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वैलेंटाइन डे पर प्यार महसूस करने वालों के लिए खास किताब 'वैलेंटाइन बाबा'

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Updated: February 7, 2020, 7:44 PM IST
वैलेंटाइन डे पर प्यार महसूस करने वालों के लिए खास किताब 'वैलेंटाइन बाबा'
माना कि लाइफ में बहुत फाइट है, सिचुएशन हर जगह, हर मोर्चे पर टाइट है तो क्या हुआ, दिल भी तो है!

ढाई आखर वाले प्यार और वन नाइट स्टैंड वाले लस्ट की सोच का टकराव आखिर किस मोड़ पर ले जाकर छोड़ेगा आपको, उपन्यास के आखिरी पन्ने तक कायम रहेगा यह रहस्य!

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किताब के बारे में : चार नौजवान दिलों की हालबयानी है यह उपन्यास- वैलेंटाइन बाबा! ढाई आखर वाले प्यार और वन नाइट स्टैंड वाले लस्ट की सोच का टकराव आखिर किस मोड़ पर ले जाकर छोड़ेगा आपको, उपन्यास के आखिरी पन्ने तक कायम रहेगा यह रहस्य! माना कि लाइफ में बहुत फाइट है, सिचुएशन हर जगह, हर मोर्चे पर टाइट है तो क्या हुआ, दिल भी तो है! यकीनन, शशिकांत मिश्र का यह उपन्यास बेलगाम बाजार की धुन पर ठुमकते हरेक दिल की ईसीजी रिपोर्ट है, इसे पढऩा आईने के सामने होना है, जाने क्या आपको अपने-सा दिख जाए...!

''यार मनीष, सोच रहा हूँ ...ये नौकरी-वौकरी का चक्कर छोड़कर खेती का काम शुरू कर दूँ। गुलाब की खेती का। एक गुलाब दो सौ रुपये में बिक रहा है, यार!’’
''क्या बात कर रहा है? दो सौ रुपये में एक गुलाब!’’
''हाँ देख, टिटहरी भर का फूल और लग गया 200 रुपया!’’

गुलाब का रेट सुनकर मनीष दंग रह गया। शिवेश के चेहरे पर झल्लाहट का भाव था।
''लेकिन तुमने इतना महँगा फूल लिया क्यों ?’’
''नेहा को 'रोज डे’ पर विश करना है यार। तुझे पता नहीं, आज रोज-डे है! वैलेंटाइन वीक का पहला दिन!’’''वैलेंटाइन वीक’’—चौंका मनीष! अबतक उसने वैलेंटाइन डे के बारे में ही सुना था। 14 फरवरी का दिन। यह तो उससे बड़ी चीज थी कोई...
''यार, तू भी न...रह गया वही अपने दियारा का! अरे, ये वैलेंटाइन डे दशमी की तरह होता है। दशहरा पूजा के सबसे आखिरी दिन का उत्सव, महा उत्सव! हफ्ते भर के इस उत्सव की शुरुआत तो 7 फरवरी से ही हो जाती है मेरे दोस्त।’’
''7 फरवरी से ही?’’
''हाँ, 7 फरवरी को रोज-डे होता है अर्थात गुलाब दिवस वत्स, गुलाब दिवस! रोज-डे की वजह से ही तो गुलाब का भाव आसमान में उछाल मार रहा है। वैसे पार्टनर, दो सौ के गुलाब से एक बालिका पट जाए तो फिर सौदा घाटे का नहीं है। क्या कहता है?’’
''गुलाब से लड़की पटाने का फॉर्मूला बाद में बताना। पहले वैलेंटाइन वीक के बारे में बता। पहली बार सुन रहा हूँ।’’
''बेटे, लघु उत्तरीय स्टाइल में अपने प्रश्न का उत्तर पकड़। वैलेंटाइन वीक की शुरुआत होती है 7 फरवरी से। इसी दिन गुलाब ले-देकर मामला बढ़ाया जाता है आगे, परिचय-पहचान से कुछ और आगे, आगे...उसके बाद होता है 8 फरवरी का दिन—प्रपोज-डे उर्फ प्रस्ताव दिवस! इसी रोज बालक और बालिका, बालिका और बालक—करते हैं एक दूसरे को प्रपोज!’’
''आई लव यू—बोलकर?’’
''आई लव यू—बोलकर! अबे गँवार, दुनिया 'आई लव यू’ से निकलकर 'वांट यू-फक यू’ पर पहुँच चुकी है और तू 'आई लव यू’ के मस्तूल पर लाल लंगोट लटकाए बैठा है! बेट्टे, प्रपोज-डे के दिन इनोवेटिव आइडिया के साथ बालिका के सामने इजहारे इश्क किया जाता है, इजहारे इश्क।’’
''इनोवेटिव आइडिया!’’
''हाँ, कोई धाँसू आइडिया। ना भूतो, ना भविष्यत। ना देखे में, ना सुने में। प्रपोज करने का कोई ऐसा आइडिया जिससे लड़की तुरन्त इम्प्रैस हो जाए...’’
“जैसे तूने मैट्रिक में उस लड़की को प्रपोज किया था?’’
''मैट्रिक में?”
''भूल गया बेटे, वो राइफल के साथ...’’
मैट्रिक का वो माजरा याद करके झेंप गया शिवेश। टेंथ क्लास में था तब...एक लड़की को दिल दे बैठा था। वह लड़की शिवेश के घर के सामने से होकर स्कूल आती-जाती थी। अब ये जनाब उसे इम्प्रैस करने के चक्कर में उसके स्कूल आने-जाने का समय होते अपने दादा जी का रायफल लेकर छत पर घूमना शुरू कर देते। मन में था कि लड़की उनको रायफल लिए देखकर उनकी मर्दानगी पर फिदा हो जाएगी। आखिरकार एक दिन संयोग से लड़की की नजर छत पर गई तो वहाँ वो शिवेश के हाथ में रायफल देखकर दंग रह गई। उसे और इम्प्रैस करने के चक्कर में शिवेश झूठमूठ का रायफल से उसपर निशाना साधने लगा। लड़की इम्प्रैस होने की जगह डरकर चीखने-चिल्लाने लगी और जब पूरे माजरा का पता शिवेश के घरवालों को लगा तो जनाब की दमभर धुनाई हो गई।
''वैसे पार्टनर, उस समय बचपना में गच्चा जरूर खा गए, लेकिन दिमाग मैंने लगाया सही था! सोच, रायफल दिखाकर लड़की को इम्प्रैस करने का मेरा आइडिया कितना धाँसू था?’’
''अब ऐसा कर कि अपना कलेजा निकाल, प्लेट में सजा और लड़की को प्रपोज कर दे...कैसा आइडिया है, न भूतो-न भविष्यत...’’
''ना पार्टनर, कभी किसी लड़की के लिए खुद की जिन्दगी दाँव पर लगाने की गलती मत करना। तू इन लड़कियों की फितरत नहीं समझता है। कलेजा निकाल कर देगा तो कहेंगी, फ्राई तो नहीं किया! कलेजा फ्राई करके देगा तो बोलेंगी कि ऑयली हो गया! मेरा फिगर खराब हो जाएगा!!’’
''तो फिर और इनोवेटिव आइडिया क्या हो सकता है?’’
''एफएम रेडियो के जरिए प्रपोज कर...पेपर में विज्ञापन के तौर पर अपना प्रेम-प्रस्ताव छपवा, बालिका को मूवी दिखाने ले जा और वहाँ मूवी से पहले स्क्रीन पर अपना प्रपोजल दिखा...इसी तरह के कुछ और इनोवेटिव आइडिया सोच, सोच...’’
''लेकिन इसमें तो बहुत खर्च आएगा, यार...’’
''तो साले, शोले के वीरू की तरह पानी की टंकी पर चढ़कर प्रपोज कर। फ्री में काम हो जाएगा, गब्बर गोद में उठाकर बसन्ती को तेरे पास पहुंचा देगा। न पैसा ना कौड़ी, मोहब्बत के मार्केट में दौड़ा-दौड़ी! वाह जी वाह!’’
''कमीने...खैर, चल...प्रपोज-डे से आगे बढ़। उसके बाद क्या आता है?’’
''उसके बाद बेटे 9 फरवरी को आता है—चॉकलेट-डे।’’
''चॉकलेट-डे’’—चौंका मनीष!
''हाँ, चॉकलेट-डे। अच्छा हुआ कि बलिया छोड़कर दिल्ली चले आए, नहीं तो जिन्दगी भर लेमनचूस ही चूसते रहते। यहाँ पर वैलेंटाइन बाबा की कृपा से दिलदार चॉकलेट चाटने-चूसने के लिए मिला।’’
''दिलदार चॉकलेट!’’ मनीष फिर चौंका।
''अबे घोंचू, दिलदार चॉकलेट मतलब दिल के साइज का चॉकलेट। 9 तारीख को चॉकलेट-डे के दिन ऐसा-वैसा चॉकलेट गिफ्ट में नहीं दिया जाता है। दिल के शेप वाला चॉकलेट दिया जाता है।’’ एकदम ऐसा...शिवेश ने अपने हाथ से दिल का आकार बनाकर दिखाया—''और इस चॉकलेट के बीच में आजकल एक तीर टाइप का निशान बना दिया जाता है।’’
''तीर!’’
''हाँ, हाँ, बाबा कामदेव का बाण उर्फ तीर। अबे, वही अपने पुराण-शास्त्रों वाले कामदेव बाबा! पुराने समय में जिस किसी पर कृपा बरसा देते थे उसकी छुट्टी हो जाती थी। बहुत बड़ा ठरकी बन जाता था वो। वैलेंटाइन बाबा के बड़े भाई लगते होंगे, सोच कर देख...’’
''ठरकी!’’
''अबे यार, ठरकी भी नहीं समझता है। देश दुनिया को भुलाकर जो बस...हाँ, सही समझ रहा है तू! संस्कृत साहित्य में उसे काम-पीड़ा कहा गया है। अंग्रेजी में सेक्स डिजाइयर। हिन्दी में...लेकिन छोड़ बेट्टे, हिन्दी में बोलूँगा तो अश्लीलता का ठप्पा लग जाएगा। अंग्रेजी में 'फक यू’ लिखा हुआ टी-शर्ट पहनकर आजकल सरेबाजार दिल्ली में लड़कियाँ घूमती हैं, लेकिन हिन्दी में उसका शुद्ध, शाब्दिक, सात्विक अर्थ बता दो तो बवाल मच जाएगा। खैर, छोड़-छोड़ भी इन बातों को...हाँ, मैं असल मसले पर कहाँ पर था?’’
“दिलदार चॉकलेट में कामदेव बाबा के बाण पर था तू!’’
''हाँ, देख भाई लोगों ने क्या दिमाग लगाया है! सैंट वैलेंटाइन को वैलेंटाइन बाबा बनाने की तैयारी है। ये सब ग्रेट इंडियन ब्रेन की उपज है। वैलेंटाइन डे का देसी वर्जन। अपने कल्चर की यही तो सबसे बड़ी खासियत है दोस्त। हर किसी को प्यार से गले लगा लेती है। फिराक साहेब को सुने हो न—
सरजमीने हिन्द पर अकवामे आलम के फिराक
कारवाँ आते गए, हिन्दोस्ताँ बनता गया।’’
''इंडियन कल्चर की ग्रेटनेस पर ज्ञान बाद में देना, पहले अकवामे आलम समझा दो। फिर वैलेंटाइन वीक के बारे में पूरी-पूरी बात बता दो।’’
''अकवामे आलम—दुनिया की जो कौमें हैं न, शायद उनको कहा गया है। हम तो सुने-सुनाए ज्ञानी हैं दोस्त, जो दिमाग में अटक गया सो रह गया। तुम्हारी तरह पढ़ाकू-रट्टू अव्वल विद्यार्थी नहीं। ये सब छोड़, और गौर से सुन। कभी इंटरव्यू बोर्ड में कोई आइटम हुई तो वैलेंटाइन वीक के बारे में पूछ भी सकती है। सीरियसली...तो चॉकलेट-डे के दिन अपना दिल चॉकलेट की शक्ल में लड़की के सामने पेश करो। दिल के शेप-साइज का चॉकलेट! चॉकलेटी दिल को चाटती लड़की को 10 फरवरी को टेडी-डे के दिन टेडी मिलता है!’’
''टेडी-डे, अजीब-डे!’’ मनीष हैरान था।
''हाँ, टेडी-डे यार, तू बीच में टोका मत कर, बहुत मुश्किल से सारे दिन को एक-एक कर याद किया है। पिछली बार एक ल़ड़की को गलती से रोज-डे के दिन प्रपोज कर दिया था। देहाती, भुच्च, गँवार—कहते हुए एक दूसरे लड़के को गुलाब थमा दिया था उसने सामने के सामने।’’
''साले, जैसे तुम हो, वैसी ही तुम्हें गर्लफ्रेंड भी मिलती है।’’
मनीष ने गाली दी शिवेश को, लेकिन शिवेश पर कोई फर्क नहीं पड़ा। वह पूरी गम्भीरता के साथ वैलेंटाइन वीक के बारे में बताए जा रहा था।
''तो 10 फरवरी टेडी-डे होता है। हिन्दी में कहें तो भालू दिवस! ब्वॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड को गिफ्ट में भालू देता है। क्यूट-क्यूट भालू। इस मैसेज के साथ कि मैं भी इस टेडी जैसा भोला-भाला हूँ। तुम जैसे रखोगी वैसे रहूँगा।
गाल से चिपकाकर सुलाओगी तो गाल से चिपककर सोऊँगा। सीने से चिपकाओगी तो...’’
''आगे बढ़, आगे!’’ मनीष ने शिवेश को हड़काया।
''11 फरवरी प्रॉमिस-डे होता है—वादा दिवस! 'वादा न तोड़...’ याद है न गाना ये, नाच का सुपर हिट आइटम था हमलोगों के बचपन टाइम में...हाहाहा... इस दिन लौंडे वादों के बाग में बालिकाओं को झूला झुलाते हैं। तुम्हारी सहेली को कभी गिफ्ट नहीं दूँगा, तुम्हारी रूममेट को कभी मूवी दिखाने नहीं ले जाऊँगा, तुम्हारी बहन पर कभी बुरी नजर नहीं डालूँगा, टाइप के वैलेंटाइन वादे। अबतक मामला काफी आगे बढ़ चुका होता है। तब आता है 12 फरवरी का दिन—हग-डे यानी भरत मिलाप दिवस; लेकिन नहीं यार, ये दिन भाई को गले लगाने का दिन नहीं होता है। गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड के गले मिलने का दिन होता है।’’
''गले लगने का दिन!’’
''हाँ, हाँ, अरे जिस तरह हर शुभ काम के लिए पोथी-पत्रा लेकर दिन देखा जाता है, मुहूर्त निकाला जाता है, उसी तरह वैलेंटाइन बाबा के शिष्यों ने हर पवित्र काम के लिए दिन डिसाइड किया हुआ है। हग-डे के दिन ब्वॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड एक दूसरे को गले लगाते हैं।’’
“गले लगाते हैं!”
''हाँ-हाँ, गले लगाते हैं। लेकिन थोड़ा कंट्रोल रखना पड़ता है। बेंगलुरु में मेरा एक दोस्त है। एकदम से बलियाटिक बैल है! गाँव में तो जब तक बबुआ-बच्चा था तब तक माँ और दादी ही गले लगाती रहीं। उसके बाद अपने यहाँ कौन गले लगाने आता है देहात में? वहाँ बेंगलुरु में हग-डे के दिन पहली बार किसी जवान लड़की को गले लगाने का मौका मिला। इस मौका मिलने में ही कंट्रोल खो बैठा!’’
''क्या हुआ था?’’ मनीष के चेहरे पर हैरत के भाव थे।
''कमीने ने लड़की की रीढ़ की हड्डी ही तोड़ दी। बेचारी बालिका के साथ डबल ट्रेजडी”
''डबल ट्रेजडी! मतलब!’’
''हाँ यार, पिछले वैलेंटाइन में उसके ब्वॉयफ्रेंड ने उसे इसलिए ठुकरा दिया था कि वो मोटी थी। लिहाजा लड़की ने भूखे पेट रहकर 'जीरो फिगर’ बनाया था। जाहिर है, काफी कमजोर हो गई थी बेचारी, लेकिन ये सांढ़! गाय और बाछी में फर्क ही नहीं कर पाया। बेचारी बालिका मरते-मरते बची। पुलिस केस हो गया था भायजी। तीन महीने तक अन्दर रहना पड़ा था उसे। समझ रहे हो?’’
मनीष ने सिर पकड़ लिया। उधर शिवेश अपने अन्दाज में वैलेंटाइन वीक के बारे में बताए जा रहा था।
''तो हग-डे के दिन थोड़ी जोर आजमाइश हो जाती है। लेकिन ज्यादा जोर आजमाइश की इज़ाज़त नहीं है इस दिन। मधुर गाना सुनो मेरे दोस्त—'लग जा गले कि फिर हसीं रात हो न हो...’ —सुने हो न ये गाना? बस, ऐसे ही एक-दूसरे के दिल की धड़कन को सुनो-महसूस करो और उस सुलगते अहसास को साथ लिए तड़पते हुए अलग हो जाओ। अगला स्टेप किस-डे के दिन उठेगा, वत्स! 13 फरवरी के दिन चुम्बन दिवस। इसी दिन नेहा...’’
''किस-डे के दिन नेहा! ये क्या बात कर रहे हो तुम दोनों? ये नेहा
कौन है?’’ ऐन क्लाइमेक्स से पहले सुजाता पहुँच गई थी गुरु-शिष्य बैठकी के बीच।
''तुम्हारी नईवाली भाभी है नेहा, और कौन है!’’ मनीष ने मजा लिया। शिवेश झेंप गया। सुजाता हँस पड़ी। शिवेश के बारे में सबकुछ पता था उसे। उसके हर लफड़े के बारे में जानती थी। मनीष बताते रहता था। उसके पापा और शिवेश के पापा में गहरी दोस्ती थी। दोनों नेता थे। लिहाजा बचपन से सुजाता को शिवेश जानता था। बाद में जब सुजाता मनीष की गर्लफ्रेंड बनी तो ये दोस्ती और गहरी हो गई।
शिवेश और सुजाता दोनों नेता परिवार से आते थे। उनके ऊपर कैरियर का कोई दबाव नहीं था। दोनों काफी हद तक दिल्ली में टाइमपास करते थे, जबकि मिडिल क्लास फैमिली से आनेवाला मनीष टोटली कैरियर ओरिएंटेड लड़का था। वो कुछ बनने की ख्वाहिश लिए दिल्ली आया था। एक उसका जिगरी यार था तो दूसरी उसकी जिन्दगी थी। उसकी बचपन की प्यार। सूरत से प्यारी, लेकिन परले दर्जे की शरारती। जितनी बड़ी खिलंदड़, उतनी ही ज्यादा अक्खड़। कब किसको कहाँ धो देगी, ये उसे खुद पता नहीं होता था। वैलेंटाइन डे की पार्टी में मोहिनी का ब्वॉयफ्रेंड संजीव ही उसके हत्थे चढ़ गया था!

किताब : वैलेंटाइन बाबा
लेखक : शशिकांत मिश्र
विधा : उपन्यास
प्रकाशन : राधाकृष्ण प्रकाशन (फंडा)
पृष्ठ संख्या : 160
मूल्य : 150/-

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First published: February 7, 2020, 7:44 PM IST
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