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Valentine Day 2020: क्वीयर- कुछ ऐसा भी होता है प्यार का इजहार, करें स्वीकार

News18Hindi
Updated: February 8, 2020, 1:07 PM IST
Valentine Day 2020: क्वीयर- कुछ ऐसा भी होता है प्यार का इजहार, करें स्वीकार
जब मैं 17 साल का था, मेरे मन में यह तय था कि मैं गे हूं...

देश में लाखों ऐसे लोग हैं जो अपनी सेक्सुएलिटी, रिलेशनशिप्स और समाज में अपनी जगह को लेकर संघर्ष करते दिखते हैं.

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  • Last Updated: February 8, 2020, 1:07 PM IST
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देश में आयुष्मान खुराना की नई रोमांटिक फ़िल्म शुभ मंगल ज़्यादा सावधान की चर्चा इस समय ज़ोरों पर है. खुराना ने समलैंगिकों पर बनी इस फ़िल्म में काम किया है. पर देश में लाखों ऐसे लोग हैं जो अपनी सेक्सुएलिटी, रिलेशनशिप्स और समाज में अपनी जगह को लेकर संघर्ष करते दिखते हैं. हालांकि, सितम्बर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को आपराधिक बताने वाली धारा 377 को समाप्त कर दिया था पर क़ानूनी अड़चनें भले ही हट गई हों, समाज ने जो उनके सामने रुकावटें खड़ी की हैं, वे क़ायम हैं.

जीवन का क्वीयर तरीका
हम यह अमूमन मानते हैं कि कोई अगर पेनिस के साथ पैदा हुआ है तो वह पुरुष होगा और वजाइना के साथ पैदा होने वाली स्त्री. यह भी कि दुनिया में अमूमन बाइनरी के रूप में, स्त्री-पुरुष में यौन संबंध स्थापित होता है और वह बच्चे पैदा करते हैं. इसे इसी तरह से अभी भी देखा जाता है लेकिन मानव यौनिकता (human sexuality) का फलक बहुत बड़ा है और सारे लोग इन दो संकीर्ण श्रेणियों में फिट नहीं बैठते हैं.

इसे भी पढ़ेंः Valentine Day 2020: आकर्षण से प्यार तक का सफर, ऐसे होती है Love की शुरुआत

लोग अब अपने पार्टनर्स खोजते हैं और वे इस संकीर्ण दायरे से बाहर अपनी यौनिकता की तलाश कर रहे हैं. YouGov के एक सर्वे में कहा गया है कि 18 प्रतिशत लोग टिंडर और OKCupid जैसे डेटिंग ऐप्स का प्रयोग करते हैं जबकि 16 प्रतिशत का कहना था कि वे LGBTQIA+ समुदाय के लिए विशेष रूप से बने ऐप्स जैसे Grindr का प्रयोग समलैंगिक डेटिंग विकल्प के लिए करते हैं.

Heterosexual और Homosexual के अलावा और भी कुछ नए शब्द और परिकल्पनाएं सामाने आई हैं जिन्हें समझने की जरूरत है.
  • बाइसेक्सुअल/बाईरोमांटिक : ऐसा कोई जो पुरुष और महिला दोनों की ओर आकर्षित होता है

  • पैनसेक्सुअल/पैनरोमांटिक : ऐसा कोई जो सभी लिंगों के लोगों यं तक कि ट्रांस के प्रति भी आकर्षित होते हैं

  • एसेक्सुअल/एरोमांटिक: ऐसा कोई जिसे किसी के भी प्रति या तो बहुत ही कम या किसी भी तरह का रोमांटिक आकर्षण नहीं होता है

  • सेक्सुअली/रोमांटिकली फ़्लूइड : ऐसा कोई जिसका सेक्सुअल ओरिएंटेशन समय के साथ बदलता है.

  • क्वीयर : इस शब्द का अर्थ अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग हो सकता है और लैंगिक रूप से अल्पसंख्यक सारे लोग इसके तहत आते हैं


रोमांस, प्यार और सेक्स के बारे में आपके ख्याल क्या हैं.


क्या आप जन्म से ही अलग हैं?
Straight शब्द का प्रयोग भारत में अमूमन LGBTQIA+ लोगों के लिए होता है. ‘कामसूत्र’ में एक पूरा अध्याय समलैंगिकों के कामोत्तेजक (erotic) व्यवहार के बारे में है और खजुराहो के मंदिरों पर ऐसे कामोत्तेजक चित्र हैं जिनमें महिला, महिला को गले लगाते दिख रही है और पुरुष एक-दूसरे को अपना जननांग दिखा रहे हैं. पर इतने कुछ के बाद भी भारत के युवाओं का संघर्ष उस समय बहुत ही बढ़ जाता है जब परिवार और समाज की अपेक्षाओं के अनुरूप विषमलिंगी होने की उनकी अपेक्षाओं पर वे खड़ा नहीं उतरते हैं.

किशोरावस्था में मैं लड़कों के प्रति आकर्षित नहीं थी और जब लड़के मुझमें दिलचस्पी लेते थे तो मेरे ऊपर इसका कोई असर नहीं पड़ता था. मेरे सारे क्रशेज़ अन्य लड़कियां और फ़िल्मी अभिनेत्रियां थीं. 18 वर्ष की उम्र में कॉलेज के हॉस्टल में मुझे पहली बार पता चला कि मेरी तरह और भी हैं और मुझे अपना पार्ट्नर मिल गया. वह मुझसे सीनियर थी और बहुत ज़्यादा जानती थी.

मेरे परिवारवाले मेरे बारे में नहीं जानते थे. मैंने अपनी मां को यह बात बताई पर वह यह स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. मैं अब काम कर रही हूं, मेरे पास एक स्थाई पार्टनर है पर दुनिया की नज़र में हम उसके रूममेट के रूप में रह रहे हैं, दंपति की तरह नहीं. उम्मीद करती हूं कि यह सब बहुत ही जल्दी बदल जाएगा. फ़ेसबुक पर Hertryst on Facebook जैसा ग्रूप हमारे समुदाय कि लिए अच्छा है - राशि, 24, मेकअप आर्टिस्ट, रांची

कुछ तो लोग कहेंगे
भारत के आम जीवन विशेषकर बॉलीवुड में समलैंगिकों का बहुत पहले से ही मज़ाक़ उड़ाया जाता रहा है. इनका चित्रण समलैंगिकों को हास्यास्पद स्त्रैन गुणोंवाले पुरुष के रूप में होता है या वैसा जैसा करण जौहर की फ़िल्म दोस्ताना में गे होने का बहाना करने वाले चरित्र के रूप में चित्रित किया जाता है. इस तरह वैकल्पिक यौनिकता (alternative sexuality) का पूरा स्पेक्ट्रम आम जीवन में रहस्यों में घिरा रह जाता है.

क्वीयर समुदाय को जिस अनुचित तरीक़े से दिखाया जाता है उसकी वजह से इनके बारे में घरों और परिवारों में किंवदंतिया और मज़बूत हो जाती हैं. क्वीयर लोगों को आम जीवन में किस तरह की घृणा और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है उसे इस लड़की की आपबीती को पढ़कर बेहतर समझा जा सकता है. यह लड़की ख़ुद को क्वीयर बताती है और वह अभी भी अपने परिवार से बाहर नहीं निकल पाई है.

जब मैं 17 साल का था, मेरे मन में यह तय था कि मैं गे हूँ. मैंने यह बात सिर्फ़ अपने एक सर्वाधिक विश्वासी मित्र को बताया और इस बारे में सब कुछ अपने मन में ही रखना बहुत ही मुश्किल है. समलैंगिकता के कारण मेरा बचपन बहुत ही निराशा भरा रहा. जब मैं 12-13 साल का था, मैं पुरुषों की नग्न तस्वीर गूगल पर देखा करता था और मैं इसे बहुत ही सामान्य बात समझता था. अब मैं किसी बड़े शहर का रूख करना चाहता हूं ताकि मैं वहां स्वच्छंद रूप से जी सकूं. पर यह इतना आसान कहाँ है- इब्राहिम (नाम बदला हुआ) 20, छात्र, ग्वालियर

पिछली पीढ़ी में ऐसे लोगों की संख्या काफी अधिक थी जो इस बारे में निश्चित थे कि वे समलैंगिक हैं.


मैं क्वीयर हूं, यह मैं कैसे जानता हूं?
ऐसा कोई क्विज़ या जांच नहीं है जिससे यह पता चल सके कि सेक्सुअली दिमाग़ी तौर पर आप क्या हैं. दुर्भाग्य से इस प्रश्न का कोई निर्धारित या निश्चित उत्तर नहीं है. पहला और सबसे महत्त्वपूर्ण कदम है यह समझना कि सेक्सुअली आप क्या चाहते हैं.

  • सेक्सुअली आप खुद की पहचान कैसे करते हैं

  • रोमांस, प्यार और सेक्स के बारे में आपके ख्याल क्या हैं

  • पहचान और आकर्षण बदल सकता है

  • अपनी यौनिक पहचान (sexual identity) के लिए किसी शब्दावली का सावधानी से चुनाव करें


जेंडर और पहचान के बारे में विशाल तकनीकी शब्दावली को समझने से पहले, आकर्षण को समझने की ज़रूरत है. आकर्षण की बात शरीर से ज़्यादा दिमाग़ में होती है. शारीरिक बनावट और जननांग किसी की यौनिक पहचान (sexual identity) को परिभाषित नहीं करते बल्कि आपकी सही पहचान वह है जिसमें आप विश्वास करते हैं.

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आकर्षण वह है जो कोई अपने अंदर से महसूस करता है. मूल रूप से, किसी का अपना यौनिक पसंद उसके सामाजिक परिवेश और ख़ुद के बारे में उसकी जानकारी पर निर्भर करता है. आकर्षण के बारे में यह माना जाता है कि यह लोगों के अपने वश में होता है पर कोई इसे कैसे समझता है और किस तरह उस पर चलता है यह उस व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है.

पिछली पीढ़ी में ऐसे लोगों की संख्या काफी अधिक थी जो इस बारे में निश्चित थे कि वे समलैंगिक हैं पर ऐसे लोगों ने शादी की और बच्चे पैदा किए क्योंकि उनके ऊपर परिवार का दबाव था और सामाजिक पाबंदी थी. पर अब चीज़ें धीरे-धीरे बदल रही हैं. अगर आप ऐसा करते हुए सुरक्षित महसूस करते हैं, तो आपको अवश्य ही इस बारे में स्पष्ट रूप से बोलना चाहिए और यह याद रखिए कि प्यार और रोमांस वही रहता है भले ही आप किसी (स्त्री/पुरुष/उन) के साथ यह करते हैं.

(लेखक- पूजा प्रियंवदा रेडवोम्ब ऑनलाइन प्लैट्फ़ॉर्म पर सेक्सुअल वेलनेस विषय पर लिखती हैं)

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First published: February 8, 2020, 1:06 PM IST
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