बदलते मौसम में जरूर करें इन जगहों की सैर, नहीं होंगे बीमार

शरीर को हेल्दी रखना बहुत जरूरी होता है. हो सके तो बदलते मौसम में कुछ ऐसी जगहों पर घूमने जरूर जाएं जहां पर आपको फ्रेश एयर मिलती हो.

बदलते मौसम में कुछ ऐसी जगहों पर घूमने जरूर जाएं जहां पर आपको फ्रेश एयर मिलती हो. ऐसी जगहें जो आपको तरोताजा फील कराती हों.

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    फरवरी और मार्च का महीना ऐसा होता है जिस समय सबसे ज्यादा लोग बीमार पड़ते हैं. मौसम के बदलने से लोगों को सर्दी-जुकाम और खांसी होना तो आम बात है. इसके अलावा भी इस समय कई तरह की एलर्जी, फायरल फीवर और इंफेक्शन लोगों को बड़ी ही आसानी से हो जाता है. ऐसे में शरीर को हेल्दी रखने की बहुत ज्यादा जरूरत पड़ती है.

    हो सके तो बदलते मौसम में कुछ ऐसी जगहों पर घूमने जरूर जाएं जहां पर आपको फ्रेश एयर मिलती हो. ऐसी जगहें जो आपको तरोताजा फील कराती हों. आइए आपको बताते हैं कि इस मौसम में आप किन जगहों पर घूमने जाने का प्लान बना सकते हैं.

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    कूर्ग

    कूर्ग के पहाड़, हरे-भरे जंगल, चाय और कॉफी के बागान लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं.


    कोडगु या कूर्ग भारत के कर्नाटक प्रांत का एक जिला है. पश्चिमी घाट पर स्थित पहाड़ों और घाटियों का प्रदेश कूर्ग दक्षिण भारत का एक प्रमुख पर्यटक स्‍थल है. कूर्ग के पहाड़, हरे-भरे जंगल, चाय और कॉफी के बागान लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. कावेरी नदी का उदगम स्‍थान कूर्ग अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के अलावा हाइकिंग, क्रॉस कंट्री और ट्रेल्‍स के लिए भी काफी मशहूर है. फरवरी और मार्च के महीने में मौसम बदलता है. ऐसे में बीमार होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है. प्राकृतिक सुंदरता और फ्रेश हवा के लिए इस समय कूर्ग घूमने जाना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता. यहां पर मौसम बहुत ही सुहावना रहता है और यह आपके हेल्थ को भी अच्छा रखता है.

    धर्मशाला

    धर्मशाला तिब्बती शरणार्थियों का निवास-स्थान है. यह नगर ऐतिहासिक डल झील, खनियारा व कंजार महादेव मेले के लिए जाना जाता है.


    धर्मशाला हिमाचल प्रदेश की शीतकालीन राजधानी है. यह हिमाचल राज्य के कांगड़ा जिले का मुख्यालय है और कांगड़ा नगर से 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. धर्मशाला तिब्बती शरणार्थियों का निवास-स्थान है. यह नगर ऐतिहासिक डल झील, खनियारा व कंजार महादेव मेले के लिए जाना जाता है. भागसूनाग, कुणाल पत्थरी व चिन्मन्या मंदिर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते है. चामुण्डा देवी, कांगडा का बृजेश्वरी, ज्वालामुखी व चिन्तपूर्णी मंदिर भी आसपास स्थित हैं. इसके अलावा आप यहां पर पालमपुर, शोभा सिंह आर्ट गैलरी, अन्दरेटा व वैजनाथ के पर्यटन स्थलों पर भी घूम सकते हैं.

    मुन्नार

    यहां पर बनी मट्टुपेट्टी झील और बांध पर पर्यटक पिकनिक मनाने आते हैं.


    मट्टुपेट्टी समुद्र तल से 1700 मी. ऊंचाई पर स्थित है. यहां पर बनी मट्टुपेट्टी झील और बांध पर पर्यटक पिकनिक मनाने आते हैं. यहां से चाय के बागानों का मनमोहक दृश्य लोगों को आकर्षित करता है. यहां पर पर्यटक बोटिंग का भी आनंद ले सकते हैं. मट्टुपेट्टी के अंदर व आसपास में शोला वन ट्रैकिंग की जा सकती है. ये जंगल विभिन्न प्रकार के पक्षियों का घर भी है. इरावीकुलम राष्ट्रीय उद्यान मुन्नार से 15 किलोमीटर दूर है. यह स्थान देवीकुलम तालुक में पड़ता है. उद्यान के दक्षिणी क्षेत्र में अनामुडी चोटी है. यहां पर लोग फ्रेश एयर के लिए जाते हैं.

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    दार्जिलिंग

    दार्जिलिंग अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर यहां की दार्जिलिंग चाय के लिए प्रसिद्ध है.


    दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल राज्य का एक हिल स्टेशन है. दार्जिलिंग अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर यहां की दार्जिलिंग चाय के लिए प्रसिद्ध है. दार्जिलिंग की दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे युनेस्को विश्व धरोहर स्थल है जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. यहां टाइगर हिल का मुख्‍य आनंद इस पर चढ़ाई करने से आता है. आपको हर सुबह पर्यटक इस पर चढ़ाई करते हुए मिल जाएंगे. इसी के पास कंचनजंघा चोटी भी है. फरवरी-मार्च के महीने में यहां पर ठंड का मजा लिया जा सकता है. साथ ही यहां की हवा तरोताजा फील कराने वाली होती है

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