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वट सावित्री व्रत कथा: इस कथा को सुनने से लंबी होगी पति की उम्र, सुखी रहेगा जीवन!

News18Hindi
Updated: May 30, 2019, 6:36 AM IST
वट सावित्री व्रत कथा: इस कथा को सुनने से लंबी होगी पति की उम्र, सुखी रहेगा जीवन!
अखंड सौभाग्य के लिए पढ़ें वट सावित्री व्रत कथा!

वट सावित्री व्रत कथा: देवी सावित्री अपने पति सत्यवान की मौत के बाद यमराज से उसके प्राण वापस ले आई...

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Vat Savitri Vrat 2019, Vat Savitri Vrat Katha: हिंदू धर्म में शादीशुदा महिलाएं वट सावित्री व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति और पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं. इस बार वट सावित्री का व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या को सोमवार के दिन 3 जून को पड़ रहा है. इस दिन महिलाएं पूरे विधि-विधान के साथ वट (बरगद) वृक्ष की पूजा अर्चना करती हैं और वट सावित्री कथा को सुनती हैं. इस कथा को सुनने मात्र से जीवन धन्य हो जाता है और घर में कभी तंगी नहीं रहती है. आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत की कथा:

वट सावित्री व्रत की पौराणिक कथा
मद्र देश के राजा अश्वपति निःसंतान थे. संतान की प्राप्ति के लिए उन्होंने पत्नी के साथ पूरे विधि-विधान सहित देवी सावित्री की पूजा-अर्चना और उपवास किया. देवी सावित्री की कृपा से उचित समय पर रानी ने एक बहुत सुंदर कन्या को जन्म दिया. राजा अश्वपति ने मां सावित्री की कृपा से पैदा हुई बच्ची को 'सावित्री' नाम दिया. सावित्री जब विवाह योग्य हुई तो राजा अश्वपति ने उसे अपने लिए वर खोज लाने का आदेश दिया. पिता का आदेश मानकर सावित्री ने वर की तलाश की और सत्यवान को अपने भावी जीवनसाथी के रूप में चुना.



सावित्री ने जब घर वापस आकर अपने चुनाव की बात पिता को बताई. ठीक उसी समय देवर्षि नारद वहां प्रकट हुए और उन्होंने जानकारी दी कि महाराज द्युमत्सेन का पुत्र सत्यवान की आयु काफी कम है. शादी के 12 साल के बाद ही उसकी मौत हो जाएगी . इसपर पिता अश्वपति ने सावित्री को काफी समझाया बुझाया लेकिन वो अपने फैसले पर अडिग रही. सही समय पर सावित्री और सत्यवान का विवाह संपन्न हुआ. विवाह के बाद सावित्री पिता का महल छोड़कर अपने सास, ससुर और पति सत्यवान के साथ जंगल में जाकर रहने लगी. दरअसल, सत्यवान का राजपाट किसी राजा ने युद्ध में उससे जीत लिया था.

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सावित्री ने विवाह के बाद सत्यवान की लंबी आयु के लिए उपवास रखना शुरू कर दिया. जब सत्यवान की मृत्यु का समय आ गया और यमराज उसे स्वर्गलोक ले जाने लगे तो देवी सावित्री भी उसके पीछे-पीछे हाथ जोड़कर चलने लगीं. इसपर यमराज ने उन्हें वापस लौट जाने को कहा. लेकिन देवी ने उनकी बात नहीं मानी. यमराज ने जब पलट कर देखा तो पता चला कि देवी सावित्री उनके पीछे-पीछे चली आ रही हैं. इसपर उन्होंने सावित्री से पूछा बताओ क्या चाहती हो. इसपर सावित्री ने कहा कि मुझे सौभाग्यवती होने और 100 पुत्रों का वरदान दीजिए. मेरे पुत्र राजसिंहासन पर बैठे अपने बाबा की गोद में खेलें और मेरे ससुर उन्हें देखकर प्रसन्न हों. यमराज ने कहा तथास्तु.सोलमेट की तलाश में भटक रहे हैं आप? मिलेगा ऐसे!

अपने इस एक वरदान में सावित्री ने न केवल अपने ससुर का राजपाट, बल्कि नेत्र-ज्योति समेत सदा सौभाग्यशाली होने का आशीर्वाद भी पा लिया. इस आशीर्वाद की वजह से ही यमराज को मजबूरन सत्यवान के प्राण वापस लौटाने पड़े. तभी से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, परिवार की सुख समृद्धि और संतान की कामना के साथ पूरे विधि-विधान से ये व्रत रखती हैं और वट सावित्री व्रत की कथा सुनती हैं .

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First published: May 30, 2019, 6:36 AM IST
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