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  • Valentine Day 2021: अटूट प्‍यार के प्रतीक ‘सस्सी-पुन्नू’ की अमर प्रेम कहानी, रेगिस्‍तान की तपिश में दी थी जान

Valentine Day 2021: अटूट प्‍यार के प्रतीक ‘सस्सी-पुन्नू’ की अमर प्रेम कहानी, रेगिस्‍तान की तपिश में दी थी जान

सस्सी-पुन्नू की लोककथा राग मुल्तानी काफी में गाई भी जाती है जिसकी प्र‍स्‍तुति बहुत ही भाव विभोर करने वाली है.

सस्सी-पुन्नू की लोककथा राग मुल्तानी काफी में गाई भी जाती है जिसकी प्र‍स्‍तुति बहुत ही भाव विभोर करने वाली है.

Valentine Day 2021 Love Story: सस्सी-पुन्नू (Sassi Punnu) की प्रेम कहानी (Love Story) पंजाब की धरती में गहराई से रची बसी है.

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    Valentine Day 2021 : हम सभी प्यार के लिए लैला-मजनू, हीर-रांझा, सस्सी-पुन्नू और सोनी-महिवाल के अफसाने बचपन से ही सुनते आ रहे हैं. कभी भी अगर अटूट प्रेम और त्याग की बात की जाती है तो सबसे पहले इन्हीं का नाम लिया जाता है. सस्सी-पुन्नू (Sassi Punnu) की प्रेम कहानी (Love Story) पंजाब की धरती में गहराई से रची बसी है. सस्सी-पुन्नू की लोककथा राग मुल्तानी काफी में गाई भी जाती है जिसकी प्र‍स्‍तुति बहुत ही भाव विभोर करने वाली है. तो इस वैलेंटाइन डे (Valentine Day) आपको पंजाब की इसी सस्सी-पुन्नू की कहानी बताते हैं जो इतिहास के पन्नों में अटूट प्‍यार और त्‍याग की अमर प्रेम कहानी के तौर पर दर्ज है.

    ये है प्रेम कहानी

    सस्सी का जन्म भंबोर राज्य के राजा के घर हुआ था. लाख मिन्नतों और दान-दक्षिणा के बाद राजा के घर एक खूबसूरत सी बच्‍ची ने जन्म लिया. जन्‍म के साथ हीं ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी कर दी की ये बच्ची बड़ी होकर अनोखा इश्क करेगी. यह सुनते हीं राजा और उसका पूरा परिवार परेशान हो गया और इतनी मन्‍नतों से मिली संतान को मारने का हुक्‍कम दे दिया. लेकिन राज मंत्रियों ने बच्ची को सोने से भरी संदूक में डाल नदी में बहा देने का सुझाव दिया. बच्ची तूफानी नदी से बच निकली. नदी किनारे कपड़े साफ कर रहे धोबी की नजर उस पर पड़ी. धोबी ने नदी में डूबता-उतराता संदूक देखा और उसे निकाल कर खोला. इतना सारा सोना और नन्ही-सी बच्ची को पाकर वह बहुत खुश हुआ.

    चंद्र कला के समान सुंदर होने की वजह से उसने बच्‍ची का नाम सस्सी रखा. समय बीतता गया और सस्सी की सुंदरता के चर्चे दूर-दूर तक होने लगे. उधर धोबी समाज में से हीं किसी ने भंबोर के राजा को इसकी जानकारी दी कि एक धोबी के घर अप्सरा-सी सुंदर बालिका है जो राजमहल की शोभा बनने के लायक है. अधेड़ राजा ने सस्सी के घर विवाह का न्योता भेज दिया. सस्सी का पालक पिता राजा के बुलाने पर वहां गया और उसने सस्सी के जन्म समय का ताबीज राजा को दिखाकर अपनी मजबूरी बतायी. ताबीज देखकर राजा को बहुत पुरानी वो सारी बातें याद आ गईं. उसे अपनी नीयत पर शर्म आयी. सारी कहानी सुनकर रानी मां अपनी बेटी की ममता में तड़प उठी. वह सस्सी को महलों में वापस लाना चाहती थी. लेकिन अपने बचपन की घटना को सुन सस्सी ने महल में जाने से इनकार कर दिया. राजा ने धोबी के छोटे से घर को हीं महल में बदल दिया.

    लेकिन समय ने दुबारा करबट ली. एक दिन सस्सी, नदी के रास्ते आनेवाले सौदागरों के पास पुन्नू की तस्‍वीर देखी और उस पर मोहित हो गयी. वह बिना मिले ही पुन्‍नू के लिए तड़पने लगी. उधर दूर देश में रहनेवाला पुन्नू इस बात से अंजान था. बहुत ही खोजबीन के बाद सस्‍सी ने पुन्‍नू का पता पा लिया. जानकारी देने वाले सौदागरों ने इनाम के लालच में खुद को पुन्नू का भाई बताया़ और सस्सी ने उसे गिरफ्तार करवा लिया. सस्‍सी ने शर्त रखी की वह पुन्नू को लेकर आए तो वह उसे छोड़ देगी.

    उधर माता पिता के मना करने के बाद भी सौदागरों ने पुन्नू को अपने साथ चलने के लिए मना लिया. पुन्नू को लेकर कारवां भंबोर लौटा. सौदागरों ने अपने ऊंट सस्‍सी के बाग में आजाद छोड़ दिये और उन ऊंटों ने सारे बाग उजाड़ दिये. जिससे गुस्सा होकर सस्सी ने कारवां वालों की खूब खबर ली. लेकिन अंजान पुन्नू कारवां से अलग घूमता-फिरता बाग में पहुंचा और वहां सजे सस्सी की हीं सेज पर सो गया. चीखा पुकार की आवाज से पुन्नू की नींद टूटी तो सामने सस्सी नजर आई जो कांरवा को खदेर रही थी. दोनों की पहली बार आंखें चार हुए. सस्सी पुन्नू प्रेम में इस कदर खो गये कि दस दिन कैसे गुजर गये पता ही नहीं चला.

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    उधर, पुन्नू की माता अपने पुत्र के वियोग में तड़पने लगी. पुन्नू के भाइयों से मां का यह हाल देखकर उसे लेने निकल पड़े. पुन्‍नू के जाने से इंकार करने पर उन्होंने उसे खूब शराब पिलायी और बेहोशी की हालत में उसे साथ ले लिया. इधर सस्‍सी रोती तड़पती रही. सस्‍सी की मां ने उसे बहुत समझाया लेकिन सस्‍सी ने यह तय कर लिया कि वह पुन्‍नू तक जाएगी. सस्‍सी की मां ने उसे लंबे जलते रेगीस्तान का डर दिखाया लेकिन सस्सी तो पुन्नू से मिलने को बेकरार थी़.

    सस्सी अपने पुन्नू की तलाश में रेगिस्‍तान में चल पड़ी और नंगे पांव उस आग के दरिया में अकेली ही उतर गयी. चिलचिलाती धूप, धधकती रेत और भयानक लू के थपेड़ों से वह जख्‍मी होती गई. उसे इस हाल में एक भेड़ें चरानेवाले ने देखा, लेकिन निर्जन जलते रेगिस्तान में किसी लड़की को देख वह डर गया और छिप गया. मदद के लिए पुकारती सस्सी वहीं प्राण त्‍याग दी.

    उधर, पुन्नू होश में आया तो वह भी अपनी सस्सी के लिए तड़प उठा. वह भी जलते रेगिस्तान में सस्‍सी तक पहुंचने के लिए बढ़ा. आगे बढ़ते बढ़ते वह उसी जगह पहुंचा जहां सस्सी को जलते रेगिस्‍तान ने निगल लिया था. वहां अभी तक चरवाहा बैठा था और उसी ने सस्सी की रेतीली समाधि के बारे में पुन्नू को बताया और उसे स्‍थान पर ले गया. पुन्नू ने भी वहीं समाधि ले ली.

    कई सिनेमा बनी इस प्रेम कहानी पर

    साल 1932 में शारदा मूवीटोन ने रजत पट पर इन दोनों की कहानी को पहली बार प्रस्‍तुत किया. साल 1933 में इस कहानी को महालक्ष्मी सिनेटोन ने भी ‘बुलबुले पंजाब’ उर्फ ‘फेयरी ऑफ पंजाब’ के नाम से परदे पर पेश किया. इसके बाद 1935 में इस कथा को ‘सस्सी’ नाम से और 1946 में वासवानी आर्ट प्रोडक्शंस ने ‘सस्सी-पुन्नू’ फिल्म से दर्शकों के सामने पेश किया. ये सारी ही फिल्में हिट रहीं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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