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वंदना टेटे को मिलेगा शैलप्रिया स्मृति सम्मान, पढ़ें उनकी चुनिंदा कविताएं

News18Hindi
Updated: December 3, 2019, 12:30 PM IST
वंदना टेटे को मिलेगा शैलप्रिया स्मृति सम्मान, पढ़ें उनकी चुनिंदा कविताएं
वंदना टेटे को मिलेगा शैलप्रिया स्मृति सम्मान

वंदना टेटे के काव्य संकलन ‘कोनजोगा’ से ली गईं दो कविताएं आपके लिए –

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  • Last Updated: December 3, 2019, 12:30 PM IST
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जानी मानी लेखिका वंदना टेटे को हाल ही में पांचवां शैलप्रिया स्मृति सम्मान मिला है. हिन्दी और खड़िया में उनके लेख, कविताएं, कहानियां स्थानीय और राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं. अब जो पुरस्कार उन्हें मिला है वह जिन कवयित्री के सम्मान में दिया जाता है, उनकी महज 46 बरस की उम्र में मृत्यु हो गई थी. अशोक प्रियदर्शी, महादेव टोप्पो और प्रियदर्शन के निर्णायक मंडल ने कहा,‘पिछले तीन दशकों से झारखंड के साहित्यिक-सांस्कृतिक मोर्चे पर सक्रिय वंदना टेटे लगातार लहूलुहान की जा रही आदिवासी अस्मिता के पक्ष में एक मज़बूत आवाज़ की तरह उभरी हैं. उनका लेखन इतिहास और सभ्यता के चक्के तले कुचली जा रही और हाशिए पर डाली जा रही संस्कृतियों की धुकधुकी से बना लेखन है. यह इतिहास की मुख्यधारा की शक्तियों के ख़िलाफ़ उस जनजातीय प्रतिरोध का साहित्य है जिसने हाल के दिनों में दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है.’

वंदना टेटे को मिलेगा शैलप्रिया स्मृति सम्मान
वंदना टेटे को मिलेगा शैलप्रिया स्मृति सम्मान


 

वंदना टेटे के काव्य संकलन ‘कोनजोगा’ से ली गईं दो कविताएं आपके लिए –

औरत -1
कई-कई मोर्चे पर खड़ी
लड़ रही औरत.भीड़ में अकेली.
अनवरत
थकती-टूटती
फिर मजबूत करती खुद को खुद से.
खेतों, खलिहानों में
जंगल-मरुभूमि में
घर में, आंगन में.
तुम्हारी खींची लक्ष्मण रेखा
के खिलाफ
उसने बो दिये हैं संघर्ष-बीज
और पिरो दिये हैं मधुर गीत
हताश होती और उलाहने देती
तुम्हारी नफरत भरी आवाज को
बना लिया है उसने अपनी ताकत.

मिटाने को आतुर हैं उसके हाथ
हर उस लकीर को
जो बांधते हैं उसकी सीमा
और कराते हैं कमतरी का एहसास
कोख से लेकर मृत्यु तक.

किंतु अब देखने लगी हैं स्वनिल आंखें
मोर्चे में फतह के बाद
एक सुंदर कोमल दूसरी दुनिया के निर्माण की
कहीं शक नहीं उसे
अपने सपनों के सच होने में.
शक है उसे,
तो तुम्हारी नीयत पर
क्योंकि वह परिचित है
दोमुंहे सांप की तुम्हारी नीति से.

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औरत -2
न जाने कितने
जीवन के दशक
कितने मिटते बसंत
गुजारे उसने
पर
अभी भी सऊर नहीं
घर चलाने का
बच्चे पालने का
खाना बनाने का
सेवा करने का
रिझाने का.

कम नहीं होते
जीवन के चार दशकों का बसंत
पर
न जाने वो लड़की
जो अब औरत है
अपने औरतपनसे
बाहर कब निकलेगी
या फिर औरत कब बनेगी.

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First published: December 3, 2019, 11:26 AM IST
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