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World Diabetes Day 2019: लाइफस्टाइल में बदलाव से करें इस बीमारी को कंट्रोल, पढ़ें ये खबर

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Updated: November 12, 2019, 2:22 PM IST
World Diabetes Day 2019: लाइफस्टाइल में बदलाव से करें इस बीमारी को कंट्रोल, पढ़ें ये खबर
डायबिटीज से पूरी तरह मुक्ति मुमकिन नहीं है मगर कुछ जरूरी काम कर इससे बचा जा सकता है.

अंतरराष्‍ट्रीय मधुमेह संघ और विश्‍व स्वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) की ओर से वर्ष 1991 में वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाने की शुरुआत की गई थी. हर वर्ष डायबिटीज डे का अलग लक्ष्‍य होता है.

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  • Last Updated: November 12, 2019, 2:22 PM IST
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हर साल 14 नवंबर को विश्व डायबिटीज दिवस दिवस के रूप में मनाया जाता है. यह बीमारी चीनी और मिठे को लेकर है. मधुमेह या डायबिटीज आज भारत और विश्व में सबसे तेजी से फैलती बीमारी है. देश में इसके लगभग 7.2 करोड़ रोगी हैं, जिनके अनुमानित तौर पर 2025 तक 13.4 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है. अंतरराष्‍ट्रीय मधुमेह संघ और विश्‍व स्वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) की ओर से वर्ष 1991 में वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाने की शुरुआत की गई थी. हर वर्ष डायबिटीज डे का अलग लक्ष्‍य होता है. आपको बता दें कि यदि किसी को डायबिटीज की समस्‍या हो जाती है, तो इसे पूरी तरह से ठीक कर पाना नामुमकिन है लेकिन लाइफस्टाइल में आवश्यक बदलाव कर इससे होने वाले खतरों (डिसऑर्डर) से बचा जा सकता है.

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डायबिटीज के लक्षण
डायबिटीज में लंबे समय तक ब्लड में शुगर लेवल हाई होता है. इस रोग के लक्षण हैं- अक्सर यूरिन (पेशाब) आना, प्यास बढ़ जाना, खाने के बाद भी भूख लगना, थकान और शरीर शिथिल पड़ना, जोड़ों में दर्द होना. यह सब लक्षण इसके खतरे की चेतावनी देते हैं. डायबिटीज कई बार प्राकृतिक या आनुवांशिक कारणों से होती है.

डायबिटीज के प्रकार
डायबिटीज दो तरह के होते हैं- पहला, टाइप 1 डायबिटीज. दूसरा, टाइप 2 डायबिटीज. टाइप 2 डायबिटीज ज्यादा कॉमन है. करीब 90 फीसदी लोग इसके शिकार होते हैं जबकि टाइप1 रेयर होता है. यह जन्म से होता है.

टाइप 1 डायबिटीज-
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इसमें इंसान के शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है या इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाता है. दोनों ही हालात में शरीर में ग्लूसकोज की मात्रा बढ़ जाती है. टाइप 1 डायबिटीज जन्मजात होती है. इस प्रकार के डायबिटीज के मरीजों को अपने खान-पान का विशेष ध्‍यान रखना चाहिए.

टाइप 2 डायबिटीज-
यह ज्यादा आम है. टाइप 2 में शरीर में इंसुलिन कम मात्रा में बनता है या पेन्क्रियाज सही से काम नहीं कर पाता है. 90 प्रतिशत डायबिटीज मरीज इसी कैटेगरी में आते हैं. इसका सबसे आम कारण शरीर का भारी वजन (मोटापा) और पर्याप्त एक्सरसाइज न करना है. कई बार यह आनुवांशिक (हेरेडिट्री) कारणों से भी होता है जबकि कई मामलों में खराब लाइफस्टाइल और दिनचर्चा इसके लिए जिम्मेदार हैं. टाइप 2 डायबिटीज को नियमित एक्सरसाइज व वर्कआउट, बैलेंस्‍ड डाइट और दवाइयों के प्रभाव से कंट्रोल में रखा जा सकता है.

डायबिटीज का असर और खतरा
डायबिटीज का असर इंसान के शरीर पर इसके होने के कुछ वर्षों बाद शुरू हो जाता है. इसे नियंत्रित रखने के लिए ब्‍लड शुगर और ब्‍लड प्रेशर दोनों को नॉमर्ल रखना जरूरी होता है. ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखकर आंखों की रोशनी और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है. डायबिटीज के मरीजों के एक उम्र तक पहुंचने के बाद हृदय संबंधित समस्‍याएं भी शुरू हो जाती हैं. इससे बचने के लिए बहुत जरूरी है कि शुगर लेवल कंट्रोल में रहे. साथ ही इस बीमारी में ब्‍लड प्रेशर, कोलेस्‍ट्रॉल और तनाव पर भी नियंत्रण रखना जरूरी है. डायबिटीज से हार्ट अटैक, स्‍ट्रोक, लकवा, इंफेक्‍शन और किडनी फेल्यर का भी खतरा बना रहता है.

कैसे बचें-
डायबिटीज से पूरी तरह मुक्ति मुमकिन नहीं है मगर कुछ जरूरी काम कर इससे बचा जा सकता है. डायबिटीज मरीजों को जरूरी रूप से जो काम सबसे पहले करना चाहिए वो यह कि उन्हें अपनी लाइफ की डेली रूटीन में कुछ बदलाव करने चाहिए. इसमें सुबह जल्दी उठना और नियमित एक्सरसाइज करना शामिल है. इसके अलावा उन्हें आलस्य का त्याग कर स्वस्थ्य और सक्रिय लाइफस्टाइल अपनाना चाहिए. डॉक्टर इसके मरीजों को हर दिन 45 मिनट तक आवश्य रूप से एक्सरसाइज करने की सलाह देते हैं.

डायबिटीज और हार्ट की दवाएं कभी बंद नहीं होती हैं इसलिए मरीजों को चाहिए कि वो इसे न छोड़ें. 40 साल की उम्र के बाद इंसान को अपने शरीर में शुगर लेवल की जांच, लिपिड प्रोफाइल की जांच, किडनी
फंक्शन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, टीएमटी जांच और आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए. डायबिटीज रोगियों के लिए ब्लड प्रेशर के आवश्यक लेवल को बनाए रखने के लिए नियमित अंतराल पर कुछ खाते रहना जरूरी है.

डायबिटीज की डाइट
डायबिटीज प्रभावित लोगों को थोड़ा और आसानी से पचने वाला भोजन करना चाहिए. वो सभी मौसमी और रस वाले फल खा सकते हैं. साथ ही अखरोट, बादाम, चिया सीड्स, अंजीर जैसे ड्राई फ्रूट्स खाना भी उनके लिए अच्छा होता है. खानपान में गुनगुना पानी, छाछ, जौ का दलिया और मल्टीग्रेन आटा शामिल करें. डायबिटीज के रोगी को नॉन वेज खाने विशेष कर रेड मीट (मटन), शराब और सिगरेट आदि का सेवन नहीं करना चाहिए.

हालांकि डॉक्टर उन्हें मछली खाने की सलाह देते हैं. डायबिटीज रोगियों को अधिक से अधिक मात्रा में पानी पीते रहना चाहिए. नींबू पानी उनकी सेहत के लिए अच्छा रहता है. डायबिटीज रोगी को काफी भूख लगती है. उन्हें बार-बार कुछ न कुछ खाने का मन करता है. ऐसे में इक्टठा कुछ भी खाने के बजाय भूख से थोड़ा कम खाना चाहिए और हल्का भोजन लेते हुए हरा सलाद अधिक मात्रा में खाना चाहिए.

उन्हें अपनी आंखों की रोशनी को बरकरार रखने के लिए गाजर और पालक का रस पीना चाहिए. इससे आंखों की कमजोरी दूर होती है. साथ ही उन्हें अपने भोजन में हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करना चाहिए. शलगम का सेवन डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर लेवल को कम रखने में मददगार है. इसलिए शलगम को सलाद के अलावा सब्जी, पराठे आदि चीजों के रूप में भी शामिल किया जा सकता है.

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भारत में तेजी से फैल रहा है डायबिटीज
विश्व के बाकी देशों की तुलना में भारत में डायबिटीज सबसे तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है. जहां अधिकतर देशों में डायबिटीज पीड़ित 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं, भारत में 30 से 50 वर्ष के लोग इस बीमारी की चपेट में सबसे अधिक आते हैं. 25 साल से कम उम्र के हर 4 में से एक युवा डायबिटीज से पीड़ित है. साल 2012 के आंकड़ों के मुताबिक डायबिटीज से दुनिया भर में 15 लाख लोगों की मौत हुई थी. वर्तमान में दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों में डायबिटीज सातवीं सबसे बड़ी वजह है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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First published: November 12, 2019, 2:22 PM IST
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