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जानिए क्या है High-Fat Diet, कैसे पैदा करती है ये डायट आंतों में बुरे बैक्टीरिया, नहीं घटने देती वजन

जानिए क्या है High-Fat Diet, कैसे पैदा करती है ये डायट आंतों में बुरे बैक्टीरिया, नहीं घटने देती वजन

क्या है High Fat Diet?

क्या है High Fat Diet?

क्या है High Fat Diet? जानिए कैसे बढ़ाती है ये वजन.

    फैट की मात्रा, डायट में ज्यादा लेना आंतों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. चाइना में हुए एक नए शोध से ये बात सामने आई है.

    इसे साबित करने के लिए 200 लोगों पर अध्ययन किया गया. छह महीने के लिए स्वास्थ्यवर्धक युवाओं को कम, बीच का, या हाई फैट डायट दी गई. जिन लोगों ने हाई फैट डायट ली थी उनकी आंतों में कई बैक्टीरिया ऐसे पाए गए जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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    लंबे समय तक अगर हाई फैट डायट खाने में शामिल की गई तो इससे टाइप-2 डायबिटीज़ होने का खतरा बढ़ सकता है. मेटाबॉलिज्म को नुकसान पहुंच सकता है. ये अध्ययन जरनल गट में प्रकाशित हुआ है.

    कई राज्यों में लोगों द्वारा ली जाने वाली में कई हद तक बदलाव देखे गए हैं. पारंपरिक डायट से लोग अब वेस्टर्न डायट की ओर जाते जा रहे हैं. यूएस में सबसे ज्यादा लोगों में हाई फैट डायट का चाव देखा गया है. हालांकि, हाई फैट डायट आंतों पर बुरा प्रभाव डालती है इसे साबित करने के लिए और भी कई शोध करने की जरूरत है.

    ये शोध युवा जिनकी उम्र 18 से 35 साल थी, उन पर की गई है.

    आंतों के बैक्टीरिया और फैट का क्या है तालमेल

    पहले हुई कई शोध से ये पता लगा है कि डायट लोगों की आंतों को पूर्ण रूप से प्रभावित करती है. मोटापा, आंतों में पनपने वाले बैक्टीरिया से जुड़े हैं. अगर डायट सही ली जाए तो इन्हें बेहतर भी किया जा सकता है.

    नए शोध में शोधकर्ताओं ने तीन ग्रूप में लोगों को बांटा. इसमें कम फैट वाले ग्रूप में 20 प्रतिशत कैलोरी लोगों को फैट द्वारा दी गई. बाकी 66 प्रतिशत उनकी डायट में कार्बोहाइड्रेट्स शामिल किए गए. दूसरे ग्रूप को बीच की मात्रा में फैट दिया गया. 30 प्रतिशत फैट और 56 प्रतिशत कार्ब्स दिए गए. हाई फैट डायट वाले ग्रूप को 40 प्रतिशत कैलोरी फैट से और 46 प्रतिशत कार्ब्स दिए गए.

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    हालांकि, प्रोटीन, फाइबर और कैलोरी सभी ग्रूप में एक बराबर रखे गए. साथ ही प्रतिभागियों के इस दौरान शोदकर्ताओं ने मल और खून के सैंपल भी लिए.

    छह महीने बाद कम फैट वाले ग्रूप के लोगों की आंतों में अच्छे बैक्टीरिया ज्यादा पाए गए. जो ‘ब्लॉटिआ’ और ‘फैकालिबैक्टीरियम’ नाम के बैक्टीरिया थे. वहीं हाई फैट डायट वाले लोगों में इसका उल्टा देखा गया. दोनों ही बैक्टीरिया फैटी एसिड को आंतों में उत्पन्न करते हैं. ये एनर्जी को बढ़ावा देने के साथ बावल सेल्स और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुणों को बढ़ावा देता है.

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    हाई-फैट डायट जिन लोगों ने ली थी उनकी आंतों में ‘बैक्टीर्योराइड्स’ और ‘एलिसटिप्स’ नामक बैक्टीरिया पाए गए जो टाइप-2 डायबिटीज़ से जुड़े हैं. ये आंतों में फैटी एसिड उत्पन्न करके इंफ्लेमेशन को बढ़ावा देते हैं.

    अगर कोई व्यक्ति हाई फैट डायट को लंबे समय तक लेता है तो उसे स्वास्थ्य से जुड़े कई नुकसान हो सकते हैं. हालांकि, शोधकर्ताओं ने एक दूसरी चीज भी पाई वो है तीनों ही ग्रूप के लोगों के वजन घटने की बात सामने आई है. ये साफ तौर पर अभी नहीं बताया गया है कि वजन घटने का कारण क्या था. आंतों में मौजूद बैक्टीरिया या मेटाबॉलिज्म.

    ये शोध पीपल्स लिब्रेशन आर्मी जनरल हॉस्पिटल बीजिंग और झींजिएंग यूनिवर्सिटी चाइना में हुआ है.

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    Tags: Health News, Lifestyle, Weight Loss

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