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जानिए क्‍या है विपश्यना ध्‍यान, दिलाता है तनाव और अवसाद से पूर्ण छुटकारा


विपश्यना के बारे में जानें फोटो: lolwot.com)

विपश्यना के बारे में जानें फोटो: lolwot.com)

विपश्‍यना ध्‍यान (Vipassana Meditation) विधि दरअसल हजारों साल से योगी करते आए हैं जबकि भगवान बुद्ध ने इसे सरलतम रूप में लोगों के सामने रखा था. यह ध्‍यान विधि खुद को जानने (Know Yourself) में आपकी मदद करता है.

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    विपश्‍यना (Vipassana) एक प्राचीन ध्‍यान (Meditation) विधि है, जिसका अर्थ होता है देखकर लौटना. इसे आत्‍म निरीक्षण और आत्‍म शुद्धि की सबसे बेहतरीन पद्धति माना गया है. हजारों साल पहले भगवान बुद्ध ने इसी ध्‍यान विधि के जरिए बुद्धत्‍व हासिल किया था. यही नहीं, उन्‍होंने इसका अभ्‍यास अपने मानने वालों को भी कराया था. दरअसल हजारों साल से योगी इस विधि को करते आए हैं जबकि भगवान बुद्ध ने इसे सरलतम रूप में लोगों के सामने रखा था.यह ध्‍यान विधि खुद को जानने (Know Yourself) में आपकी मदद करती है.

    यह प्राणायाम और साक्षीभाव का मिलाजुला योग है.इस विधि में खुद की सांस को महसूस करना यानि कि सांस के आवागमन को महसूस करना औेर उसके प्रति सजग रहना अभ्‍यास किया जाता है. विपश्‍यना ध्‍यान के पांच सिद्धांत माने गए हैं. जीव हिंसा की पूर्ण मनाही, चोरी ना करना, बह्मचर्य का पालन, अपशब्‍दों का प्रयोग ना करना, नशे से दूर रहना इसके मूल पांच सिद्धांत है.

    कब करें इसे

    इस ध्‍यान विधि को आप सुबह एक घंटा या शाम को एक घंटा कर सकते हैं. अगर आप दोनों वक्‍त करते हैं तो यह काफी लाभकारी साबित होगा. आप सोने से पहले पांच मिनट और सुबह उठकर पांच मिनट भी इसका अभ्‍यास कर सकते हैं.

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    कैसे की जाए विपश्‍यना ध्‍यान

    आप ध्‍यान की अवस्‍था में बैठें और अपने सांस पर ध्‍यान दें. पूरी मनोस्थिति के साथ ऐसा करें. सांस के आने जाने और रुकने पर ध्‍यान लगाएं. सांस किस तरह आपकी नाक के छिद्र से अंदर जा रहा है और रुक रहा है और बाहर आ रहा है, इसे महसूस करें. प्रारंभिक अवस्‍था में आप उठते, बैठते, सोते जागते, बात करते या मौन रहते किसी भी अवस्‍था में सांस के आने जाने को नाक के छिद्र में महसूस करें. जब तक ध्‍यान केंद्रित हो तभी तक यह करें. जबरन ना करें.

    दूसरे स्‍टेप में यह भी देखें कि दिमाग में कौन सा विचार आया और गया. इस बात पर अभी क्रोध आया औैर अभी गया. इनके अलावा किसी भी चीज में इन्‍वॉल्‍व ना हों. चुपचाप केवल अपने मन, दिमाग और शरीर की प्रतिक्रिया पर नजर बनाए रखें.

    विपश्‍यना स्‍वभाव है कोई विधि नहीं

    दरअसल इस योग विधि को करने में कोई तामझाम की जरूरत नहीं. एकांत में भी करने की जरूरत नहीं है. आप इसे घर का काम करते, बस में बैठे, बाइक चलाते, ऑफिस, बाजार कहीं भी कर सकते हैं. इस विधि को करते हुए किसी को ज्ञान भी नहीं होगा कि आप योग कर रहे हैं.

    क्‍यों करें विपश्‍यना

    विपश्‍यना ध्‍यान दरअसल मन की शांति के लिए, तनाव से पूर्ण छुटकारा के लिए और हर तरह की मानसिक समस्‍या से निजात दिलाने के लिए की जाती है. दिमाग और मन को हेल्‍दी बनाए रखने के लिए यह अद्भुत प्रयास है. इसके करने से मन में नकारात्‍मकता नहीं आती. मन में हमेशा शांति बनी रहती है जिससे शरीर भी निरोग रहता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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