अगर छिदवाने जा रहे हैं नाक या कान, तो जानें किन बातों का रखना होगा ध्यान

नाक-कान छिदवाने पर साफ-सफाई का ध्यान रखें-Image credit/pexels-cottonbro

नाक-कान छिदवाने पर साफ-सफाई का ध्यान रखें-Image credit/pexels-cottonbro

नाक-कान छिदवाने (Nose-Ear Piercing) के लिए उम्र कोई भी हो कुछ दिक्कतें (Problems) किसी भी उम्र में हो सकती हैं. इन दिक्कतों से बचाव (Protection) के लिए कुछ चीज़ों का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 11:54 AM IST
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हमारे देश में नाक-कान छिदवाने (Nose-Ear Piercing) की परम्परा (Tradition) वर्षों पुरानी है. केवल लड़कियों के ही नहीं कहीं-कहीं लड़कों के कान छिदवाने की परंपरा भी निभाई जाती है. जिसके चलते बहुत लोग छोटी उम्र में ही बच्चों के नाक-कान छिदवा देते हैं. कम उम्र में बच्चों के नाक-कान छिदवाने की वजह किसी के लिए परम्परा है तो किसी के लिए बीमारियों से बचाव (Disease prevention) भी है. तो कई लोग इसलिए भी बच्चों के नाक-कान छोटी उम्र में छिदवा देते हैं जिससे उनकी कोमल त्वचा के चलते ये काम आसान हो और उनको ज्यादा दर्द भी न हो.  वहीं आज के दौर की बात की जाए तो कुछ लोगों के लिए नाक-कान छिदवाना फैशन भी हो गया है. जिसकी वजह से वो युवतियां भी नोज़ एंड ईयर पियर्सिंग करवाती नज़र आती हैं जिनकी नाक-कान बचपन में किसी वजह से नहीं छिद सके या छिदने के बाद बंद हो गए. हालांकि नाक-कान छिदवाने की उम्र कोई भी हो, कुछ दिक्कतें हर उम्र में आती हैं. जिनसे बचने के लिए  यहां बताई जा रही कुछ चीज़ों का ध्यान रखना ज़रूरी है.

डॉक्टर या किसी अनुभवी व्यक्ति से छिदवाएं

नाक-कान छिदवाने के लिए गली, मोहल्ले और कालोनियों में भी कई बार फेरी वाले आवाज़ लगाते हैं. इन लोगों से नाक-कान छिदवाने से इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा होता है. इसलिए कोशिश करें कि नाक-कान छिदवाने के लिए डॉक्टर का सहारा लें. अगर ऐसा संभव न हो तो किसी ऐसे गोल्डस्मिथ का सहारा लें जिसको नाक-कान छेदने का अभ्यास हो जिससे दर्द भी कम हो और इन्फेक्शन का खतरा भी कम हो.

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सही एक्सेसरीज का करें चुनाव


कई बार लोग नाक-कान छिदवाने पर इनमें पहनने के लिए किसी भी धातु की पिन या रिंग खरीद लेते हैं जो कई बार सूट न करने की वजह से छेदन की जगह पर घाव जैसी स्थिति बनने लगती है, जिससे नाक-कान में पस और खून आने की दिक्कत भी हो जाती है. इसलिए कोशिश करें कि चांदी या सोने की पिन या  रिंग का चुनाव किया जाए.

एक्सेसरीज का मूवमेंट भी है ज़रूरी



नाक-कान छिदवाते समय जो भी पिन या रिंग नाक-कान में पहना दिया जाता है ज्यादातर लोग दर्द की वजह से उसका मूवमेंट करने से डरते हैं जबकि उसका मूवमेंट करना बहुत ज़रूरी है. हालाँकि इसको बार-बार नहीं छेड़ना चाहिए लेकिन नाक-कान के छेदन वाले हिस्से में तेल लगाकर पिन या रिंग को दिन में दो-तीन बार तक हल्के हाथ से  क्लॉकवाइज़ और एंटी क्लॉकवाइज़ घुमाते रहना चाहिए, इससे नाक-कान पकने की दिक्कत कम होगी साथ ही छेदन की जगह खुलेगी जिससे पहनी हुई रिंग या पिन बदलने की स्थिति में छेद के बंद होने की संभावना भी कम होगी.

इन्फेक्शन से बचने के लिए करें साफ़-सफाई

नाक-कान छिदवाने के बाद बहुत से बच्चे और युवतियां दर्द होने की वजह से नाक-कान छूने से घबराते हैं और उस जगह को ऐसे ही छोड़ देते हैं. जबकि छेदन की जगह का ध्यान रखने की ज़रूरत बहुत ज्यादा होती है. गर्मी के दिनों में छेदन की  जगह पर धूल-मिट्टी और गंदगी जमा होने की वजह से और उस जगह की साफ़-सफाई न करने की वजह से इन्फेक्शन होने की संभावना ज्यादा होती है. इसलिए डेटॉल या सेवलॉन जैसे किसी एंटीबैक्टीरियल लिक्विड से छेदन की जगह की साफ़-सफाई करते रहें.

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इन घरेलू चीज़ों को भी कर सकते हैं इस्तेमाल


वैसे अगर आप डॉक्टर के ज़रिये अपने नाक-कान छिदवाती हैं तो वो आपको दर्द और इन्फेक्शन से बचने के लिए खुद ही सुझाव देंगे. लेकिन अगर आप घर में किसी के द्वारा या गोल्डस्मिथ के द्वारा नाक-कान छिदवाती हैं तो दर्द और इंफेक्शन से बचने के लिए आप हल्दी-सरसों का तेल, टी ट्री ऑयल और लेवेंडर ऑयल का सहारा ले सकती हैं. एक चम्मच सरसों के तेल में दो चुटकी हल्दी डालकर पका लें और इसको गुनगुना रह जाने पर छेदन की जगह पर लगाएं, इससे दर्द से भी राहत मिलेगी और इंफेक्शन का खतरा भी कम होगा. इसके साथ ही सरसों, टी ट्री या लेवेंडर ऑयल भी दिन में दो-तीन बार नाक-कान के दोनों और लगाते रहें.(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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