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Health news: बर्फीली जगहों पर अचानक फ्रॉस्ट बाइट की समस्या हो जाए, तो एक्सपर्ट से जानिए कैसे करें उपचार

Health news: बर्फीली जगहों पर अचानक फ्रॉस्ट बाइट की समस्या हो जाए, तो एक्सपर्ट से जानिए कैसे करें उपचार

जो लोग सैर-सपाटे पर जा रहे हैं, उन्हें इस बीमारी के बारे में पहले से पता करके जाना चाहिए.

जो लोग सैर-सपाटे पर जा रहे हैं, उन्हें इस बीमारी के बारे में पहले से पता करके जाना चाहिए.

Frostbite symptoms and prevention: बर्फीली जगहों पर घूमना एडवेंचर का हिस्सा है लेकिन यह एडवेंचर जोखिम में भी डाल सकता है. यदि आप भी बर्फीली जगहों पर जाना चाहते हैं, तो आपको फ्रोस्ट बाइट (Frostbite) के बारे में जरूर जानना चाहिए. फ्रोस्ट बाइट खतरनाक बीमारी है जो अत्यधिक सर्दी लगने के बाद हाथ या पैर की उंगलियों में लगती है. इसमें हाथ या पैर की उंगलियों की नसें ठंड के कारण जम जाती है या निष्क्रिय हो जाती है.

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    Frostbite symptoms and prevention: सर्दी (Winter) का मौसम आ चुका है और लोग इस मौसम में घूमने की प्लानिंग भी बना ही रहे हैं. यदि आप भी बर्फीली जगहों पर इस दिसंबर या जनवरी में जाने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है. दरअसल, बर्फीली जगहों पर जाना टूरिज्म पसंद लोगों को काफी भाता है. लेकिन बर्फीली जगहों पर घूमना जितना एडवेंचरस होता है, उतनी ही चुनौतियों से भरा होता है. दरअसल, ऊंचे पहाड़ों पर सर्दी के मौसम में पूरा पहाड़ बर्फ की चादर से लिपट जाता है. यह देखने में संगमरमर की तरह लगता है लेकिन तापमान शून्य से नीचे चला आता है. इन स्थितियों में जो बाहर से इन जगहों पर घूमने गए हैं, उसे फ्रोस्टबाइट (Frostbite ) का अटैक हो सकता है. फ्रोस्ट बाइट खतरनाक बीमारी है जो अत्यधिक सर्दी लगने के बाद हाथ या पैर की उंगलियों में लगती है. इसमें हाथ या पैर की उंगलियों की नसें ठंड के कारण जम जाती है या निष्क्रिय हो जाती है. संत परमानंद अस्पताल दिल्ली में ऑर्थोप्लास्टिक हैंड एंड लिंब रिकंस्ट्रक्शन माइक्रोवस्कुलर सर्जन (Orthoplastic Hand and Limb Reconstructive Microvascular Surgeon) डॉ अभिषेक शर्मा बताते हैं कि फ्रोस्टबाइट (Frostbite ) बहुत ज्यादा सर्दी वाली जगहों पर लोगों को लग सकती है. चूंकि उन जगहों पर मेडिकल सुविधाओं का बहुत अभाव होता है, इसलिए जो लोग सैर-सपाटे पर जा रहे हैं, उन्हें इस बीमारी के बारे में पहले से पता करके जाना चाहिए.

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    ठंड से नसें फ्रीज हो जाती है
    डॉ अभिषेक शर्मा ने बताया कि फ्रॉस्ट बाइट (Frostbite) का हमला उन लोगों पर ज्यादा होता है जिनकी उंगलियां आमतौर पर पतली होती है. जब कोई व्यक्ति कम ठंड वाली जगहों से ज्यादा बर्फीली वाली जगहों पर ज्यादा है तो उसके शरीर को वहां के तापमान के साथ संतुलन बिठाने में दिक्कत हो सकती है. इस कारण ऐसे लोगों पर फ्रोस्ट बाइट का हमला हो जाता है. उस स्थिति में उंगलियों तक खून का सर्कुलेशन नहीं हो पाता है. उंगलियों तक जाने वाली नसें सिकुड़ने लगती है या जम जाती है या फ्रीज हो जाती है. दिमाग से उन अंगों का संपर्क टूटने लगता है. डॉ शर्मा ने बताया, जिस प्रकार स्किन की नीचे टिशू जमे रहते हैं उसी प्रकार जब फ्रॉस्ट बाइट का हमला होता है तब स्किन जम जाती है. गंभीर मामले में मसल्स, नर्व और ब्लड वेसल्स भी फ्रीज होने लगते हैं. सर्कुलेशन पूरी तरह से बंद हो जाता है. फ्रोस्ट बाइट के तीन स्टेज है- फ्रस्ट डिग्री फ्रॉस्ट बाइट, सेकेंड डिग्री फ्रोस्ट बाइट और थर्ड डिग्री फ्रॉस्ट बाइट. अंतिम स्टेज में व्यक्ति की उंगलियां काली पड़ जाती है. इस स्थित में उंगलियों को काटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

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    फ्रोस्ट बाइट का खतरा किनको ज्यादा है
    जो लोग स्मोकिंग करते हैं.
    जो डायबेटिक पेशेंट हैं.
    जिनकी उंगलियां पतली होती हैं.
    वेस्कुलर डिजीज से पीड़ित मरीज.
    नसों से संबंधित बीमारी से पीड़ित लोग.
    बहुत ज्यादा सर्दी में कई दिनों तक रहने वाले लोग.
    जहां बर्फीली हवाएं चल रही हो, वहां जाने वाले लोग.
    ऊंचे पहाड़ों पर रहने लोग.
    माउंटेनियर.

    कैसे समझें कि फ्रोस्ट बाइट का हमला होने वाला है
    सबसे पहले ज्यादा सर्दी लगेगी.
    स्किन रेड, व्हाइट, ब्लूइश व्हाइट (नीलाभ), ग्रे, येलो, पर्पल या ब्राउन रंग में बदलने लगेगी. स्किन का रंग बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करता है.
    अब स्किन को छूने पर बहुत ज्यादा ठंड लगेगी और स्किन हार्ड भी हो जाएगी.
    ज्वाइंट में ऐंठन होने लगेगी.
    हाथ और पैर की उंगलियों के पोर में सिहरन होने लगेगी.
    इसके बाद उंगलियां सुन होने लगेंगी.
    गंभीर फ्रॉस्ट बाइट होने पर उंगलियों की स्किन काली पड़ जाएगी और छाले भी पड़ने लगेंगे.

    आपत स्थिति में क्या करना चाहिए
    इन बर्फीली जगहों पर मेडिकल सुविधा का तुरंत पहुंचना चुनौतीपूर्ण है. इसलिए अगर हाथ या पैर की उंगलियों का रंग बदल रहा है और वहां सुन होने लगा है, तो जितना जल्दी हो सके, उन जगहों से निकल कर गर्म वाले जगहों पर जाएं. सबसे पहले उस व्यक्ति का हार्थ गर्म पानी में दें. पहले गुनगुने पानी में हाथ डालने के लिए फिर पानी का तापमान बढ़ाएं और उसमें हाथ डालने को कहे. पानी का तापमान अधिकतम 40 डिग्री तक ही होना चाहिए. आस-पास अलाव जला सकते हैं. जिस भी तरह से हो व्यक्ति को जितना गर्मी दे सके, उन्हें दें. आपात स्थितियों में कुछ दवा दी जा सकती है लेकिन ऐसी परिस्थिति में दवा बिना डॉक्टर की सलाह से न दें. अगर कोई डॉक्टर फोन पर उपलब्ध हो, तो उनसे सलाह लें.

    Tags: Health, Lifestyle

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