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Vat Savitri Purnima Vrat 2019: वट सावित्री व्रत की इस विधि से करें पूजा, लंबी होगी पति की उम्र, जीवन में होगी ख़ुशी

पूर्णिमा को वट सावित्री व्रत की इस विधि से करें पूजा, लंबी होगी पति की उम्र, जीवन में होगी ख़ुशी
पूर्णिमा को वट सावित्री व्रत की इस विधि से करें पूजा, लंबी होगी पति की उम्र, जीवन में होगी ख़ुशी

Vat Savitri Purnima Vrat 2019, वट सावित्री व्रत २०१९: जानिए आखिर क्यों रखती हैं महिलाएं वट सावित्री पूर्णिमा व्रत. ये है महत्व...

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Vat Savitri Purnima Vrat 2019, Vat Savitri Purnima Vrat Puja Vidhi and Importance: हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाएं सौभाग्य घर की सुख शांति, पति की लंबी उम्र और तरक्की के लिए, बच्चों की खुशहाली के लिए ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन पूरा दिन व्रत रहकर वट वृक्ष की पूजा करती हैं. पूर्णिमा से शुरू होने वाल हिंदू माह में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या में पड़ता है, जो शनि जयंती के साथ होता है. वहीं अमावस्या तिथि से हिंदू माह की शुरुआत वाले पंचांग में वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, इसे वट पूर्णिमा व्रत कहा जाता है. यही वजह है कि उत्तर भारतीय महिलायें पहले ही ये व्रत कर लेती हैं जबकि दक्षिणी भारतीय राज्यों, महाराष्ट्र, गुजरात में शादीशुदा महिलाएं 15 दिन बाद ये व्रत रखती हैं. इस बार 16 जून रविवार को वट पूर्णिमा का व्रत मनाया जा रहा है. आइए जानते हैं व्रत की पूजा विधि और महत्व:

वट सावित्री व्रत पूजा विधि:
सुहागिन महिलाएं इस दिन तड़के सुबह उठकर नहा-धोकर पवित्र हो जाएं. इसके बाद लाल या पीली साड़ी पहनकर पूरा दुल्हन की तरह सजें-संवरें. अब बांस की पूजा वाली डलिया में पूजा का सारा सामान व्यवस्थित तरीके से रख लें. अब वट (बरगद) के पेड़ के नीचे के स्थान को अच्छे से साफ़ कर वहां एक चौकी लगाकर सावित्री और सत्यवान की मूर्ति स्थापित कर दें. इसके बाद फूल, रोली, कलावा, अक्षत, दिया, धूपबत्ती और सिन्दूर से उनका पूजन करें.

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इसके बाद उन्हें लाल रंग का वस्त्र अर्पित करें और साथ ही फल भी चढ़ाएं. इसके बाद बेना (पंखे) से हवा करें. अब अपने बालों में बरगद का एक पत्ता खोंस लें. अब खड़े होकर 5, 11, 21, 51, 108 यानी कि विषम संख्या में वट के पेड़ के चारों तरफ परिक्रमा करें. पंडित जी से आग्रह करें कि वो वट सावित्री व्रत की कथा का पाठ करें.



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वट पूर्णिमा का महत्व :
महिलाएं सौभाग्य और खुशहाली की प्राप्ति के लिए ये व्रत करती हैं. मान्यता है कि इससे पति और बच्चों की आयु लंबी होती है. साथ ही पाप कर्मों का भी नाश होता है. हिंदू धर्म में ज्येष्ठ की काफी धार्मिक मान्यता है. लोग मनोकामना पूरी करने के लिए इस दिन गंगा में दुबकी लगाते हैं.

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