#कामकीबात: सेक्स-संबंध नीरस हो गया है. कभी मेरा मन नहीं करता तो कभी उसका.

काम की बात

सेक्स के लिए केवल उपलब्धता नहीं, मानसिक और शारीरिक तैयारी भी होनी चाहिए. संवाद की भी इसमें बड़ी भूमिका है.

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    प्रश्‍न : रिश्ते में प्यार के बावजूद सेक्स पार्ट 'मिसिंग' है. कभी मेरा मन नहीं करता तो कभी साथी थका हुआ रहता है.

    डॉ. पारस शाह

    #सेक्‍सोलॉजिस्‍ट डॉ.पारस शाह

    आजकल ऐसे बहुत से कपल्स हैं जो इस बात को लेकर परेशान रहते हैं कि कामकाज के फेर में सेक्स-संबंध में नीरसता आ गई है. वे इंटिमेट होना तो चाहते हैं, लेकिन कभी एक का मन नहीं होता तो कभी दूसरे का. कई जोड़े एक-दूसरे पर आरोप लगाते हैं कि मैं जब भी इच्छा जताऊं, साथी मना कर देता है. ये समस्या जितनी आम है, इसे सुलझाना भी उतना ही आसान है.

    रिश्ता जितना गहरा होगा, एक-दूसरे के मूड और जरूरतें उतनी आसानी से समझ में आ सकती हैं. दिनभर की भागादौड़ी के बाद अगर एक साथी थका हुआ है तो उससे सेक्स की इच्छा जताना ज्यादती है. जुड़ने के लिए मन के साथ शरीर भी स्फूर्ति से भरा होना चाहिए. पार्टनर से इंटिमेट होना चाहते हैं तो उसके काम में मदद करें. ये मदद ऊपर तौर पर नहीं होनी चाहिए और न ही केवल इसी मकसद के साथ. घर-बाहर के कामों में बराबर की हिस्सेदारी आपकी संवेदनशीलता को भी बताती है. रसोई में मदद करें, सब्जियों की खरीदारी मिलकर करें. काम में हिस्सेदारी देंगे तो आपसी संबंध भी मजबूत होगा और शारीरिक अंतरंगता की गुंजाइश भी बढ़ेगी.

    एक-दूसरे के 'वक्त' को जानें. सुबह के वक्त पुरुषों की कामेच्छा सबसे प्रबल होती है तो इस दौरान बनाया गया संबंध उनके लिए ज्यादा संतुष्टि देने वाला होता है. ऐसे ही स्त्रियों को अक्सर फुर्सत के लम्हे लुभाते हैं. दोनों मिलकर बीच का कोई रास्ता निकाल सकते हैं. सेक्स के लिए वातावरण का मुताबिक होना भी जरूरी है. क्रिकेट मैच देखते हुए ब्रेक में सेक्स संबंध नहीं बनाए जाते. एक-दूसरे को क्वांटिटी टाइम नहीं लेकिन क्वालिटी टाइम जरूर दें. घर और दफ्तर के बीच वक्त नहीं मिलता तो ब्रेक पर जाएं. इससे रिश्ते में और मजबूती आएगी.

    सेक्स के लिए केवल उपलब्धता नहीं, मानसिक और शारीरिक तैयारी भी होनी चाहिए. संवाद की भी इसमें बड़ी भूमिका है. चाहे थोड़ा सा ही वक्त मिले, एक-दूसरे के साथ खुश रहें, मजाक करें. पुरानी यादें ताजा करें. एलबम देखा जा सकता है या फिर एक-दूसरे की जरूरतें पूछी जा सकती हैं. सामाजिक जिंदगी में भले कितने ही शालीन हों, साथी के साथ अंतरंग वक्त बिताते हुए जरूर पूछें कि उसे क्या अच्छा लगता है या फिर कौन सी चीज आपको अच्छी लगती है.

    (डॉ. पारस शाह सानिध्‍य मल्‍टी स्‍पेशिएलिटी हॉस्पिटल, अहमदाबाद, गुजरात में चीफ कंसल्‍टेंट सेक्‍सोलॉजिस्‍ट हैं.)

    अगर आपके मन में भी कोई सवाल या जिज्ञासा है तो आप इस पते पर हमें ईमेल भेज सकते हैं. डॉ. शाह आपके सभी सवालों का जवाब देंगे.

    ईमेल – Ask.life@nw18.com

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