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आखिर आभासी दुनिया के 'पेड बॉयफ्रेंड' इन महिलाओं की पहली पसंद क्यों बने!


Updated: December 7, 2019, 9:55 AM IST
आखिर आभासी दुनिया के 'पेड बॉयफ्रेंड' इन महिलाओं की पहली पसंद क्यों बने!
कुछ लड़कियों को दोस्ती चाहिए होती है, कुछ को प्यार तो कुछ औरतें मोहब्बत भरी बातों के लिए इस सेवा का लाभ उठातीं हैं.

ये दुनिया उन औरतों की हैं जो मर्दों को प्यार करने कि लिए उन्हें मोटी (Paid Boyfriend) रकम देतीं हैं. इस आभासी दुनिया में औरतें अपनी मर्जी से प्रेमी (Virtual Boyfriend) चुनती हैं.

  • Last Updated: December 7, 2019, 9:55 AM IST
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बीजिंग. ये दुनिया उन औरतों की है जो अपने पैरों पर (Empowered Women) खड़ी हैं. ये दुनिया उन औरतों की है जो परिवार के बंधन से (Independent Women) दूर रहना चाहतीं हैं. ये दुनिया उन औरतों की हैं जो मर्दों को प्यार करने कि लिए उन्हें मोटी (Paid Boyfriend) रकम देतीं हैं. इस आभासी दुनिया में औरतें अपनी मर्जी से प्रेमी (Virtual Boyfriend) चुनती हैं और अपनी मर्जी से उनसे बात करने का समय भी.

ये दुनिया चीन में काफी तेजी से अपने पैर पसार रही है. इस आभासी दुनिया में महिलाएं अपने प्रेमी से साथ घंटों समय बिता रहीं हैं. अपने साथ यह समय बिताने के लिए वो पुरुषों को अच्छी खासी मोटी रकम भी देने को तैयार हैं.

यह कोई भद्दी सेक्स चैटिंग नहीं बल्कि उन सभ्य पुरुषों से साथ बात करना है जो दोस्ताना अंदाज में प्यार का अहसास कराते हैं. ये पुरुष किसी असल जिन्दगी के प्रेमी की तरह सुबह फोन करके उठाते है और प्यार भरे टेक्स मैसेज भी भेजते हैं. जरुरत पड़ने पर इनसे वीडियो चैट भी की जा सकती है.

टाइम्स ऑफ इण्डिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में इस तरह की ऑनलाइन चैटिंग की मांग दिनो दिन बढ़ रही है. वीचैट जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर चीन में वर्जुअल प्रेमियों की विज्ञापन आम हो चले हैं. इसके लिए औरतें दस हजार रुपए तक खर्च करते को तैयार रहतीं हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक 22 वर्षीय जुआंसुन जू दिन में बीजिंग की एक स्टाक ब्रोकिंग कंपनी में काम करते हैं और रात में वो पेड बॉयफ्रेंड बन जाते हैं. जू ऐसा पिछले एक साल से कर रहे हैं. उनके पास लड़कियां तरह तरह की जरूरतों के लिए आती हैं.

कुछ लड़कियों को दोस्ती चाहिए होती है, कुछ को प्यार तो कुछ औरतें मोहब्बत भरी बातों के लिए इस सेवा का लाभ उठातीं हैं. जू के अनुसार वो इस बात का भरपूर ख्याल रखते हैं कि उनसे बात करने वाली महिला को उनसे क्या चाहिए. जिसकी जैसी जरुरत होती हो जू उसके साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं.

स्थानीय समाजशास्त्री सैंडी टू के मुताबिक 1979 से लागू सिंगल चाइल्ड पॉलिसी ने देश में इस तरह की महिलाओं की एक पूरी पीढ़ी तैयारी कर दी है. लेखक रोजेन लेक के मुताबिक सिंगल चाइल्ड परिवारों ने अपनी बेटियों को लड़कों की तरह पाला. अब वही लड़कियां आत्मनिर्भर और सशक्त हैं. वो अपनी जिन्दगी अपने ढंग से जी रहीं हैं.ये भी पढ़ें:

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First published: December 7, 2019, 9:55 AM IST
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