प्रत्येक 500 में से 1 पुरुषों में पाया जाता है 'क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम'

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Updated: August 30, 2019, 12:02 PM IST
प्रत्येक 500 में से 1 पुरुषों में पाया जाता है 'क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम'
klinefelter syndrome

जब पुरुषों में अतिरिक्त x-क्रोमोसोम आ जाता है, उस स्थिति को 'क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम' कहते हैं

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  • Last Updated: August 30, 2019, 12:02 PM IST
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तीन साल पहले प्रत्युश पेट दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंचा. डॉक्टर ने ब्लड टेस्ट करने को कहा. बल्ड टेस्ट में पाया गया कि प्रत्युष के शरीर में टेस्टोस्टेरोन (testosterone) का स्तर कम है. प्रत्युष अपनी पत्नी के साथ यूरोलॉजिस्ट के पास गया. वहां जो बात उसे पता चली उसके बाद उसकी पत्नी और वो दोनों सदमे में चले गए. यूरोलॉजिस्ट ने कहा कि प्रत्युष कभी पिता नहीं बन सकता. पिता बनने के लिए या तो उसे किसी स्पर्म डोनर की मदद लेनी होगी या फिर बच्चा गोद लेना पड़ेगा. ये बात सुनने के बाद दोनों की आंखें नम हो गईं.

डॉक्टर ने बताया कि प्रत्युष 'क्लाइनफेल्टर' नाम के सिंड्रोम से ग्रसित है. प्रत्येक 500 में से 1 पुरुषों में इस सिंड्रोम की शिकायत पाई जाती है.

क्या होता है 'क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम' ?

हमारे शरीर में 23-23 के दो सेट क्रोमोसोम उपलब्ध होते हैं. जहां पुरुषों में X और Y दो तरह के क्रोमोसोम पाए जाते हैं, वहीं महिलाओं में केवल x क्रोमोसोम. जब पुरुषों में अतिरिक्त x-क्रोमोसोम आ जाता है, उस स्थिति को 'क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम' कहते हैं. आमतौर पर पुरुषों में पुरुषों में एक X और एक Y क्रोमोसोम होते हैं, लेकिन इस सिंड्रोम से प्रभावित लड़कों में दो X और एक Y क्रोमोसोम होते हैं.

क्या हैं इसके लक्षण?

- मरीज में इसके लक्षण केवल चिकित्सक ही पकड़ सकते हैं
- माना जाता है कि जिन लड़कों का यौवन देर से शुरू होता है और जिनका अंडकोष (Testicles) सामान्य की तुलना से बहुत छोटा रहता है उनमें इसके होने की संभावना ज्यादा होती है
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- लड़कों में undescended testicles हो सकती हैं और लिंग औसत से छोटा हो सकता है
- क्लाइफेल्टर सिंड्रोम वाले ज्यादातर लड़के लंबे होते हैं और अपेक्षाकृत उनके हाथ-पैर भी लंबे होते हैं
- शुक्राणु गठन (sperm formation) में कमी
- कभी-कभी यौवन में लड़कों में स्तन का बढ़ना
- शरीर में कम बालों का होना
- मांसपेशियों में विकास की कमी

कुछ लड़कों में इस सिंड्रोम के लक्षण काफी व्यस्क हो जाने के बाद तक पता नहीं चलते. इन लड़कों को पिता बनने में कठिनाई हो सकती है.

कैसे किया जा सकता है इलाज?

अगर टेस्टोस्टेरोन का स्तर असामान्य रूप से कम है, तो अलग से टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन द्वारा मदद की जा सकती है. पुरुषों में लिंग के आकार में बढ़ोतरी कर के भी इसमें सुधार लाया जा सकता है.
सिंड्रोम में नजर आने वाले ज्यादातर लक्षणों से तो निपटा जा सकता है लेकिन सबसे बड़ी समस्या प्रजनन क्षमता को विकसित करना सबसे मुश्किल है.

साल 1942 में पहली बार इस सिंड्रोम के बारे में पता चला.

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First published: August 30, 2019, 12:02 PM IST
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