लाइव टीवी

Valentine Day 2020: प्यार और सेक्स के बारे में हम लड़कों को क्या सिखाते हैं?

News18Hindi
Updated: February 5, 2020, 5:29 PM IST
Valentine Day 2020: प्यार और सेक्स के बारे में हम लड़कों को क्या सिखाते हैं?
स्कूल में सीनियर लड़के लड़कियों का उनके घर तक पीछा करते थे, उनके पीछे सीटी बजाते थे और उन्हें परेशान करते थे.

किसी का पीछा करना आसान है, पर किसी को समझना कठिन है. किसी को उसकी पसंद के लिए सम्मान देना बहुत ही मुश्किल है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 5, 2020, 5:29 PM IST
  • Share this:
किरण (नाम बदला हुआ) प्यार, रिलेशनशिप और सेक्स के बारे में हज़ार सपने लेकर जवान हुआ. आकर्षण क्या है इस बारे में मुझे बहुत पहले, शायद जब मैं तीसरी या चौथी कक्षा में था, तभी पता चल गया. कई बार यह अनुभव काफी तीव्र होता था और मैं यह जानना चाहता था कि यह क्या है. इसके बारे में थोड़ा बहुत उसको तब पता चला जब उसने बॉलीवुड की फिल्में देखीं. पर 90 के दशक में उत्तर प्रदेश के छोटे से शहर में रह रहे किरण के मां-बाप काफी सख्त थे और वे उसे मूवी देखने की इजाज़त नहीं देते थे. इसलिए वह अपने दोस्तों के साथ फिल्म देखने के लिए क्लास बंक करता था.

इसे भी पढ़ेंः Valentine Day 2020: इस बार रंगारंग फूलों के बीच मनाएं अपना वैलेंटाइन डे, पहुंच जाएं इस जगह

सीनियर लड़के लड़कियों का पीछा करते थे
डीडीएलजे का वह सीन उसे बहुत ही स्पष्ट रूप से याद है जब हीरोइन को आकर्षित करने के लिए हीरो उसके सामने उसकी ब्रा लहराता है. मुझे लगा कि यह तरीका है अपनी गर्लफ्रेंड को यह कहने का कि आप उसे पसंद करते हैं. मैं सहमति के बारे में नहीं जनता था. किरण के आसपास कोई भी इसके बारे में नहीं जनता था. वह बताता है कि स्कूल में सीनियर लड़के लड़कियों का उनके घर तक पीछा करते थे, उनके पीछे सीटी बजाते थे और उन्हें परेशान करते थे. उसको यह नॉर्मल लगता था और उसके घर में जो माहौल था उसे देखते हुए उसे यह रोमांटिक भी लगता था.

महिलाओं और रिलेशनशिप के बारे में स्वस्थ व्यवहार अपनाना कठिन था.


हीरो को हीरोइन पसंद तो थी
मेरे पैरेंट्स में काफी झगड़ा होता था. वह एक-दूसरे पर चिल्लाते थे, एक-दूसरे को भला-बुरा कहते थे और कई बार एक दूसरे पर कुछ भी उठाकर फेंकते थे. मुझे इन सब बातों से डर लगता था- किरण ने कहा. उसके मां-बाप एक-दूसरे को नापसंद करते थे यह पूरी तरह ज़ाहिर था. इसीलिए मूवी में दिखाए जाने वाले रोमांस को उसने ख़ुशी-ख़ुशी स्वीकार कर लिया क्योंकि कम से कम यहां हीरो को हीरोइन पसंद तो थी. मेरा घर मेरे लिए एक बुरे सपने की तरह था और फिल्मों में जो दिखाया जाता था वह एक सुखद सपने की तरह. मुझे लगा कि किसी का पीछा करना आनंद देने वाला और क्यूट था, यह मेरे घर की चीख-चिल्लाहट की तरह नहीं था.महिलाओं को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है
मुझे यह कभी नहीं लगा कि ये दोनों ही गलत हैं. एक बच्चे के रूप में मैं हमेशा ही उदास रहा और रोमांस मेरी ख़ुशी के लिए जरूरी था. जब वह 15 साल का हुआ तो उसके विचार बदलने लगे. एक दिन उसकी बहन ट्यूशन से रोते हुए वापस आई. वह अपने मां-बाप को कुछ भी नहीं बता रही थी. अंततः उसने किरण को बताया कि शाम को ट्यूशन से घर वापस आते हुए दो लोगों ने उसका पीछा किया है. ये लोग शराब के नशे में थे. इन लोगों ने उसे अनुचित तरीक़े से छुआ और मोटरबाइक पर उसका पीछा किया. यह पहला मौका था जब मुझे पता चला कि महिलाओं को किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

अश्लील बातें कहते थे
मैं खुश हूं कि मेरी बहन ने मुझे यह बात बताई. मैं एक ऐसी उम्र में था जब मुझे एक गर्लफ्रेंड की तलाश थी और मेरी बहन किन हालात से गुजर रही थी अगर मैंने यह नहीं सुना होता तो मैं भी किसी लड़की का पीछा करता और उसे परेशान करता. लेकिन इतना कुछ समझने के बाद भी महिलाओं और रिलेशनशिप के बारे में स्वस्थ व्यवहार अपनाना कठिन था. उसने पाया कि उससे बड़े उसके कजिन महिलाओं का मोटरबाइक पर पीछा करते और उनको अश्लील बातें कहते थे. जब किरण ने उन्हें इस बारे में टोका तो उनका कहना था- ये लड़कियां सज-धज के इधर-उधर घूमती हैं और अगर वह सुंदर दिखती हैं तो मैं खुद को कंट्रोल नहीं कर सकता न?

पॉर्न के माध्यम से ही पता चला
लगभग इसी समय उसके इन्हीं कजिंस ने किरण को पॉर्नोग्राफी के बारे में बताया और वह बराबर इसकी आपूर्ति करते थे. देखिए मैं यह नहीं कहता कि पॉर्न देखना पूरी तरह गलत है. पर मुश्किल यह थी कि उस उम्र में मेरी कोई भी गर्लफ्रेंड नहीं थी. जहां मैं पला-बढ़ा वहां लड़का-लड़की के बीच बात करना भी मना था. अगर हम कभी बात भी करते थे तो प्यार या सेक्स के बारे में नहीं. एक टीनएजर के रूप में किरण को महिलाओं और उनकी सेक्शुएलिटी के बारे में पॉर्न के माध्यम से ही पता चला. इनमें से कुछ पॉर्न तो बेहद ख़राब और अपमानजनक थे. किसी महिला के निकट होने का यह मेरा एकमात्र अनुभव था. महिलाओं को एक वस्तु के रूप में देखना मेरे लिए बेहद आसान हो गया.

खुलकर बोलने वाली और खुले मिज़ाज की
कॉलेज की शिक्षा के लिए दिल्ली जाने के बाद ही किरण के महिला मित्र बने. इनमें से कुछ बहुत ही खुलकर बोलने वाली और खुले मिज़ाज की थी. वे किसी भी विषय पर बात करती थीं. शुरू में मैं इससे काफ़ी घबरा जाता था. किरण के लिए अच्छी बात यह रही कि वह जानना चाहता था और सीखने के लिए तैयार था. उसने नई बातों को समझने का प्रयास किया. उसने फ़ेमिनिज़म के बारे में लेक्चर सुने और सहमति (consent) के वर्कशॉप में हिस्सा लिया.  कई बार तो यह बहुत ही डरावना लगता था. मुझे लगा कि मैं जिन बातों को लेकर जवान हुआ हूं वह सब ढह रहा है और मुझे यह भी पता चला कि मेरा बचपन कितना नुकसानदेह रहा है.

रिलेशनशिप में होने से उसको पता चल गया कि प्यार जटिल (complicated) है.


किसी का पीछा करना आसान है पर किसी को समझना कठिन
मुझे इस बात का दुख था कि मेरे जीवन में आनेवाले अन्य पुरुष मेरे कजिन, मेरे पिता, बचपन के मेरे मित्र लोग कभी भी इन बातों को नहीं सीख पाएंगे. कॉलेज जाना और अंततः रिलेशनशिप में होने से उसको पता चल गया कि प्यार जटिल (complicated) है. यह मूवी की तरह तो एकदम नहीं है. किसी का पीछा करना आसान है, पर किसी को समझना कठिन है. किसी को उसकी पसंद के लिए सम्मान देना बहुत ही मुश्किल है. अपने पार्टनर को बराबर का समझना कितना महत्त्वपूर्ण है, यह उसने समझा क्योंकि इसके बिना वास्तविक बातचीत मुश्किल है.

सेक्स में कितनी सारी बातें शामिल हैं 
मैं अपने गर्लफ्रेंड से बात करना चाहता था. अधिकांश लोग गलती यह करते हैं कि वह अपने गर्लफ्रेंड को सिर्फ सुनाते हैं. वह अपना हाथ ऊपर रखना चाहते हैं तो फिर इसे तो आप बातचीत नहीं कह सकते. उसे बाद में पता चला कि सेक्स भी वह नहीं है जो पोर्न में उसने देखा था. उसे यह देखकर काफ़ी अचरज हुआ कि सेक्स में कितनी सारी बातें शामिल हैं जिसका अंदाजा पोर्न देखकर नहीं होता. पीछे मुड़कर देखने पर उसे लगता है कि अच्छा होता कि जीवन में शुरू में उसे कुछ बातों का पता होता.

इसे भी पढ़ेंः Valentine Day 2020: डेटिंग की कर रहे हैं तैयारी, जानें क्या करें और क्या नहीं

मैं परफेक्ट नहीं हूं
वह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां कम उम्र में महिला-पुरुष एक दूसरे के दोस्त बन सकें ताकि वह एक-दूसरे को मनुष्य मानें और एक-दूसरे की समस्या को समझें. दूसरा जेंडर उनके लिए एक रहस्य नहीं होना चाहिए, वह उन्हें भी मनुष्य समझें. बराबर का हकवाला मनुष्य. अंत में उसने कहा- मैं परफेक्ट नहीं हूं. मुझे अपने व्यक्तित्व से कई बातों को हटाना है. मेरे बचपन ने और कई पुरुषों ने महिलाओं के बारे में बहुत ही नाजायज बातें सिखाई थीं और मैं अभी भी इनसे उबरने की कोशिश कर रहा हूं.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए लाइफ़ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 5, 2020, 5:29 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर