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Dussehra: दशहरा पर अगर इन जगहों पर रावण दहन नहीं देखा तो क्या देखा, जिंदगी में एक बार जरूर देखें यहां की Vijayadashami

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Updated: October 7, 2019, 10:42 AM IST
Dussehra: दशहरा पर अगर इन जगहों पर रावण दहन नहीं देखा तो क्या देखा, जिंदगी में एक बार जरूर देखें यहां की Vijayadashami
दशहरा पर अगर इन जगहों पर रावण दहन नहीं देखा तो क्या देखा, जिंदगी में एक बार जरूर देखें यहां की Vijayadashami

दशहरा, विजयादशमी, रावण दहन (Dussehra, Vijayadashami , Ravan Dahan): रावण दहन को लोग बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मानते हैं. इस बार दशहरा (विजयादशमी) 8 अक्टूबर को है.

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  • Last Updated: October 7, 2019, 10:42 AM IST
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दशहरा, विजयादशमी, रावण दहन (Dussehra, Vijayadashami , Ravan Dahan): दशहरा विजयदशमी अच्छाई पर बुराई की जीत के इस त्यौहार को पूरे देश में लोग पूरे धूमधाम से मनाते हैं. इस दिन लोग बुराई के नाश के तौर पर रावण दहन करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्री राम ने लंकापति रावण से 9 दिन युद्ध करने के बाद दसवें दिन उसका संहार किया था. लोग भगवान राम की इस जीत का जश्न मनाने के लिए रावण दहन करते हैं. रावण दहन को लोग बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर पर मानते हैं. इस बार दशहरा (विजयादशमी) 8 अक्टूबर को है. इस दिन लोगों में रावण दहन देखने का काफी क्रेज है. लोग देश विदेश तक में रावण दहन देखना चाहते हैं. कुछ जगहों के रावण दहन काफी फेमस हैं. इस मौके पर आइए जानते हैं उन जगहों के बारे में जहां रावण दहन देखने केवल देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं...

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1. मैसूर: भारत ही नहीं बल्कि दुनिया भर में मैसूर का दशहरा काफी फेमस है. करीब 600 सालों से मैसूर में दशहरा मनाया जाता है. इसकी शुरुआत चामुंडी पहाड़ियों में स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होती है. यहां 10 दिन तक दशहरा उत्सव मनाया जाता है.

2. सीकर: राजस्थान के सीकर जिले के बाय गांव में रावण का पुतला नहीं बनाया जाता है, बल्कि रावण बने व्यक्ति का काल्पनिक वध किया जाता है. सीकर जिले के दांतारामगढ़ के बाय गांव की पहचान दशहरे मेले के लिए देश भर में है. दक्षिण भारतीय शैली में होने वाले इस मेले को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते है. मेले की विशेषता यह है कि विजयदशमी के दिन राम रावण की सेना के बीच युद्ध होता है. इसमें बुराई के प्रतीक रावण का वध किया जाता है.

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3. कुल्लू: कुल्लू में दशहरा के दौरान भगवान रघुनाथ जी की रथयात्रा निकलती है, जो कि अलग-अलग जगहों से होकर गुजरती है. वहीं कुल्लू के दशहरे में रावण का पुतला जलाया नहीं जाता. दशहरे की तैयारियां अश्विन महीने के पहले 15 दिनों से ही शुरू हो जाती हैं.

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First published: October 7, 2019, 10:37 AM IST
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