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इस दिल के टुकड़े हजार हुए, कोई यहां गिरा कोई वहां गिरा

Manisha Pandey | News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 11:28 AM IST
इस दिल के टुकड़े हजार हुए, कोई यहां गिरा कोई वहां गिरा
18वीं सदी के ब्रिटिश चित्रकार जॉन एवरेट मिलेस की प्रसिद्ध पेंटिंग ‘ओफीलिया’

जैसे कोई भी चीज टूटती है, दो या अनेक टुकड़ों में, जैसे वो उस गाने में कहती है कि “शीशा हो या दिल हो, आखिर टूट जाता है,” तो क्या सचमुच दिल शीशे की तरह टुकड़े-टुकड़े होकर टूटता है? दिल के टूटने का मतलब क्या है?

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  • Last Updated: August 13, 2019, 11:28 AM IST
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"टूटे हुए दिल पर पतझड़ का मौसम धीरे-धीरे आता है. आहिस्ता से पीले पड़ते हैं पत्ते, चुपके से बेआवाज झर जाते हैं. धीरे-धीरे होता है पेड़ ठूंठ, दिल बंजर, आखिरी विदा से पहले."
- गुंटर ग्रास

वो होकर भी न हो सकी प्रिंसेज थी और वो पाकिस्तान से आया दिल के डॉक्टर. प्रिंसेज डायना की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘डायना’ में एक जगह वो डॉ. हसनत खान से पूछती है, “क्या दिल सचमुच टूटता है?” हसनत उसे डॉक्टरी भाषा में जवाब देने की कोशिश करते हैं, लेकिन वो फिर पूछती है, “बट, डज इट रिअली ब्रेक?”

क्या सचमुच? जैसे कोई भी चीज टूटती है, दो या अनेक टुकड़ों में, जैसे वो उस गाने में कहती है कि “शीशा हो या दिल हो, आखिर टूट जाता है,” तो क्या सचमुच दिल शीशे की तरह टुकड़े-टुकड़े होकर टूटता है? दिल के टूटने का मतलब क्या है? टूटा हुआ दिल कैसा दिखाई देता है? टूटने के बाद उसका क्या होता है? क्या दिल का टूटना दिल का मर जाना है, नष्ट हो जाना? तो क्या नष्ट होने के बाद भी कुछ बचता है? या विज्ञान की भाषा में कहें तो दिल पदार्थ (मैटर) है, न बनाया जा सकता है, न मिटाया. वो बस अपना रूप बदल सकता है.



किसी का टूट जाना, किसी का छूट जाना, प्‍यार का मुकम्‍मल न हो पाना या उसका ठुकरा दिया जाना. किसी गहरे भरोसे का टूट जाना या किसी अपने का मर जाना. ये सारी वजहें हो सकती हैं किसी दिल के टूट जाने की. लेकिन सवाल फिर भी यही है कि ये टूटा हुआ दिल क्‍या बला है.



क्या बुद्ध का दिल टूट गया था, जब वो सब राजपाठ, महल छोड़ जंगलों में चले गए थे. नीत्शे जब उस मार खा रहे घोड़े के गले से लिपटकर रोया और फिर पागल हो गया तो क्या उसकी वजह उसके दिल का टूट जाना था. विन्सेंट वैन गॉग ने सूरजमुखी के खेत रंगों से बनाए थे या टूटे हुए दिल से. बीथोवन को जब सुनना बंद हो गया तो क्या उसका टूटा दिल कान बन गया था क्योंकि बिना सुने कोई पियानो कैसे बजा सकता है. फ्रीडा काल्हो की तो कितनी पेंटिंग्स में उसे कभी चाकू तो कभी तीरों ने बींध रखा है. फ्रीडा की एक पेंटिंग है, “मैमोरी द हार्ट,” जो उसके टूटे हुए दिल की कहानी है. लोग कहते हैं, मर्लिन मुनरो ने न आत्महत्या की, न उसकी हत्या हुई. वो टूटे हुए दिल के कारण मरी थी. क्या ये बात सच है?

प्रिंसेज डायना की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘डायना’ के एक दृश्‍य में डायना और पाकिस्‍तानी सर्जन डॉ. हसनत खान की भूमिका में नओमी वॉट्स और नवीन एंड्रूज
प्रिंसेज डायना की जिंदगी पर बनी फिल्म ‘डायना’ के एक दृश्‍य में डायना और पाकिस्‍तानी सर्जन डॉ. हसनत खान की भूमिका में नओमी वॉट्स और नवीन एंड्रूज


हावर्ड फास्ट के उपन्यास ‘स्पार्टाकस’ में एक टूटे दिल वाली औरत का जिक्र है. वो लिखते हैं कि गुलाम ग्लेडिएटरों को खाने को बढ़िया मांस और भोगने को औरत मिलती थी. इसी तरह ग्लेडिएटर स्पार्टाकस को भी एक औरत दी गई. जब वो कमरे में आई तो बिलकुल निर्वस्त्र थी. सिर झुकाए, नजरें नीची किए हुए. स्पार्टाकस ने उसे आदर से देखा और एक शब्द भी बोले बगैर अपनी चटाई उसकी ओर खिसका दी. स्पार्टाकस ने उसके साथ कुछ नहीं किया. कुछ देर बाद वो चटाई पर और स्पार्टा जमीन पर सो गया. हावर्ड फास्ट ने कमरे में आई उस औरत के लिए लिखा था कि वो “टूटे हुए दिल वाली औरत” थी, जिसकी निर्वस्त्र देह पर जगह-जगह नाखूनों और दांत काटे के निशान थे. उन्होंने उसे कुछ इस तरह लिखा था कि “टूटे हुए दिल” पर काफी जोर था.

याद करिए, वो एतिहासिक चित्र, “ए गर्ल विद ए पर्ल ईयररिंग.” कई बार ऐसा होता है कि शेख्सपियर के नाटकों के चरित्र इसलिए मर जाते हैं कि उनका दिल टूट गया या उन्होंने किसी का दिल तोड़ दिया. ये दिल ही एक ऐसी चीज है शायद, जिसके टूटने और तोड़ देने का असर एक जैसा है. जैसे गोली किसी और पर चलाई हो और वो पलटकर खुद पर ही आ लगे.

शेख्सपियर से भी 200 साल पहले पैदा हुए रूमी तो मानो गोली खाने को ही तैयार बैठे थे. वो उस दिल के तब तक टूटते जाने की कामना करते हैं, जब तक वो पूरी तरह खुल ही न जाए. खुल जाए तो ढंग से रौशनी आए. रौशनी आए तो ढंग से सब दिखाई दे. जो पूरी तरह न भी खुला हो और सिर्फ दरारें पड़ी हों दिल पर तो भी बकौल रूमी, “उन्हीं दरारों से होकर आएगी रौशनी.” रौशनी मतलब जिंदगी. इस तरह रूमी को तो नहीं लगता कि दिल का टूट जाना मर जाना है. उन्हें लगता है कि दिल का टूट जाना आंखों का खुल जाना, नजर का धुल जाना और रौशनी का चले आना है. और अगर सचमुच ऐसा ही है तो खुदा करे कि रौशनी की खोज में भटकते दिल बार-बार टूटें और तब तक टूटते रहें कि जब तक पूरी तरह खुल ही न जाएं.

ब्रिटिश चित्रकार एरिक द्रास की पेंटिंग ‘नीत्‍शे एंड हॉर्स’
ब्रिटिश चित्रकार एरिक द्रास की पेंटिंग ‘नीत्‍शे एंड हॉर्स’


खैर, कविताओं और कला से इतर एक संसार ठोस विज्ञान का भी है. विज्ञान, जिसकी हर कोशिश, हर मेहनत का एक ही मकसद है कि कैसे इस जिंदगी की मियाद लंबी की जा सके. जो जिंदगी से खार खाए मरने को तैयार बैठे हैं, विज्ञान उन्हें भी जिंदा रखना चाहता है. तो मृत्यु से ज्यादा जिंदगी में यकीन पालने वाले उस विज्ञान की मानें तो ये दिल शरीर के बीचोंबीच कुछ बाएं हटकर बैठा मांस का एक लोथड़ा भर है, जिसमें हजारों धमनियां, शिराएं, तंत्रिकाएं हैं. आकार एक मुट्ठी के बराबर. अंदाजन 12 सेंमी लंबा, 8 सेंमी चैड़ा और 6 सेंमी मोटा. वजन कुछ ढाई सौ से साढ़े तीन सौ ग्राम. इतने मामूली, इतने पिद्दी से जान पड़ने वाले इस दिल की महिमा विज्ञान कुछ इस तरह बखान करता है कि ये जो दिल है, वो हमारे धरती पर आने के दिन से लेकर जाने के दिन तक साल के 365 दिन, 24 घंटे लगातार काम करता है, बिना रुके, बिना थके. विज्ञान को दिल के टूट जाने की थियरी पर कोई यकीन नहीं.

किसी मेडिकल साइंस जरनल में टूटे हुए दिल पर छपा कोई आर्टिकल हमसे ऐसी भाषा में बात करता है कि उसे पढ़कर समझने की कोशिश में भी मेरे जैसों का दिल टूट सकता है. सरल भाषा में समझाऊं तो विज्ञान के मुताबिक ये दिल हजारों तंत्रिकाओं, शिराओं, धमनियों के सम्मिलित श्रम से चल रहा है. जिस दिन कोई एक भी तय कर ले कि अब उससे और नहीं चला जाता तो दिल का तवाजुन बिगड़ जाता है. वो काम करना बंद कर देता है. अब विज्ञान अपना काम करता है. वो सीने को चाकू से चीरकर दिल के उस नाराज हुए हिस्से को अनेकों उपायों से मनाता है. कभी किसी शिरा में जम गए खून के थक्के को हटाकर खून के जाने का रास्ता साफ करता है, कभी कोई मशीन लगाता है, कभी ओपन हार्ट तो कभी बाईपास सर्जरी करता है. जैसे एक सड़क बंद हो तो उसके ठीक बगल से बाईपास सड़क बना देते हैं, वैसे ही. इस तरह विज्ञान की कोशिश है कि किसी भी तरह दिल को वापस पटरी पर लौटाया जा सके, उसके काम करने की मियाद बढ़ाई जा सके, लेकिन एक दिन तो ऐसा आएगा कि जब वो कहेगा, “चल खुसरो घर आपने, रैन भई चहुं देस.”

मैक्सिकन पेंटर फ्रीडा काल्‍हो की प्रसिद्ध पेंटिंग ‘मेमोरी: द हार्ट’
मैक्सिकन पेंटर फ्रीडा काल्‍हो की प्रसिद्ध पेंटिंग ‘मेमोरी: द हार्ट’


लेकिन विज्ञान पर कान न धरने और टूटे हुए दिल को ग्लोरीफाई करने वाले जाने के दिन से पहले भी हर दिन खुसरो से अपने घर से जाने की जिद करते पाए जाते हैं. उन्हें लगता है कि जहां वो हैं, वो घर नहीं. घर कहीं और है. जीवन के इस पार नहीं है तो जरूर मृत्यु के उस पार होगा. विज्ञान इस अवस्था को डिप्रेशन से लेकर, डिसइल्यूजन, मल्टीपल पर्सनैलिटी डिसऑर्डर, स्किड्जोफ्रेनिया और ऐसी तमाम तरह की वैज्ञानिक शब्दावलियों में एक्सप्लेन करता है और दवाइयों के जरिए इसे इसे ठीक करने की सलाह देता है.

सहित्य, कला, विज्ञान सबका टूटे हुए दिलों से अपना ही एक रिश्ता है. कोई उसके टूटने की कहानी सुना रहा है, कोई उसके टूटने को कला में तब्दील कर इतिहास में अमर कर देना चाहता है तो कोई उसके टूटने का इलाज. सब अपनी नजर से देख रहे हैं, लेकिन सब ये मानते हैं कि दिल टूटा हुआ है. कोशिशें सारी उस टूट-फूट को रचनात्मकता में तब्दील कर देने की हैं. उस टूटी हुई जगह पर एक खिड़की बना देने की, जहां से दुनिया थोड़ा ज्यादा साफ नजर आए.

लेकिन इस सवाल का जवाब शायद तब भी ठीक से न मिले कि नीत्शे उस दिन घोड़े से लिपटकर रोया क्यों था और क्यों पागल हो गया क्योंकि उसके पागल होने के बाद उसे पढ़ना लोगों को पागल होने से बचाता रहा है. क्या यही है वो बात जो गालिब ने शायरी में कही कि,

"दर्द का हद से गुजरना है दवा हो जाना."

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First published: August 13, 2019, 11:15 AM IST
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