जानें क्यों होता है विसर्जन? इन पांच मंत्रों के उच्चारण से बनेंगे बिगड़े काम

जानें क्यों होता है विसर्जन? इन पांच मंत्रों के उच्चारण से बनेंगे बिगड़े काम
प्रतीकात्मक तस्वीर

23 सितंबर 2018 को अनंत चतुर्थी है, इस दिन भगवान गणेश विसर्जन है.

  • News18Hindi
  • Last Updated : September 23, 2018, 3:05 pm IST
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    इस बार गणेश चतुर्थी उत्सव 13 सितंबर 2018 से शुरू होकर 23 सितंबर तक रहा. हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म मध्यकाल में हुआ. इसी कारण उनकी स्थापना भी इसी समय होनी चाहिए.  विसर्जन के दिन भी भगवान गणेश की पूजा और अर्चना का विशेष महत्व है.

    क्या है 'विसर्जन'?
    'विसर्जन' शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है कि 'पानी में विलीन होना', ये सम्मान सूचक प्रक्रिया है इसलिए घर में पूजा के लिए प्रयोग की गई मूर्तियों को विसर्जित करके उन्हें सम्मान दिया जाता है.

    क्यों करते हैं विसर्जन  
    महर्षि वेदव्यास ने गणेश चतुर्थी के दिन से भगवान गणेश को महाभारत की कथा सुनाना शुरू किया था. लगातार दस दिनों तक वेदव्यास आंखे बंद कर भगवान गणेश को कथा सुनाते रहे. दस दिनों के बाद जब कथा पूरी हुई तो वेदव्यास ने आंखे खोली तो देखा, लगातार लिखते हुए गणेशजी के शरीर का तापमान तेज हो गया था. जिसे कम करने के लिए वेदव्यास ने तालाब में गणेश जी को स्नान कराते हैं. जिस दिन उन्होनें गणेश जी को स्नान कराया गया था. उस दिन अनंत चर्तुदशी था. इसलिए इस दिन से गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाना लगा.



    गणेश चतुर्थी 13 सितंबर 2018 गुरुवार को मनाई गई. 23 सितंबर 2018 को अनंत चतुर्थी है, इस दिन भगवान गणेश विसर्जन है. इन दस दिनों में पूजा करने के लिए गणेश साधना की जाती है. इन दस दिनों में भगवान गणेश के सही मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए इससे पूजा पूरी व बप्पा प्रसन्न होती है. गणेश साधना करने से घर का कलेश, पैसों की किल्लत आदि खत्म होती है.

    इन पांच मंत्रों के उच्चारण से बनेंगे बिगड़े काम

    1)गणेश साधना मंत्र
    मंत्र .. ऊँ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ..
    2) अगर आप किसी शुभ कार्य करने जा रहे हैं तो इस मंत्र का उच्चारण करें.
    ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ .
    निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥
    3)श्री गणेश बीज मंत्र:
    ऊँ गं गणपतये नमो नमः .
    4) गणेश चतुर्थी के दौरान पूजा करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें
    साज्यं च वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया .
    दीपं गृहाण देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहम् .
    भक्त्या दीपं प्रयच्छामि देवाय परमात्मने .
    त्राहि मां निरयाद् घोरद्दीपज्योत ॥
    5)इस मंत्र के द्वारा प्रातः काल, भगवान श्री गणेश जी का स्मरण करते हुए उच्चारण करें
    प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानमिच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम् .
    तं तुन्दिलं द्विरसनाधिपयज्ञसूत्रं पुत्रं विलासचतुरं शिवयोः शिवाय ॥