जानिए क्या है फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन डे, क्यों मनाया जाता है

भिंड की महिला पूरे परिवार को जहर देकर प्रेमी के साथ भाग गई. (सांकेतिक तस्वीर)

भिंड की महिला पूरे परिवार को जहर देकर प्रेमी के साथ भाग गई. (सांकेतिक तस्वीर)

महिला जननांग विकृति (Female Genital Mutilation) एक ऐसा अपराध है जिससे विश्व की अनेक महिलाएं प्रभावित हैं. यह कुप्रथा उनकी गरिमा को भंग करती है और उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 6, 2021, 6:55 AM IST
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विश्व भर में 6 फरवरी को हर साल 'महिला जननांग विकृति के खिलाफ़ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस' फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन डे (Female Genital Mutilation Day) मनाया जाता है. इसको लेकर यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि वर्ष 2030 तक महिला जननांग विकृति की इस कुप्रथा को ख़त्म कर दिया जाये. वर्तमान में लगभग 20 करोड़ महिलाएं और लड़कियां जहां इस कुप्रथा की शिकार हैं. वहीं हर वर्ष लगभग 40 लाख के इस कुप्रथा का शिकार होने का खतरा बना हुआ है.

जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है 
इस दिन को लड़कियों और महिलाओं के जननांग विकृति पर जागरूकता पैदा करने और इस कुप्रथा को समाप्ति की ओर कैसे ले जाया जाये, ये समझाने के लिए मनाया जाता है. महिला जननांग विकृति (FGM) मानवाधिकार के तहत एक ऐसा अपराध है जिससे विश्व की अनेक महिलाएं और लड़कियां प्रभावित हैं. यह कुप्रथा उनकी गरिमा को भंग करती है. उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है और उन्हें ज़बरदस्ती का दर्द देती है. कई बार इस कुप्रथा के चलते उनकी मृत्यु भी हो जाती है.

दुनिया के 92 से ज्यादा देशों में यह कुप्रथा जारी
रोक के बावजूद फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन दुनिया के कई हिस्सों में जारी है. वर्ष 2020 में यूनिसेफ द्वारा जारी किये गए आंकड़ों के अनुसार दुनिया में तकरीबन 20 करोड़ बच्चियों और महिलाओं के जननांगों को नुकसान पहुंचाया गया. यह डेटा 31 देशों से एकत्र किया गया है. इनमें 27 देश अफ्रीका के हैं. साथ ही मालद्वीप, इराक, इंडोनेशिया और यमन से भी आंकड़ें एकत्र किये गए हैं. हाल ही में इक्वलिटी नाउ द्वारा जारी की गयी एक रिपोर्ट के अनुसार यह प्रथा दुनिया के 92 से ज्यादा देशों में अभी भी जारी है.



इन देशों में ये है हाल
रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका में तकरीबन 5,00,000 से अधिक लड़कियों एवं महिलाओं को फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (एफजीएम) से गुजरना पड़ा या इन पर खतरा बना रहा. यूरोप में 60,000, ऑस्ट्रेलिया में 50,000 या उससे अधिक, जर्मनी में 70,000, जबकि ब्रिटेन में 137,000 महिलाओं और लड़कियों के जननांगों को विकृत कर दिया गया और 67,000 से अधिक पर इसका खतरा बना हुआ है.

क्या होता है फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन 
लड़कियों और महिलाओं के जननांगों को विकृत करने की इस कुप्रथा को फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन या एफजीएम कहा जाता है. आम बोलचाल की भाषा में इसको महिलाओं का खतना भी कहते हैं. इस प्रक्रिया में महिला के बाहरी गुप्तांग को काट दिया जाता है. इस प्रकिया से गुजरने वाली लड़कियों को गंभीर दर्द, अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण, यूरिन पास करने और सदमा लग जाने जैसी दिक्कतों से गुज़रना पड़ता है.

ये है इतिहास
वर्ष 2007 में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के द्वारा एक संयुक्त कार्यक्रम शुरू किया गया था. वर्ष 2012 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने एक प्रस्ताव पारित किया था और 6 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में 'महिला जननांग विकृति के खिलाफ़ शून्य सहिष्णुता' के रूप में इस दिन को नामित किया था. इस दिन United Nations Population Fund (UNFPA) द्वारा महिला जननांग विकृति (एफजीएम) से बचे लोगों को समझाने के लिए और एफजीएम को समाप्त करने के लिए 'ए पीस ऑफ मी' नामक एक अभियान का आयोजन किया जाता है.
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