घर की फायनेंशियल प्लानिंग में आपकी कितनी हिस्सेदारी है?

घर की फायनेंशियल प्लानिंग में आपकी कितनी हिस्सेदारी है?

घर की फायनेंशियल प्लानिंग में आपकी कितनी हिस्सेदारी है?

क्या आप उन स्त्रियों में से हैं, जिनके बारे में सीएनबीसी और एकॉर्न इन्वेस्ट का नया सर्वे कह रहा है कि 32 फीसदी कामकाजी, पैसे कमाने वाली महिलाएं आज भी फायनेंशियल प्लानिंग के लिए पूरी तरह पति पर निर्भर हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2019, 1:02 PM IST
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औरतों का पैसे के साथ कैसा रिश्ता है? उन औरतों का, जो अपने पैसे कमाती हैं. हमारी फिल्मों की और समाज में फैली प्रचलित अवधारणा की मानें तो औरतें पैसे पर मरती हैं. वो गाना सुना होगा आपने, “तू पैसा-पैसा करती है, तू पैसे पे क्यों मरती है.”



तो क्या सच यही है? आपका सच. 21वीं सदी की एक पढ़ी-लिखी, नौकरीपेशा महिला का सच. आप पैसे पर मर रही हैं या शायद आप पैसे को समझ ही नहीं रही हैं. आपके घर की फायनेंशियल प्लानिंग कौन करता है? बैंक, पैसों और इन्वेस्टमेंट की डीटेल्स किसके पास है. क्या आप उन स्त्रियों में से हैं, जिनके बारे में सीएनबीसी और  एकॉर्न इन्वेस्ट का नया सर्वे कह रहा है कि 32 फीसदी कामकाजी, पैसे कमाने वाली महिलाएं आज भी फायनेंशियल प्लानिंग के लिए पूरी तरह पति पर निर्भर हैं. इतना ही नहीं, उन्हें घर में आए और निवेश किए गए पैसों की कोई जानकारी भी नहीं है. उस फिल्मी झूठ को किनारे करिए, सच तो ये है कि आपने पैसों से जुड़े हर मामले से पल्ला झाड़ लिया है. पता है इसका मतलब क्या है? अगर कल को कभी भी ऐसी नौबत आई कि घर, बैंक, पैसे, जमीन और निवेश के कागजात आपको देखने ही पड़ गए तो आपको पता ही नहीं होगा कि कहां क्या है, कितना है, उसका रिटर्न कितना मिलने वाला है. और ये पढ़ी-लिखी स्त्रियों की बात है. उनकी नहीं, जो कभी स्कूल ही नहीं गईं, जिन्होंने कभी एक रुपया नहीं कमाया.









ऐसा क्यों है कि जब पैसे को समझने, बरतने की बात आती है तो औरतें हमेशा हाथ खड़े कर देती हैं. एक समझदार घर में काम का समझदार बंटवारा तो समझ में आता है, लेकिन आप घर के फायनेंशियल प्लानिंग से बिलकुल अंजान हैं, ये बात थोड़ी समझ से परे है और चिंता की भी. क्योंकि हम जिस जमीन पर पैर रखकर खड़े हैं, जिस पर चल रहे हैं, वो एक ठोस आर्थिक जमीन है. घर की फायनेंशियल प्लानिंग में आपकी हिस्सेदारी न सिर्फ घर की जमीन मजबूत करती है, बल्कि आपके पैरों को भी. और कमजोर पैरों से नहीं तय होते जिंदगी के सफर.
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