Choose Municipal Ward
    CLICK HERE FOR DETAILED RESULTS

    क्या है Postpartum, जानें प्रसवोत्तर मां में आने वाले शारीरिक बदलाव

    प्रसव के बाद मां को पसीना आता है और उन्हें अधिक गर्मी लगने की शिकायत होती है.
    प्रसव के बाद मां को पसीना आता है और उन्हें अधिक गर्मी लगने की शिकायत होती है.

    डिलीवरी के बाद महिलाएं खुद को थोड़ा हल्का महसूस करती हैं. शिशु के जन्म (Birth of Baby) देने के बाद महिलाओं में वजन कम (Weight Lose) होने की समस्या हो सकती है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 3, 2020, 7:55 AM IST
    • Share this:
    प्रसव के उपरांत पहले 6 हफ्तों (42 दिन) को प्रसवोत्तर अवधि (Postpartum Period) माना जाता है. इसमें पहले दो दिन और बाद का एक सप्ताह मां (Mother) तथा शिशु (Infant) के स्वास्थ्य और जीवन के लिए बहुत संकटकालीन होता है. इस दौरान मां और नवजात शिशु के लिए प्राण-घातक और मरणआसन्न समस्याएं पैदा होती हैं. बच्चे को जन्म देने के बाद मां, हार्मोन के स्तर और गर्भाशय के आकार में बदलाव सहित, गैर गर्भवती स्थिति में कदम रखती है. आइए जानते हैं प्रसोवत्तर किन परेशानियों से जूझती है एक मां और उनको क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

    प्रसवोत्तर मां में आने वाले शारीरिक बदलाव
    प्रसवोत्तर मां के शरीर में कई शारीरिक बदलाव आते हैं जिसके कारण उन्हें इस अवधि में निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

    ये भी पढ़ें - न्यूमोकोकल टीका लगवाते समय इन साइड इफेक्ट का रखें ध्यान
    वजन कम होना


    डिलीवरी के बाद महिलाएं खुद को थोड़ा हल्का महसूस करती हैं. शिशु के जन्म देने के बाद महिलाओं में वजन कम होने की समस्या हो सकती है. शिशु को स्तनपान कराने की स्थिति में यह समस्या और बढ़ जाती है.

    मूत्र असंयमितता
    बच्चे को जन्म देने के बाद योनि की मासपेशियां ढीली और कमजोर पड़ जाती हैं. इस कारण मूत्र असंयम हो जाता है लेकिन योनि द्वारा बच्चे को जन्म देने की स्थिति में यह समस्या अधिक होती है.

    शरीरिक तापमान में उतार-चढ़ाव
    प्रसव के बाद मां को पसीना आता है और उन्हें अधिक गर्मी लगने की शिकायत होती है या फिर उन्हें ठंड भी लग सकती है. अधिकांश मामलों में महिलाओं के शारीरिक तापमान में उतार-चढ़ाव आते हैं.

    स्तनों में पीढ़ा
    प्रसवोत्तर माताओं को स्तनों में भारीपन महसूस होता है. इस दौरान स्तनों में भारी मात्रा में दूध भरा होता है. कई महिलाओं का दूध शिशु को स्तनपान कराने के बाद भी निकलता रहता है.

    कब्ज
    डिलीवरी चाहे नॉर्मल हो या सर्जीकल दोनों ही स्थितियों में महिलाओं को कब्ज जैसी समस्या का सामना कर पड़ सकता है. इसका कारण लौह तत्व के पूरक आहार का प्रभाव होता है. जब महिलाएं के मूलाधार में घाव की समस्या होती है तब वे मल त्याग की इच्छा को लेकर आशंकित रहती हैं.

    प्रसवोत्तर मां में आने वाले भावनात्मक परिवर्तन

    चिड़चिड़ापन
    प्रसव के बाद आपके दैनिक रूटीन में सबसे बड़ा बदलाव आता है. इसमें महिलाओं के नींद, खाने और पीने से संबंधित समय उलट-पुलट हो जाता है. उचित और आरामदायक नींद ने मिलने के कारण व्यवहार में चिड़चिड़ापन महसूस होता है.

    मनोदशा में बदलाव
    शिशु के आगमन से थकावट और तनाव के कारण महिलाओं की मनोदशा में कई उतार-चढ़ाव आते हैं.

    अपराध बोध
    शिशु के जन्म के बाद महिलाएं अपने जीवनसाथी को समय नहीं दे पाती हैं. ऐसी स्थिति में अपराधबोध की समस्या उत्पन्न हो सकती है. ऐसे में जीवनसाथी के साथ कुछ पल बिताने के लिए समय का प्रबंधन सही से करें.

    चिंता
    प्रसवोत्तर मां अपने और शिशु के लिए बहुत चिंतित होने लगती हैं. इसके कई कारण है जैसे शिशु को स्तनपान कराना और शिशु की नींद से संबंधित समस्या मां को परेशान करती हैं.

    प्रसवोत्तर बरतने वाली सावधानियां

    पैड का इस्तेमाल करें
    लोकिया प्रक्रिया में प्रसव के बाद गर्भाशय की परत उधड़ने लगती हैं. इस दौरान पीरियड के सामान नहीं लेकिन हल्का रक्त स्राव होता है. ऐसे में संक्रमण को रोकने के लिए पैड का इस्तेमाल करें.

    बर्फ की थैली
    योनि के इर्द-गिर्द दर्द की स्थिति में बर्फ की थैली सुविधाजनक साबित होती है. बर्फ योनि के सीधे संपर्क में न आए इसलिए एक तौलिए में लपेट लें.

    गुनगुने पानी में बैठना
    प्रसव के बाद सिट्ज बाथ (गुनगुने पानी में बैठना) लेना चाहिए. ऐसा अकसर मल त्याग के बाद करें. इससे योनि की पीड़ा में कमी आती है.

    ये भी पढ़ें - आईवीएफ तकनीक के जरिए बनना चाहते हैं माता-पिता, जान लें ये बातें

    आराम और पोषण
    प्रसव के बाद मां के लिए पर्याप्त आराम और गहरी नींद जरूरी है. स्तनापान कराने वाली मां के लिए जरूरी है कि वह अपना भोजन समय से लें ताकि शरीर में पोषण तत्वों की कमी न हों.

    हाइड्रेटेड रहें और एक्सरसाइज करें
    प्रसव के बाद शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए मां अधिक मात्रा में पानी पिएं. साथ ही मां को हल्का-फुल्का एक्सरसाइज भी कर लेना चाहिए. इससे मांसपेशियों में हो रहे दर्द में राहत मिलती है.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
    अगली ख़बर

    फोटो

    टॉप स्टोरीज