क्या होता है इम्पोस्टर सिंड्रोम, जानें इससे महिलाएं कैसे निपटें

महिलाओं में कार्यालयों में आत्मविश्वास की कमी और खुद को कम आंकने की समस्या घर कर रही है.
महिलाओं में कार्यालयों में आत्मविश्वास की कमी और खुद को कम आंकने की समस्या घर कर रही है.

महिलाएं (Women) ऑफिस में कई समस्याओं का सामना करती हैं लेकिन वे खुलकर इसके खिलाफ बोल नहीं पाती हैं. ऑफिस में इम्पोस्टर सिंड्रोम (Imposter Syndrome) को आमतौर पर महिलाओं में आत्म-संदेह और अपर्याप्तता की भावना और खुद को कम आंकने के रूप में देखा जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2020, 9:04 AM IST
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उत्तर-आधुनिक समाज (Post Modern Society) में महिलाएं (Women) भी देश के विकास में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं. हर क्षेत्र में महिलाएं पुरुषों की तरह कामयाबी की नई बुलंदियों को छू रही हैं. इंटरनेट और डिजिटल युग (Internet and Digital Age) में महिलाएं बढ़-चढ़कर अपनी भूमिका अदा कर रही हैं. बावजूद इसके महिलाओं में कार्यालयों में आत्मविश्वास (Self-Confidence) की कमी और खुद को कम आंकने की समस्या घर कर रही है जिसे इम्पोस्टर सिंड्रोम (Imposter Syndrome) कहा जाता है. लंदन स्थित मीडिया और पब्लिशिंग हाउस इंडिया इंक (India Inc.) ने अपनी मैगजीन में इस मुद्दे पर खुलकर बात की है और इसके खिलाफ नए हथकंडे तैयार किए हैं.

समस्याओं के खिलाफ नहीं बोल पातीं महिलाएं
महिलाएं ऑफिस में कई समस्याओं का सामना करती हैं लेकिन वे खुलकर इसके खिलाफ बोल नहीं पाती हैं. ऑफिस में इम्पोस्टर सिंड्रोम को आमतौर पर महिलाओं में आत्म-संदेह और अपर्याप्तता की भावना और खुद को कम आंकने के रूप में देखा जाता है. यही कारण है कि नौकरी के लिए जब तक वे खुद को शत-प्रतिशत नहीं मानती तब तक वह आवदेन भी नहीं करती हैं. जबकि पुरुष नौकरी की 60 फीसदी योग्तया के अनुकूल होने पर भी आवेदन करने में पीछे नहीं हटते हैं. इससे महिलाओं की व्यक्तिगत सफलता, भाग्य की उपलब्धियों और बाहरी कारकों का भी पता चल जाता है.

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ऑफिस में महिलाओं की स्थिति


यह समाज और संगठनों में व्यापक रूप से है. विशेषकर, ऑफिस में महिलाओं के लिए यह स्थिति नियमित रूप से है. महिलाओं को यह स्वीकार करने में संकोच होता है कि वे पेशेवर सफलता या पेशेवर उन्नति के योग्य हैं. इसलिए महिलाओं को इसको कीमत चुकानी पड़ती है क्योंकि वह नई-नई चुनौतियों को स्वीकारने में पीछे हट जाती हैं. साथ ही बड़े-बड़े करियर विकल्प को चुनने में भी संकोच करती हैं. यही कारण है कि वह कामयाबी की दौड़ में पुरुषों से पिछड़ती जा रही हैं.

वहीं, प्रगतिशील संगठन इसे पहचानकर 'विविधता, समावेश और विश्वास' (Diversity, Inclusion and Belonging) जैसे कार्यक्रम का आयोजन कर इस पर खुलकर बात कर रहे हैं. ये संगठन महिलाओं में आत्मविश्वास की नई लहर को पैदा करने में जुटे हुए हैं. संगठन इस समस्या पर पार पाने के लिए अधिक से अधिक महिलाओं को नौकरी के लिए आवेदन करने और करियर में उन्नति के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं.

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इस समस्या से कैसे पाएं छुटकारा?
India Inc. के मुताबिक, महिलाओं को ऑफिस में 'अपनापन' और 'सुरक्षित' महसूस करवाकर इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है. भर्ती प्रकिया में पारदर्शिता, ऑफिस में महिलाओं के साथ उत्पीड़न, निष्पक्ष कामकाजी माहौल और महिला सुरक्षा की गारंटी इस समस्या को जड़ से मिटाने में मददगार साबित हो सकते हैं. आपको बता दें कि कामकाजी महिलाओं में सहकर्मियों को लेकर एक सुरक्षा का माहौल महसूस नहीं होता है. यही कारण यह कि वह नौकरी छोड़ने में भी देरी नहीं करती हैं.
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