थोड़ी सी जमीं, थोड़ा आसमां: ऐसी महिलाओं की कहानियां, जिन्होंने बिना पंखों के उड़ना सीखा

News18 Hindi Online में हम आपको कुछ ऐसी ही महिलाओं से रूबरू करवाएंगे जिन्होंने अपने बूते अपने जीवन की इबारत लिखी. आज ये महिलाएं न सिर्फ अपनी किस्मत लिख रही हैं बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दे रही हैं.

Pooja Prasad | News18Hindi
Updated: August 26, 2019, 11:56 AM IST
थोड़ी सी जमीं, थोड़ा आसमां: ऐसी महिलाओं की कहानियां, जिन्होंने बिना पंखों के उड़ना सीखा
News18 Hindi Online में हम आपको कुछ ऐसी महिलाओं से रूबरू करवाएंगे जिन्होंने अपने बूते अपने जीवन की इबारत लिखी.
Pooja Prasad | News18Hindi
Updated: August 26, 2019, 11:56 AM IST
मर्दों के हिस्से पूरा आसमान आया. जबकि, औरतों के हिस्से न आ सकी 2 गज जमीन भी. जो कुछ उपलब्ध था, वह मर्दों को बाई-डिफॉल्ट मिला, औरतों को इसके लिए करनी पड़ी जद्दोजहद. धरती पर मूल रूप से दो जेंडर (तीसरे जेंडर को तो अब तक हम जेंडर समझ ही न पाए). इन दो में से एक जेंडर को हमने समान अधिकार, समान सुविधाएं, समान ट्रीटमेंट और समान अवसरों का अधिकारी भी न समझा. इसलिए, चीजें versus में आ गईं. औरतों को केवल वो नहीं चाहिए था, जो पुरुषों द्वारा दिया जा रहा था. पुरुष औरत को कुछ देने वाला होता कौन है! क्या पुरुषों को वही सब हासिल है जो औरतों ने दिया? नहीं. पुरुष कब 'गिवर' हो गया और स्त्री कब केवल 'टेकर'? यह कोई लड़ाई नहीं. यह कोई तूतू-मैंमैं नहीं. यह दुनिया की आधी आबादी द्वारा भोगा जाने वाला वह सच है, जिसके हम सब चश्मदीद हैं.

स्त्रियों ने जब सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक डोमेन में कदम बढ़ाए तब बात सिर्फ सपनों की नहीं थी, सर्वाइवल की भी थी. और, बात सिर्फ सर्वानवल की भी नहीं थी, हक की थी. एक तड़प और एक बैचेनी थी भीतर ही भीतर, जो कहती थी कि नहीं चाहिए देवी जैसा सम्मान. इंसान ही समझो. नहीं चाहिए तथाकथित घर की चहारदीवारी की कूपमंडूकता. स्त्री केवल वजाइना और ब्रेस्ट कैरी करने वाली संवेदनशील गुड़िया नहीं, पहले वह इंसान है.

Women Empowerment

जब-जब और जहां-जहां औरतें कमाऊ हुईं, उनकी स्थिति कमोबेश बेहतर हुई

स्वावलंबन से ही सम्मान हासिल होता है. यह स्वावलंबन आर्थिक गुलामी से नहीं पाया जा सकता. गौर करें, इस समाज के मर्दों ने आदि काल से स्त्रियों को आर्थिक गुलाम बनाकर रखने की साजिश रची है. घर की देहरी के भीतर सिलाई-कढ़ाई-बुनाई करना हो तो वह काम स्त्रियों के जिम्मे रखा. पर जैसे ही यह काम देहरी से निकल कर पैसे से जुड़ा उस पर मर्दों ने कब्जा जमाया. खाना पकाने से लेकर घर की साज-सज्जा का काम जैसे ही पैसा देने वाला हुआ, उस क्षेत्र से महिलाएं बेदखल हो गईं. पर अब वक्त बदल रहा है. अब वह खुलकर इन साजिशों का विरोध कर रही हैं और स्वावलंबी होने के हर कदम का स्वागत कर रही हैं.

अपने आसपास गौर करें. जब-जब और जहां-जहां औरतें कमाऊ हुईं, उनकी स्थिति कमोबेश बेहतर हुई. कभी हालात के चलते उसने घर की कथित तौर पर सिक्यॉर दुनिया से निकलकर बाहर कदम रखे और कभी इसलिए कारोबार की नींव रखी कि कुछ अलहदा करना था या फिर परिवार को सपोर्ट करना था. News18 Hindi Online में हम आपको कुछ ऐसी ही महिलाओं से रूबरू करवाएंगे जिन्होंने अपने बूते अपने जीवन की इबारत लिखी. आज ये महिलाएं न सिर्फ अपनी किस्मत लिख रही हैं बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दे रही हैं. जिन रास्तों को इन्होंने चुना है, उनमें कुछ तो पारंपरिक हैं और कुछ इस कदर लीक से हटकर कि आपको सिर खुजाने को मजबूर कर दें.

ऐसी महिलाओं को मैं शेरनियां कहूंगी कि हालात को उन्होंने खुद पर हावी नहीं होने दिया. झगड़कर अपने हिस्से की जमीन तलाशीं और अपने हिस्से का आसमान भी. ये महिलाएं जो न सिर्फ अपने जेंडर विशेष के लिए प्रेरणा हैं बल्कि पुरुषों के लिए भी मोटिवेशन हैं.
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First published: August 22, 2019, 3:00 PM IST
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