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कोरोना पेशेंटों को अपनी एंबुलेंस से खुद उनके मुकाम तक पहुंचाती हैं कमला कौशिक

अपनी एंबुलेंस की ड्राइविंग सीट पर कमला कौशिक. (इनसेट में भी)

रोहतक में खड़ी इस एंबुलेंस की सेवा का लाभ के लिए कोई मरीज या उसके परिजन चाहें तो कमला कौशिक के मोबाइल नंबर 9999499338 या 7206470765 पर संपर्क कर सकता है. कमला कहती हैं कि हम इस सेवा के लिए सरकारी दर पर किराया लेते हैं.

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    नोएडा. कोरोना महामारी ने हमसब की जिंदगी बदल कर रख दी है. पढ़ाई की व्यवस्था बदल गई. काम करने का तरीका बदल गया. मार्केटिंग की स्ट्रैटजी बदल गई. इन सब के बीच विचार और व्यवहार भी बदले. समाज बदला. त्योहारों का रूप बदला. संस्कार भी बदले. लेकिन जो नहीं बदली, वह है इनसान की जिजीविषा. तमाम मुश्किल परिस्थितियों के बीच जीने की उसकी चाहत ने नए रास्त गढ़े.

    कमला कौशिक की एंबुलेंस सेवा

    इस बीच तमाम बुरी खबरें सामने आती रहीं. मौत से जूझते लोगों के बीच मौत बांटते लोग दिखे. जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी दिखी. पैसे की भूख दिखी. सत्ता की चाल दिखी. लेकिन इन सब के बीच जीवन को रोशनी देती वह उम्मीद भी दिखी, जिसने टिमटिमाते दीये की तरह अंधेरे के खिलाफ जंग जारी रखी. ऐसी ही एक जंग का नाम है कमला कौशिक. जब हर तरफ से ऑक्सीजन की कालाबाजारी की खबरें आ रही थीं, जब एंबुलेंस सेवा को लोगों ने कमाई के अवसर में तब्दील कर रखा था, उस बीच रोहतक की बाबा मस्तनाथ यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर कमला कौशिक ने दिल्ली और हरियाणा के लिए एंबुलेंस सेवा शुरू की. इनका मकसद एंबुलेंस सेवा से कमाई करना नहीं था, बल्कि सचमुच कोरोना पीड़ितों की मदद करना रहा. आज भी ये सरकारी दर पर अपनी एंबुलेंस सेवा लोगों को उपलब्ध करा रही हैं. हां, इन्होंने अपनी इस सेवा का विस्तार कर दिया है. अब इनकी एकमात्र एंबुलेंस किसी भी राज्य के किसी भी शहर में जाने को तैयार रहती है.

    एक खबर से आहत हो शुरू की यह सेवा

    कमला बताती हैं कि एक दिन उन्होंने अखबार में एक खबर पढ़ी. रोहतक से चंडीगढ़ पहुंचाने के लिए किसी एंबुलेंस वाले ने एक पेशेंट से 1 लाख 20 हजार रुपये लिए. इस खबर ने इन्हें बुरी तरह झकझोर दिया. उन्हें लगा कि ये लोग क्या कर रहे हैं. यह सेवा का समय है, कमाई करने का नहीं. इस तरह कोई कैसे किसी की परेशानी का फायदा उठाने की बात सोच लेता है? उन्होंने तुरंत अपनी सारी पूंजी लगाकर एक पुरानी एंबुलेंस खरीद ली. उसकी मरम्मत करवाई. एंबुलेंस में जीवनरक्षक किट जुटाया. अब सवाल था कि ड्राइवर अगर मिल भी जाए तो उसे सैलरी कहां से दें? तब उन्होंने फैसला किया कि वे खुद एंबुलेंस चलाएंगी. शुरुआती दौर में कम दूरी के मरीजों को इन्होंने अस्पताल ले जाना या अस्पताल से घर पहुंचाना शुरू किया. अब तो इन्होंने ड्राइवर भी रख लिया. लंबी दूरी के मरीजों को भी एंबुलेंस सेवा मुहैया कराने लगीं. अब भी जब कभी जरूरत होती है और ड्राइवर अगर तत्काल मौजूद नहीं है और दूरी कम है तो कमला कौशिक खुद एंबुलेंस की ड्राइविंग सीट पर बैठ जाती हैं. इस दौरान वे खुद को सुरक्षित रखने के लिए पीपीई किट का भी इस्तेमाल करती हैं. डबल मास्क लगाती हैं. ग्लब्स का इस्तेमाल करती हैं.

    काश कि आर्थिक रूप से सक्षम होती तो न लेती मरीजों से पैसा

    वे कहती हैं कि अगर वे आर्थिक रूप से इतनी सक्षम होतीं तो मरीजों से इस सेवा के लिए पैसे नहीं लेतीं. अब भी सरकारी दर पर ही वे पैसा लिया करती हैं. कई बार स्थितियां ऐसी आईं कि कोई मरीज जरूरतमंद तो है पर उसके पास पैसे नहीं हैं, तो ऐसे समय में वे किराये का भी ख्याल नहीं करतीं और मरीज की सेवा में उनकी एंबुलेंस मौजूद रहती है. वे बताती हैं कि इस सेवा के बदले जब मरीज या उनके परिजन दुआ देते हैं तो उन्हें आत्मिक संतोष मिलता है. उन्हें लगता है कि उनकी साधना पूरी हो रही है. उनका कहना है कि जब किसी इनसान का जीवन संकट में हो तो भला हम अपनी जान के लिए मतलबी होकर उनकी सेवा से खुद को कैसे रोक लें? ऐसा नहीं कर सकती. जब तक जीवन है और इस जीवन पर जब यह महामारी हमला कर रही है, इससे हमें जंग करनी ही है. हमें लोगों की सेवा में जुटे ही रहना है.

    इन नंबरों पर कर सकते हैं संपर्क

    रोहतक में खड़ी इस एंबुलेंस की सेवा का लाभ के लिए कोई मरीज या उसके परिजन चाहें तो कमला कौशिक के मोबाइल नंबर 9999499338 या 7206470765 पर संपर्क कर सकता है. कमला कहती हैं कि इस सेवा के लिए उन्हें पेट्रोल, ऑक्सीजन सिलिंडर और ड्राइवर के लिए ही खर्च निकालना रहता है. एंबुलेंस चूंकि पुरानी है तो थोड़ी-बहुत मेंटेनेंस की भी दरकार होती है. और ये सारे काम सरकारी दर पर लिए गए पैसों से पूरे हो जाते हैं.
    Published by:Anurag Anveshi
    First published: