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मां नहीं बनने देती ये बीमारी, 17 करोड़ से ज्यादा औरतें हैं प्रभावित

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

यह रोग गर्भाशय में दीमक की तरह है.

    इस बीमारी का नाम एन्‍डोमेट्रिओसिस (endometriosis) है. यह महिलाओं के गर्भाशय में होती है. जिसमें गर्भाशय के अंदर एंडोमेट्रियम टिश्यू बनता है. जिससे गर्भाशय के अंदर परत बनती है और बढ़ने पर एंडोमेट्रियम परत गर्भाशय के बाहर की ओर फैलने लगती है. जो कि अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब या अन्य प्रजनन अंगों तक फैलती है. इस परत के बढ़ने से वजाइना के मुख पर अतिरिक्‍त कोशिकाओं का विकास भी हो जाता है. जब यह परत फेलोपियन ट्यूब तक फैलती है तो इससे अंडाशय की क्षमता पर असर पड़ता है. जो इंफर्टिलिटी का कारण बनता है. क्‍योंकि स्‍पर्म फैलोपियन ट्यूब तक नहीं जा पाता. जब एन्‍डोमीट्रीओसिस शरीर के अंदर के ऑर्गन्स आंतों, किडनी वगैरह को प्रभावित करता है तो उस स्थिति को 'फ्रोजेन पेल्विस' कहा जाता है.

    फेलोपियन ट्यूब क्या है- गर्भाशय के दोनों तरफ ओवरी होती है, और ओवरी गर्भाशय से फैलोपियन ट्यूब द्वारा जुड़ी होती है.

    एन्‍डोमेट्रिओसिस को लोग पीरियड्स दर्द या गर्भाशय-गांठ कह देते हैं. दुनिया भर में इस बीमारी के ट्रीटमेंट से लेकर लक्षणों की जानकारी की कमी है. यह रोग गर्भाशय में दीमक की तरह है.

    लक्षण
    -मासिक धर्म के दौरान असनीय दर्द. कई बार यह दर्द पूरे महीने तक बने रहना.
    -पीठ में दर्द रहना.
    -कंधों में दर्द रहना.
    -जांघों में तेज दर्द होना.
    -डायरिया, कब्‍ज.
    -यूरिन में खून आना.
    -शरीर के निचले हिस्से में जकड़न.
    -पीरियड्स से पहले मांसपेशियों में खिंचाव.
    -पीरियड्स में बहुत ज्यादा ब्‍लीडिंग होना.

    क्यों होता है एन्‍डोमेट्रिओसिस 
    -यह बाहरी संक्रमण की वजह से नहीं शरीर की आंतरिक प्रणाली में कमी के कारण होती है. जिसकी वजहों में से एक महिलाओं की दिनचर्या अनियमित होने से तनाव रहना भी है.
    -एन्‍डोमीट्रीओसिस होने की एक वजह इम्‍युनिटी खराब रहना भी है. जिससे गर्भाशय में अतिरिक्‍त कोशिकाओं का निर्माण होता है.
    -किसी प्रकार के घाव या सर्जरी से भी इसकी वजह हो सकती है.

    इससे होने वाली परेशानियां
    -महिलाओं को पेट दर्द रहना.
    -गर्भधारण न कर पाना.
    -हड्डियों में दर्द रहता है.
    -चेहरे पर झाइयां.
    -त्वचा का मुरझाना.
    -बाल झड़ना, सफ़ेद होना.
    -भूलने लगना, इरिटेट होना.
    -हाई बीपी.
    -किडनी का कमज़ोर होते जाना.
    -आंखों की रौशनी कम होना.
    -इस बीमारी से ग्रस्‍त महिला कंसीव नहीं कर पाती, क्‍योंकि स्‍पर्म फैलोपियन ट्यूब तक नहीं जा पाता.
    -इसमें गर्भ (एंडोमेट्रियम) को ढकने वाले टिश्यूज ओवरीज या गर्भाशय के आसपास विकसित होने लगते हैं.
    -पीरियड्स के दौरान खून के गहरे थक्के ओवरीज में जमा हो जाना.
    -पेल्विक एरिया और आस-पास खून के धब्बे जम जाते हैं, जिससे आंतें, ट्यूब्स और ओवरीज आपस में चिपक जाती हैं.

    पेल्विक एरिया क्या है- पेल्विक एरिया धड़ का निचला हिस्सा है. यह पेट और पैरों के बीच स्थित है. यह एरिया आंतों और मूत्राशय और प्रजनन अंगों यानी reproductive organ को समर्थन प्रदान करता है. रिप्रोडक्टिव अंगो में ओवरीज, फैलोपियन ट्यूब, यूटरस, वजाइना इत्यादि शामिल हैं.

    इलाज
    -इसमें महिला के गर्भाशय की जांच करते हैं.
    -गर्भाशय का आंतरिक परीक्षण लैप्रोस्‍कोपी के जरिए होता है. लैप्रोस्कोपिक सर्जरी एंडोमेट्रियल टिशू को हटाने के लिए की जाती है. इस सर्जरी में गर्भाशय के अंदर की स्थिति का छोटे कैमरे से पता लगाते हैं. जिसमें पेल्विक के अंदर एन्‍डोमीट्रीओटिक हिस्सों को हटाते या लेजर की मदद से जलाते हैं.
    -सर्जरी के बाद इसके फिर से उभरने की आशंका रहती है. और कई बार मल्टीपल सर्जरी भी करनी पड़ सकती हैं.
    -दर्द निवारक दवाएं दी जाती हैं.
    -नियमित रूप से व्यायाम करने के लिए कहा जाता है, जिससे मांसपेशियों की ऐंठन कम होती है.
    -हीटिंग पैड से भी शरीर के निचले हिस्से में ऐंठन कम होती है.
    -सोनोग्राफी से एन्‍डोमेट्रिओसिस का पता लगाया जाता है.
    -मेनोपॉज के जरिये एन्‍डोमेट्रिओसिस को रोका जाता है. जिसके लिए हार्मोनल दवाएं दी जाती हैं. यह इलाज पक्का नहीं है. इसके साइड इफेक्ट भी हैं.
    -एन्‍डोमेट्रिओसिस की समस्या मेनोपॉज के बाद ही खत्म होती है.
    -इसके इलाज के तौर पर हिस्टेरेक्टॉमी नाम की सर्जरी भी की जाती है. जिसमें गर्भाशय और गर्भाशय ग्रीवा को हटाने के साथ-साथ दोनों अंडाशय भी निकाले जाते हैं.
    -गर्भाशय ग्रीवा क्या है: बच्चेदानी के मुख को गर्भाशय ग्रीवा कहते हैं. यह गर्भ के निचले हिस्से में होता है. जो योनि को गर्भाशय से जोड़ता है. गर्भाशय ग्रीवा के दो हिस्से होते हैं. एक एंडोसर्विक्स और दूसरा एक्टोसर्विक्स.
    -अंडाशय क्या है: अंडाशय में दो छोटे अंडाकार अंग होते हैं. जो गर्भाशय के दोनों तरफ जुड़े होते हैं. अंडाशय अंडों (डिंब) से भरे होते हैं, जो हर लड़की के भ्रूण के साथ ही बनते हैं. हर लड़की के अंडाशयों में 10 से 20 लाख अंडे होते हैं. ये उम्र के साथ-साथ कम हो जाते हैं. जनन सालों में गर्भधारण की प्रक्रिया अंडाशयों से शुरु होती है. हर लड़की पहले पीरियड्स से मेनोपॉज तक करीब 400 अंडे जारी करती है.

    क्यों होता है एन्‍डोमेट्रिओसिस ?
    -ट्यूब्स और ओवरीज को नुकसान पहुंचना इंफर्टिलिटी का कारण बनता है.
    -समय पर इलाज के अभाव में पेल्विक में सूजन आ जाती है.

    एन्‍डोमेट्रिओसिस से जूझ रही महिलाएं बच्चा कैसे पैदा करें?
    -एन्‍डोमेट्रिओसिस से ग्रसित महिला कंसीव करने के लिए आईवीएफ ट्रीटमेंट ले सकती हैं.

    IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन. आईवीएफ तकनीक निषेचन के लिए शुक्राणुओं और अंडे के फ्यूज़न पर काम करती है. इसमें अधिक अंडों के उत्पादन के लिए महिला को फर्टिलिटी दवाइयां दी जाती हैं. फिर सर्जरी के माध्यम से अंडों को निकालकर प्रयोगशाला में कल्चर डिश में तैयार स्पर्म के साथ मिलाकर निषेचन के लिए रखा जाता है. जिससे बने भ्रूण को वापस महिला के गर्भ में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है. ये सफल हुआ या नहीं इसका पता अगले 14 दिनों में प्रेग्नेंसी टेस्ट के बाद लगता है.

    वर्ल्ड एन्‍डोमेट्रिओसिस रिसर्च फाउंडेशन (WERF) के 2011 के सर्वे के मुताबिक, एन्‍डोमेट्रिओसिस से दुनिया भर में लगभग 176 मिलियन (17.6 करोड़) महिलाएं और लड़कियां प्रभावित हैं. ये तकलीफ अनुमानित 10% महिलाओं को प्रजनन-उम्र में प्रभावित करती है.

    मार्च का महीना दुनिया भर में Endometriosis नाम की उस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के नाम समर्पित है. कोशिश कीजिएगा, जब किसी एंडो पेशेंट से मिलें तो न कहें, 'तुम्हें देखकर ऐसा लगता तो नहीं कि कोई तकलीफ़ है'.

    वीडियो में देखें एन्‍डोमीट्रीओसिस क्या है-

    Tags: Health Explainer, Health News

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