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सच्चा प्यार किसी भी हालत में नहीं घबराता, राधा-कृष्ण के प्रेम में ज़ाहिर होता है ये

News18Hindi
Updated: February 12, 2020, 1:15 PM IST
सच्चा प्यार किसी भी हालत में नहीं घबराता, राधा-कृष्ण के प्रेम में ज़ाहिर होता है ये
प्यार का नाम लेने पर सबसे पहले राधा-कृष्ण की जोड़ी को ही लोग याद करते हैं.

हम जब कभी भी नाम लेते हैं तो कहते हैं राधा-कृष्‍ण. कभी भी राधा और श्री कृष्‍ण नहीं कहा जाता. इसका सबसे बड़ा कारण ये है क‌ि राधा कृष्‍ण अलग अलग नहीं बल्क‌ि एक माने जाते हैं.

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  • Last Updated: February 12, 2020, 1:15 PM IST
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भगवान श्रीकृष्ण और उनकी राधा के बारे में कौन नहीं जानता. प्यार का नाम लेने पर सबसे पहले राधा-कृष्ण की जोड़ी को ही लोग याद करते हैं. हम जब कभी भी नाम लेते हैं तो कहते हैं राधा-कृष्‍ण. कभी भी राधा और श्री कृष्‍ण नहीं कहा जाता. इसका सबसे बड़ा कारण ये है क‌ि राधा कृष्‍ण अलग अलग नहीं बल्क‌ि एक माने जाते हैं क्योंक‌ि इनका प्यार ऐसा था क‌ि दो शरीर होते हुए भी दोनों एक आत्मा थे.

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राधा और कृष्‍ण का अद्भुत प्रेम
श्री कृष्‍ण ने कई बार इस बात का एहसास कराया है. कभी राधा का मुंह दूध से जल जाता है तो कभी श्रीकृष्‍ण को फफोले आ जाते हैं. ऐसी ही एक घटना है ज‌िसे पढ़ने के बाद आप यह जान जाएंगे क‌ि राधा और कृष्‍ण के बीच कैसा अद्भुत प्रेम था. इस प्रेम को कभी खत्म नहीं किया जा सकता. इस प्यार के आगे सब झुक सकते हैं.

तीनों लोकों में राधा के प्रेम की स्तुति होती है.


श्रीकृष्ण सिरदर्द से कराह रहे थे
तीनों लोकों में राधा नाम की स्तुति सुनकर एक बार देवऋर्षि नारद चिंतित हो गए. वह स्वयं भी श्रीकृष्ण से बहुत प्रेम करते थे. अपनी इसी समस्या के समाधान के लिए वह श्रीकृष्ण के पास जा पहुंचे. वहां जाकर उन्होंने देखा कि श्रीकृष्ण सिरदर्द से कराह रहे थे. उन्हें काफी पीड़ा हो रही थी. उनकी ऐसी हालत देखकर नारद ने पूछा- भगवन, क्या इस वेदना का कोई उपचार नहीं है?भक्त का चरणोदक भगवन के श्रीमुख में
नारद की बात सुनने के बाद श्रीकृष्ण ने कहा- यदि मेरा कोई भक्त अपना चरणोदक पिला दे, तो यह वेदना शांत हो सकती है. यदि रुक्मिणी अपना चरणोदक पिला दे, तो शायद लाभ हो सकता है. श्रीकृष्ण की बात सुनकर नारद ने सोचा- भक्त का चरणोदक भगवन के श्रीमुख में. फिर रुक्मिणी के पास जाकर नारद ने उन्हें सारा हाल कह सुनाया. रुक्मिणी भी बोलीं- नहीं-नहीं, देवऋर्षि, मैं यह पाप नहीं कर सकती.

सच्‍चे प्रेम की पराकाष्ठा, जो लाभ-हानि की गणना नहीं करता.


श्रीकृष्ण ने नारद को राधा के पास भेजा
इसके बाद नारद ने लौटकर रुक्मिणी की असहमति कृष्ण के सामने व्यक्त कर दी. तब श्रीकृष्ण ने उन्हें राधा के पास भेज दिया. राधा ने जैसे ही श्रीकृष्ण के दर्द के बारे में सुना तो तुरंत एक पात्र में जल लाकर उसमें अपने पैर डुबो दिए और नारद से बोलीं- देवऋर्षि इसे तत्काल कृष्ण के पास ले जाइए. मैं जानती हूं इससे मुझे घोर नर्क मिलेगा किंतु अपने प्रियतम के सुख के लिए मैं यह यातना भोगने को तैयार हूं.

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राधा के प्रेम की स्तुति
तब देवऋर्षि नारद समझ गए कि तीनों लोकों में राधा के प्रेम की स्तुति क्यों होती है. प्रस्‍तुत प्रसंग में राधा ने श्रीकृष्ण के प्रति अपने प्रेम का परिचय दिया. यही है सच्‍चे प्रेम की पराकाष्ठा, जो लाभ-हानि की गणना नहीं करता. सच्चा प्यार किसी भी हालत में नहीं घबराता. सच्चे प्यार को किसी से डर नहीं लगता. वह बस अपनी राह पर आगे बढ़ता रहता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: February 12, 2020, 1:07 PM IST
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