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Valentine Day 2020: आकर्षण से प्यार तक का सफर, ऐसे होती है Love की शुरुआत

News18Hindi
Updated: February 8, 2020, 10:58 AM IST
Valentine Day 2020: आकर्षण से प्यार तक का सफर, ऐसे होती है Love की शुरुआत
लड़कियां लड़कों से पहले जवान हो जाती हैं और इस वजह से उनको सब तरह की बातों से लड़कों से पहले ही गुज़रना होता है.

जब बचपन की जगह युवावस्था (adolescence) लेता है, तो एक शक्तिशाली मानव संबंध का प्रभाव सबसे ज़्यादा होता है और यह उसके लिए ड्राइविंग फोर्स का काम करता है.

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  • Last Updated: February 8, 2020, 10:58 AM IST
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मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, किसी के बारे में आकर्षण का जादू अमूमन चार महीनों तक रहता है. अगर कोई एहसास इससे ज़्यादा समय तक रहे तो इसे संभावित प्यार कहा जा सकता है. जब बचपन की जगह शैशवावस्था (teenage) और युवावस्था (adolescence) लेता है, तो जिस सबसे शक्तिशाली मानव संबंध का प्रभाव सबसे ज़्यादा होता है और जो उसके लिए ड्राइविंग फ़ोर्स का काम करता है, वह है यौनिक आकर्षण (sexual attraction) और प्यार का अनुभव और यह युवावस्था आने या वयस्क होने का
इंतजार नहीं करता.

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बचपन का प्यार?

मैं 9वीं कक्षा में थी और वह एक ट्रेनी शिक्षक था जो हमारे स्कूल में कुछ सप्ताह के लिए आया था. वह बहुत ही आकर्षक और सुंदर था. उसको इम्प्रेस करने के लिए मैंने अपने मैथ्स में सुधार तक किया. कुछ वर्ष बाद कॉलेज में एक शिक्षक को लेकर मेरी यही हालत हो गई और यहां तक कि उससे भविष्य में एक बच्चा भी पैदा करने की बात मैंने सोच ली. दोनों ही मौकों पर यह आकर्षण शारीरिक था, पर इस आकर्षण के बारे में मुंह से कभी कुछ नहीं कहा गया - मीना, 26, पत्रकार, दिल्ली.

अपना पसंदीदा शिक्षक
हम में से अधिकांश का पहला आकर्षण स्कूल के दिनों में होता है, नहीं? मिडल स्कूल में रोमांटिक क्रशेज और कौन किसको पसंद करता है, इस बारे में गपशप आम थी और अमूमन हर का अपना पसंदीदा शिक्षक हुआ करता था. लड़कियों में पीरियड शुरू होने की उम्र अब 9 वर्ष और लड़कों के लिए यह 11 साल हो गया है जब उसमें जवान होने के लक्षण दिखने लगते हैं. जवानी की ओर कदम बढ़ाने की इस उम्र में ये सब अमूमन ऐसे पेश आते हैं जैसे वे वयस्क हो गए हों. प्यूबर्टी उन्हें ऐसे कदम उठाने को उकसाता है जिसके पीछे उनमें आने वाले सेक्सुअल बदलाव होते हैं.बातों को छिपाना
लड़कियां लड़कों से पहले जवान हो जाती हैं और इस वजह से उनको इन सब बातों से लड़कों से पहले ही गुजरना होता है. पहले के ज़माने में इन बातों को छिपाया जाता था और इसको लेकर दोस्तों में- मेरे वाला/तेरी वाली जैसा मजाक किया जाता था. पर हॉर्मोन- टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजेन की वजह से सेक्सुअल ड्राइव जिस तरह की स्थिति बनाता है वह किसी बवंडर से कम नहीं होता और इसके बारे में कल्पनाओं की उड़ान- जैसे और इसके बाद दोनों का जीवन ख़ुशी में बीता, पहला किस और पहला यौन संबंध.

सपना या रोमांस
आप अपने स्पेशल को एक दिन में हजार बार देखना चाहते हो, आपकी भूख-प्यास सब ख़त्म हो जाती है, रातों की नींद गायब हो जाती है और किसी बात में मन नहीं लगता. यह सपनों जैसा या यूं कहें कि रोमांस का फिल्मी अंदाज अमूमन गुप्त, एकतरफा और अनुत्तरित (unreciprocated) ही रह जाता है. अपने पिता के घर में हिंसक होने के कारण मैं हमेशा ही लड़कों से अलग रही हूं. यह लड़का मुझसे तीन साल छोटा था और मेरे एक दोस्त का दोस्त था.

आइडेंटिटी क्रश ऐसे लोगों के लिए होता है जिसके बारे में प्रशंसा के भाव होते हैं और चाहते हैं कि उसे भी पसंद किया जाए.


मैं उससे फोन पर बात करने लगी और शीघ्र ही यह बातचीत अंतरंग बन गई जो सेक्सुअल नहीं होकर एक दूसरे का ख्याल रखने और भावनाओं को लेकर था. मुझे लगा जैसे वह मेरे लिए है. बाद में हम दिल्ली के हुमायूं मकबरे पर मिले जहां एक अंधेरे कोने में उसने मुझे अचानक किस किया. पर इसके बाद वह चलता बना और मैं टूटा दिल लेकर रह गई- पूज्या, 25, शिक्षिका, एनसीआर (नाम बदला हुआ)

कुछ कुछ होता है
जैसा कि लोग कहते हैं कि जिस फल को खाने से मना किया गया हो, वह सबसे मीठा होता है. भारत में सेक्स वैसा ही फल है जिसको अधिकांश युवा-युवतियों को खाने से मना किया गया है और इस वजह से शुरुआती आकर्षण को बहुत ही बड़ा करके देखा जाता है.

मैं 13 साल का था और मस्तराम कॉमिक्स और दोस्तों की कृपा से सेक्स के बारे में थोड़ा-बहुत जानता था. पर जब मैं पहली बार एक वास्तविक लड़की की ओर आकर्षित हुआ और उत्तेजना महसूस की, मैं बहुत ही घबरा गया था. वह हमारे पड़ोस में रहती थी और हम बराबर किसी न किसी कार्यक्रमों में मिलते रहते थे. वह मुझे देखकर अमूमन मुस्कुरा देती थी. मैंने उसे मूवी देखने को कहा और गिफ़्ट और लेटर भी भेजा. पर उसने इन दोनों को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि पापा नहीं मानेंगे. क्या इसका मतलब यह था कि वह हां कहना चाहती थी पर न बोली? -असीम, एनिमेशन आर्टिस्ट, 23, नासिक

फीलिंग ज़्यादा ठोस होना
टीनेज में किसी के प्रति आकर्षण की बात को परिवारों में आज भी पसंद नहीं किया जाता और इस वजह से लड़के-लड़कियां इसे छिपाते हैं और यह भी कि 13 साल की उम्र में आप जो सोचते हैं वह टीनेज के अंतिम वर्षों में आपकी फीलिंग जैसी नहीं होती जब आप 18-19 साल के होते हैं. बाद की फीलिंग ज़्यादा ठोस और सेक्सुअल होती है. स्कूलों और कॉलेजों में अब यह कहने की मानो सनक होती है कि आपका कोई बॉयफ़्रेंड या गर्लफ़्रेंड है. अमूमन इस तरह की बातचीत ग्रूप्स जैसे स्कूल ट्रिप्स, कॉलेज इवेंट्स, फैमिली प्रोग्राम के दौरान होती है और तब अगला कदम होता है अकेले मिलने का जिस दौरान अंतरंगता दिखाने के लिए हग या किस करने की बात भी हो सकती है.

जमाना है दुश्मन मोहब्बत का
भारतीय समाज टीनेज रोमांस को अमूमन स्वीकार नहीं करता और अधिकांश परेंट्स यह समझते हैं कि इसका मतलब सिर्फ़ सेक्स से है. एक समाज जो कौमार्य (virginity) और शादी को बहुत ज़्यादा महत्व देता है, यह स्वाभाविक है. इसलिए वे इस आकर्षण को दीवानगी/क्रश/पपी लव बताते हैं और इसे अगंभीर बताकर इसे नकार देते हैं. इस उम्र में आकर्षण, भले ही वह एकतरफा या दोतरफा हो, इसके साथ अस्वीकार कर दिए जाने (rejection), दोस्तों और बड़ों के उपहास (ridicule), कोई कैसे दिखता है
और पहचान के संकट में भी उलझा होता है.

मांटिक क्रश वो है जब कोई अपनी ही उम्र के किसी से बहुत प्रभावित होता है.


मुझसे प्यार है या नहीं है?
शुरुआती आकर्षण तीन तरह के होते हैं. आइडेंटिटी क्रश ऐसे लोगों के लिए होता है जिसके बारे में प्रशंसा के भाव होते हैं और चाहते हैं कि उसे भी पसंद किया जाए, या उसे एक आदर्श पार्टनर के रूप में देखता है जो अमूमन शिक्षक होता है और यह शायद एकतरफा ही रह जाता है. रोमांटिक क्रश वो है जब कोई अपनी ही उम्र के किसी से बहुत प्रभावित होता है. यह आसपास रहनेवाला/रहनेवाली कोई हो सकती है और यह भी हो सकता है कि इसका थोड़ा प्रत्युत्तर (receprocation) भी मिले.

काल्पनिक मिलना-जुलना
सेलेब्रिटी क्रश- इसकी जड़ अमूमन फेंटेसी में होती है और इसमें किसी भी तरह का संपर्क नहीं होता, सिर्फ काल्पनिक संवाद होते हैं, काल्पनिक मिलना-जुलना होता है और यह मास्टर्बेशन के लिए उत्तेजना देता है और टीनेज में अलमारियों/बाथरूमों को सजाने के लिए होता है. इनमें से अधिकांश रिलेशनशिप्स के रंग उखड़ जाते हैं पर युवावस्था में इस तरह के वाकये सामाजिक कौशल को बढ़ाते हैं, दूसरे सेक्स के बारे में और जानने का मौका देते हैं और खुद के सेक्सुअल प्रेफ्रेंस और पहचान के बारे में पता चलता है.

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शुरुआती आकर्षण प्यार नहीं हो सकता
कई बार इससे नई तरह की दिलचस्पी भी जागती है जैसेअगर वह टेनिस खेलना जानती है तो मैं भी सीखूंगा, अगर वह रीडर है तो मैं भी बनूंगी. यह सही है कि शुरुआती आकर्षण प्यार नहीं हो सकता क्योंकि इसके लिए धैर्य और अटेन्शन की जरूरत होती है और इस उम्र में इन दोनों ही बातों की कमी होती है. पर हो सकता है कि आगे चलकर यह प्यार का रूप ले ले. उस समय के आने तक सहमति और सुरक्षित रूप से प्यार बांटते चलो.
(लेखिका- पूजा प्रियंवदा सेक्सुअल वेलनेस पर रेडवोम्ब में कॉलम लिखती हैं)

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First published: February 6, 2020, 3:31 PM IST
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