क्या है IVF ट्रीटमेंट, इस प्रोसेस की मदद से कितना सुरक्षित है मां बनना

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Updated: September 10, 2019, 1:47 PM IST
क्या है IVF ट्रीटमेंट, इस प्रोसेस की मदद से कितना सुरक्षित है मां बनना
आईवीएफ (IVF) एक फर्टिलिटी उपचार है जिसमें अंडों को शुक्राणु से अप्राकृतिक तरीके से मिलाया जाता है. यह प्रक्रिया मेडिकल लैब में नियंत्रित परिस्थितियों में की जाती है.

आईवीएफ (IVF) एक फर्टिलिटी उपचार है जिसमें अंडों को शुक्राणु से अप्राकृतिक तरीके से मिलाया जाता है. यह प्रक्रिया मेडिकल लैब में नियंत्रित परिस्थितियों में की जाती है.

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  • Last Updated: September 10, 2019, 1:47 PM IST
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आंध्र प्रदेश के ईस्‍ट गोदावरी जिले के एक गांव में रहने वाली मंगायम्‍मा (74) सबसे अधिक उम्र में मां बनने वाली महिला बन गई हैं. गुरुवार को उन्‍होंने गुंटूर के एक प्राइवेट अस्‍पताल में जुड़वां बच्चियों को जन्‍म दिया. मंगायम्‍मा की 57 साल पहले एक किसान से शादी हुई थी. वह मेनोपॉज की उम्र पार कर चुकी थीं इसलिए आईवीएफ तकनीक का इस्‍तेमाल कर गर्भ धारण किया गया. चार डॉक्‍टरों की टीम ने सिजेरियन ऑपरेशन के जरिए यह डिलीवरी करवाई. आखिर कैसे आईवीएफ के जरिए यह सब संभव हो सका आपको बताते हैं. आइए जानते हैं क्या है आईवीएफ और कैसे इतनी उम्र में भी आप बन सकते हैं पैरेंट्स.

क्या है आईवीएफ (IVF)

आईवीएफ (IVF) एक फर्टिलिटी उपचार है जिसमें अंडों को शुक्राणु से अप्राकृतिक तरीके से मिलाया जाता है. यह प्रक्रिया मेडिकल लैब में नियंत्रित परिस्थितियों में की जाती है. यह प्रक्रिया इंफर्टिल दम्पति और उन लोगों के लिए सहायक है जिनको कोई जेनेटिक परेशानी है.

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कब पड़ती है आईवीएफ (IVF) की जरूरत

निरुद्ध गर्भाशय नाल, शुक्राणु और अंडो के संपर्क में बाधा डाल सकती है. यह फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया में मुश्किलें ला सकती है. ऐसे में आईवीएफ की जरूरत पड़ती है.

शुक्राणु की गणना, गतिशीलता या दोनों में कोई कमी होना IVF के लिए एक कारण बन सकता है.
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कई बार फर्टिलिटी उपचारों के असफल परिणाम के बाद, आपको IVF की सलाह दी जाती है. यह आपकी उम्र और असफल कोशिशों की संख्या पर निर्भर करता है.

इसके अलावा अनुपयुक्त हार्मोनल पर्यावरण, अनियमित ओव्यूलेशन, अंडो की गुणवत्ता कम होना, बढ़ती उम्र और एन्डोमेट्रीओसिस (Endometriosis) की कुछ परिस्थितियों में इसकी जरूरत पड़ सकती है.

क्या होता है IVF ट्रीटमेंट में

महिलाओं के अण्डाशय में अंडो की वृद्धि के लिए इंजेक्शन दिया जाता है जिससे एक से ज़्यादा अंडो की उत्पत्ति हो सके. ज़्यादा अंडों से आईवीएफ के सफल होने के अवसर बढ़ते हैं और अगर इस प्रक्रिया को दोबारा करवाने का विचार हो तो उसका खर्च कम हो सकता है. डॉक्टरों की मानें तो अंडो को बढ़ाने की प्रकिया आपकी उम्र, अण्डाशय के रिज़र्व, श्रोणि की कोई पूर्व पीड़ा या ऑपरेशन, पहले के आईवीएफ की कोशिशों और हॉर्मोनल परिस्थिति पर निर्भर करती है.

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इंजेक्शन के 10 से 12 दिन के बाद, पूर्ण रूप से विकसित अंडो को अण्डाशय से निकालने की प्रक्रिया की जाती है. ट्रांसवेजाइनल स्कैन या लैप्रोस्कोप के द्वारा इन विकसित अंडो को निकाला जाता है. इन अंडो को एक खास कंटेनर में रखा जाता है. इसी दौरान शुक्राणु या वीर्य का सैम्पल लिया जाता है. इस सैम्पल को मेडिकल लैब में भेजा जाता है जहां पर IVF प्रोसेस के लिए सबसे अच्छे शुक्राणु को चुना जाता है.

इसके बाद विकसित अंडो और चुने हुए शुक्राणु को लैब में, खास परिस्थितयों के अंदर, बहुत ही सावधानी से इन्क्यूबेट किया जाता है. यह प्रक्रिया लगभग एक दिन की होती है और इसका परिणाम एक से दो दिन के बाद ही पता चलता है. पैरेंट्स की जरूरत और परिस्थितियों के हिसाब से इस स्टेप में तब्दीलियां की जाती है.

3 से 4 दिन बाद निषेचित अंडो को एक छोटे सी प्रक्रिया की मदद से महिला के गर्भाशय में डाला जाता है. आईवीएफ का परिणाम इस बात पर निर्भर करता है की अब यह अंडे गर्भाशय की परत से जुड़ पाते हैं या नहीं. IVF प्रोसेस से गर्भधारण करने की संभावना 30 से 45 फीसदी होती है. हालांकि सभी फर्टिलिटी उपचारों में से अक्सर आईवीएफ का परिणाम सबसे अच्छा होता है.

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First published: September 10, 2019, 1:47 PM IST
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