लॉकडाउन में पढ़ाई को लेकर आपका बच्चा है परेशान? अपनाएं ये टिप्स

अभिभावक लॉकडाउन में होने वाले नुकसान को नजरअंदाज कर बच्चोें को लाइफ इंजॉय करने के लिए कहें.
अभिभावक लॉकडाउन में होने वाले नुकसान को नजरअंदाज कर बच्चोें को लाइफ इंजॉय करने के लिए कहें.

लॉकडाउन (Lockdown) के बीच अगर आपके घर में कोई बच्चा पढ़ाई(Study) में हुए नुकसान की वजह से परेशान है तो उसे समझाने के लिए इन टिप्स (Tips) को अपनाएं.

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कोरोना महामारी (Corona epidemic) के चलते देश में 24 मार्च से लॉकडाउन (Lockdown) लगा है. ऐसे में करीब चार महीने से बच्चे (child) अपने घरों में कैद हैं. बोर्ड समेत कई क्लास की देश भर में परीक्षाएं (Exams) नहीं हुई हैं. वहीं जिन छात्रों का इस जुलाई से अगली कक्षा में पढ़ने का सपना था वह भी पूरा होता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है. ऐसे में बच्चों में तनाव और बढ़ रहा है.

अगर आपके घर में भी टीनएजर्स हैं और वो परीक्षा या पढ़ाई को लेकर लॉकडाउन में परेशान हैं तो आपको उन्हें समझाने की जरूरत है. इसके लिए आपको बच्चों के हौंसले को बढ़ाना चाहिए और लॉकडाउन में होने वाले नुकसा को नजरअंदाज कर लाइफ इंजॉय करने के लिए कहना चाहिए. आज हम इस आर्टिकल में बता रहे हैं कि अपने बच्चों को ऐसे में किस तरह से समझाएं...

बच्चों से कहें गैप होता रहता है
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार कोरोना महामारी के कारण बच्चे पढ़ाई को लेकर काफी परेशान हैं. उनको अपने साल बर्बाद होने की फिक्र है. ऐसे में माता-पिता को चाहिए कि वो बच्चों को समझाएं कि जिंदगी में कई तरह की चीजों में डिले और गैप होता रहता है. इसमें कोई परेशान होने की बात नहीं है बल्कि इस टाइम को इंजॉय करना चाहिए.
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बच्चे को समझाएं कि कोरोना महामारी पूरी दुनिया में चल रही है. यह समस्या केवल हमारे साथ ही नहीं है. अगर जिंदगी में खाली समय मिला है तो इसमें आपको सारी बातों को भूलकर कुछ नया सीखना चाहिए. ऐसे समय में किशोर को किसी नई चीज का घर में ही प्रशिक्षण देना चाहिए. घर में खाना पकाना भी उन्हें सिखा सकते हैं, जो भविष्य़ में उनको काम आएगी. बच्चे इंटरनेट की मदद से बहुत कुछ सीख सकते हैं.

पढ़ाई को प्रतियोगिता नहीं है
अभिभावको को अपने बच्चों को समझाना चाहिए कि पढ़ाई कोई उत्पादक प्रतियोगिती नहीं है, जिसमें हर साल आगे बढ़ना जरूरी है. यह शैक्षिक मापदंड है, जिस साल- दो साल बाद भी हासिल किया जा सकता है. असली चुनौती करियर के उस फेस में है, जहां पर आप काम शुरू करना चाहते हैं. इसलिए इस परिस्थिति से कोई नुकसान नहीं होने वाला है. अभिभावकों को चाहिए कि वो बच्चों को घर में कुछ क्रिएटिव सिखायें.

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निराशा और खुशियां जीवन का हिस्सा हैं
अपने बच्चों को बताएं कि जीवन में जिस तरह से सुख और दुख आता है वैसे ही निराशा और खुशियां जीवन का हिस्सा हैं. दोनों का जिंदगी में आना लाजमी है. इस निराशा के बाद अगला नंबर खुशियों के आने का ही है. इसलिए परेशान होने की बजाय खुशी के पलों का इंतजार करना चाहिए.

बच्चों की भावनाओं को मानें
माता-पिता को अपने बच्चों की भावनाओं के बारे में जानना चाहिए और उनकी कद्र भी करनी चाहिए. अगर आप उनको डरा- धमका कर शांत रहने और सबकुछ भूलने के लिए कहेंगे तो वह नहीं मानेंगे. इसलिए बच्चों की भावनाओं की कद्र करते हुए उनको समझाने और परिस्थिति के अनुसार साहसी बनाने का काम करें.
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