आत्ममुग्धता और आत्मप्रेम में हैं अंतर, जानें कैसे

खुद से प्यार करना है अच्छा आपके लिए.
Image: shutterstock)

खुद से प्यार करना है अच्छा आपके लिए. Image: shutterstock)

Narcissism And Self-Love: खुद से प्यार करना (Self-Love) अच्छा लेकिन आत्ममुग्धता (Narcissism) की हद तक नहीं. जानें क्या है दोनों में अंतर (Difference) और क्यों आत्मुग्धता हमारे लिए अच्छी नहीं.

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कहते हैं न कि खुद से प्यार करना सीखो (Self-Love) इससे आपकी जिंदगी उत्साह और उमंग से भर जाती है, लेकिन ये प्यार इस हद तक भी न बढ़ जाए कि आप बस खुद पर ही निहाल होते रहें. खुद की ही बलाइयां लेते रहें और खुद पर ही जान छिड़कते रहें और खुद पर मुग्ध होते-होते खुद का ही नुकसान करा बैठें.जी हां इस लेवल पर आकर ही आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर ये आत्म प्रेम है या आत्ममुग्धता (Narcissism). तो फिर खुदी को कर बुलंद इतना कि खुदा बंदे से पूछे बता तेरी रजा क्या है के लेवल और मैं ही मैं हूं सबसे न्यारा के बीच का अंतर (Difference) समझ कर जिंदगी में आगे कदम बढ़ाएं.

क्या है आत्म प्रेम और आत्ममुग्धताः  

आत्म-प्रेम यानी खुद से प्यार करना एक महान चीज है जो आपको एक सशक्त और सुरक्षित इंसान बनाता है. यह आपको खुद की सराहना करने और खुद का सबसे अच्छा दोस्त बनने में मदद करता है. जब आप खुद से प्यार करते हैं, तो आपको प्यार करने के लिए किसी और की जरूरत नहीं होती है. इसलिए अपने आप को प्यार करने और अपने पसंदीदा होने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन परेशानी वहां आती है जब कभी कभार लोगों को इस सेल्फ लव और नार्सिसिज्म, संकीर्णतावाद कहिए या आत्ममुग्धता के बीच कंफ्यूजन हो जाता है.खुद के लिए जुनून की हद तक मोहब्बत होना नार्सिसिज्म है. आत्ममुग्धता इंसान को एक असुरक्षित, उथली और छिछोरी पर्सनैलिटी में बदल देती है. यह आपको एक व्यक्ति के रूप में स्वार्थी और बेकार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ता.यह सेल्फ लव से बिल्कुल अलग है. इस कंफ्यूजन से बचने  के लिए और इनके बीच अंतर जरूरी है.

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सेल्फ लव है अच्छाः  

सेल्फ लव खुद की केयर को वरीयता देने का नाम है. इसका मतलब है अपनी भलाई के लिए बेहद संजीदा होना और उसे इज्जत देना.यह आपको एक पॉजिटिव इंसान बनाता है और आप में स्वाभिमान पैदा करता है.आपके पास ऊंचे दर्जे का स्वाभिमान होता है, तो आपके लिए दूसरों के साथ उस तरह का व्यवहार करना आसान हो जाता है जैसा आप खुद के लिए चाहते हैं. आप कभी किसी को नीचा नहीं दिखाते और दूसरों के अचीवमेंट्स की सराहना करने के साथ ही उनकी सफलता के जश्न का हिस्सा भी बनते हैं.जब आप खुद से प्यार करते हैं तब सहज और सुरक्षित होते हैं. नतीजन एक इंसान के तौर पर दूसरों के लिए विनम्र और उनके लिए सहानुभूति रखने वाले हो जाते हैं. आपके पास दूसरों को प्रोत्साहित करने और उन्हें कामयाब देखने की योग्यता आ जाती है.

नार्सिसिज्म है बुराः  



नार्सिसिज्म में खुद को बेहद अहम समझने और महत्व देने की भावना बेहद बलवती होती है. इसमें खुद में ही आप हद से ज्यादा रुचि लेने लगते हैं. यह आपको जलनखोर बनाने के साथ ही दूसरे से असुरक्षित महसूस कराता है. दूसरे के सफल होने पर आप खुश नहीं होते और किसी भी तरह दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करते रहते हैं. आप हमेशा दूसरों की तुलना में बेहतर होने की जरूरत महसूस करते हैं.ये एक तरह से आपकी कभी न तृप्त होने वाली प्यास बन जाती है. इसके लिए भले ही आपको हेरफेर ही क्यों न करना पड़े, गलत रास्ते पर ही क्यों न चलना पड़े आप उससे भी गुरेज नहीं करते. अपनी तारीफ और कॉम्पलिमेंट्स के लिए हमेशा तरसते रहते हैं.

इनके बगैर आप खुद को अधूरा और बेकार महसूस करते हैं और हमेशा इसे साबित करने की तलाश में रहते हैं.आपको हमेशा चीजों को कंट्रोल में रखने की जरूरत महसूस होती रहती है. आपको हमेशा सभी के ध्यान का केंद्र बनने की इच्छा रहती है और इसके लिए आप कुछ भी करने को तैयार रहते हैं.
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