, इसके कानूनी नतीजे भी होंगे. लेकिन इस कानूनी दांव-पेंच से परे हमें एक बार फिर ये सोचने की जरूरत है कि जिस टेक्‍नोलॉजी का वादा जिंदगी को कुछ सहूलियतें देने का था, उसी ने बची-खुची सहूलियतें भी कैसे छीन ली हैं. हम इस कदर हर वक्‍त सर्विलांस पर हैं कि निजता की धज्जियां उड़ गई हैं.

क्‍या आप चाहते हैं कि कोई उसके बेडरूम से लेकर बाथरूम तक में घुस आए.

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First published: September 13, 2019, 12:32 PM IST
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