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World Diabetes Day 2019: योग में डायबिटीज को पूरी तरह खत्म करने की ताकत, रिसर्च में खुलासा

Pankaj Kumar | News18Hindi
Updated: November 13, 2019, 5:41 AM IST
World Diabetes Day 2019: योग में डायबिटीज को पूरी तरह खत्म करने की ताकत, रिसर्च में खुलासा
एलोपैथी डायबिटीज के लक्षण और कारण पर प्रहार करती है. वहीं आयुर्वेद इसके मबल जड़ और बीमारी की वजह पर चोट करती है.

वैसे डायबिटीज को लाइफस्टाइल डिजीज माना जाता है और इससे निपटने के लिए बहुआयामी प्रयास किए जाने की जरूरत है.

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  • Last Updated: November 13, 2019, 5:41 AM IST
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डायबिटीज हिन्दुस्तान के लिए कितनी बड़ी समस्या का रूप ले चुका है इसका फैसला इन आंकड़ों पर गौर फरमा कर किया जा सकता है. दुनिया में हर पांचवां डायबेटिक रोगी भारतीय है और हर 06 सेकेंड में एक भारतीय की मौत डायबिटीज से ही होती है. इतना ही नहीं इस 06 सेकेंड के दरमियान दो और भारतीय में डायबिटिक रोग की पहचान की जाती है. आलम यह है कि अगर कुछ जल्दी नहीं किया गया तो साल 2030 तक ये संख्या 101.2 मिलियन हो सकती है जो कि साल 2003 तक 61.3 मिलियन थी. यही वजह है कि ऐसा कहा जाने लगा है कि साल 2025 तक भारत दुनिया का डायबिटिक कैपिटल के नाम से जाना जाने लगेगा.

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भारत को डायबिटीज की माहमारी से बचाया जा सकेगा
वैसे डायबिटीज को लाइफस्टाइल डिजीज माना जाता है और इससे निपटने के लिए बहुआयामी प्रयास किए जाने की जरूरत है. एलोपैथी डायबिटीज के लक्षण और कारण पर प्रहार करती है. वहीं आयुर्वेद इसके मबल जड़ और बीमारी की वजह पर चोट करती है. एक्सपर्ट मानते हैं कि दोनों का सम्मिलित प्रयास अगर कारगर रूप से होगा तो भारत को डायबिटीज की माहमारी से बचाया जा सकेगा.

योग और आयुर्वेद से जुड़े लोग कर सकते हैं मदद
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 जून 2016 को योग और आयुर्वेद से जुड़े लोगों से आह्वान किया था कि भारत को दुनिया का डायबिटिक कैपिटल बनाने से रोकने का प्रयास किया जाए. ये काम योग और आयुर्वेद से जुड़े लोग और संस्थान एक साथ मिलकर ही कर सकते हैं. दरअसल प्रधानमंत्री ऐसा आह्वान दूसरे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के दिन कर रहे थे. प्रधानमंत्री के इस आह्वान पर आयुष मंत्रालय ने गंभीर पहल कर एक अंतर्राष्ट्रीय योग एसोसिएशन (IYC) का गठन किया.

नेशनल कमेटी ऑफ एक्सपर्टस का गठन
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वहीं आयुष मंत्रालय की ही पहल पर नेशनल कमेटी ऑफ एक्सपर्टस और डायबिटीज का गठन हुआ जिसमें कई नामचीन शख्सियत ने सदस्यता ग्रहण की. इन नामचीन लोगों में डॉ एच आर नागेन्द्र (तत्कालीन चेयरमैन स्वामी विवेकानंद योग अनुंसधान संस्थान, बैंगलुरू) डॉ सुबोध तिवारी (डायरेटर कैवल्यधाम जो कि योग इंस्टीट्यूट लोनावाला में है), डॉ निखिल टंडन ( हेड ऑफ इंडोक्राइनोलॉजी एंड मेटाबॉलिज्म, एम्स) और डॉ शार्ले टेलिस (डायरेक्टर ऑफ रिसर्च, पंतजलि इंस्टीट्यूट, हरिद्वार) शामिल हैं.
लोगों पर डायबिटीज से लड़ने के लिए किया गया शोध
देश के 600 जिलों में से करी 60 जिलों को रैंडम बेसिस पर चुना गया. दरअसल ऐसा दस जिलों में एक जिले को रैंडम बेसिस पर चुनकर किया गया. एक जिले से 4000 लोगों को लिया गया जिनमें गांव और शहर की हिस्सेदारी बराबर की थी. इस तरह देखा जाए तो कुल 2 लाख 40 हजार लोगों को चुना गया जिन पर शोध करने की जिम्मेदारी ली गई. प्रत्येक जिले में 4 गांव को चुना गया. वहीं बड़े शहरों में 4000 लोगों को इस सैंपल में डाला गया. एक गांव से 40 लोग चुने गए जिसमें 20 डाइबेटिक और 20 प्री डाइबेटिक लोग मौजूद थे.

योग की ट्रेनिंग दी गई
एक जिले के दो गांवों में कंट्रोल ग्रुप के तहत लोगों को रखा गया. कंट्रोल ग्रुप का मतलब है ये रोज व्यायाम करेंगे और नियमित दवा खाएंगे लेकिन डायबिटिज के लिए योग नहीं करेंगे. वहीं दूसरे ग्रुप को समुचित योग की ट्रेनिंग दी गई. ऐसा देश के 60 जिलों में किया जा रहा था. इस पूरी प्रक्रिया में 48 हजार लोगों पर शोध किया गया और इन्हें चुनने के लिए 1200 योग इंस्ट्रक्टर को लगाया गया. 12 हजार प्रीडाइबेटिक को कंट्रोल ग्रुप में रखा गया वहीं 12 हजार डाइबेटिक को योग ग्रुप में. इसी तरह 12 हजार डाइबेटिक को कंट्रोल ग्रुप में वहीं 12 हजार डाइबेटिक को योग ग्रुप में. एक जिले में 20 इंस्ट्रक्टर लगाए गए थे.

एक प्रॉपर डाइट पर रखा गया
वहीं पूरे देश में 35 रीजनल हेड चुने गए थे जिनकी जिम्मेदारी एक प्रदेश को देखने की थी. वहीं कुछ जगह पर दो छोटे प्रदेश को मिलाकर एक रीजनल हेड चुना गया था. ये सभी रीजनल हेड दो सीनियर रिसर्च एसोसिएट्स को रिपोर्ट कर रहे थे जिनका नाम डॉ अमित सिंह और डॉ राजेश एस के था जिनके उपर इंडियन योग एसोसिएसन के नेशनल लेवल कमेटी के सदस्य मौजूद थे. योग ग्रुप में रखे गए सदस्यों को एक प्रॉपर डाइट पर रखा गया और ब्रीदिंग टेक्नीक से लेकर एक्सरसाइज, रिलेक्सेशन के तौर तरीके सिखाए गए. अप्रैल 2017 तक पूरा डेटा इक्ट्ठा किया गया और जून 2017 में इसका निरीक्षण भी किया गया और इस पर एक डिटेल रिपोर्ट तैयार की गई.

रिपोर्ट में पाए गए तथ्य चौंकाने वाले
तथ्यों में पाया गया कि जिन 24 हजार लोगों को, जो कि प्रीडाइबेटिक और डाइबेटिक स्टेज में थे उनमें बेहद सुधार देखा गया. योग ग्रुप में रखे जाने से डाइबेटिक जोन वाले लोग प्रीडाइबेटिक जोन में पहुंच गए. वहीं प्रीडाइबटिक जोन के लोग बिल्कुल डाइबिटीज से मुक्त हो गए. कई लोग जो डाइबेटिक से प्रीडाइबेटिक स्टेज में पहुंचे उनकी दवा खाने की आदत भी छूट गई है. वहीं दूसरा ग्रुप जिन्हें कंट्रोल ग्रुप में रखा गया था उनकी हालत जस की तस रही या कईयों की बिगड़ भी गई.

डायबिटीज लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है
जाहिर है इस नतीजे से उत्साहित ट्रेनर और डॉक्टर्स ने इस बात पर जोर डाला है कि डाइबिटीज लाइफटाइम बीमारी नहीं बल्कि लाइफस्टाइल डीजीज है जिसे योगा के प्रॉपर कोर्स के जरिए पूरी तरह खत्म किया जा सकता है. डॉ अमित सिंह जो कि इस प्रोग्राम के नेशनल लेवल रिसर्च एसोसिएट थे ने बताया कि योग आंतरिक संतुलन में सहायक होता है और इसका जोर पूरी तरह प्रिवेंशन ऑफ डिजीज पर
होता है क्योंकि ये लोगों के लाइफस्टाइल में सुधार लाकर बीमारी को पूरी तरह खत्म कर देता है.

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आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंपी गई रिपोर्ट
डॉ अमित सिंह के मुताबिक इस रिपोर्ट को अमेरिकन डाइबिटीज एसोसिएशन ने अपने जरनल में प्रमुखता से जगह दी है. वहीं डायबिटीज पर किए गए शोध में जो तथ्य मिले हैं उनके उपर रिसर्च पेपर तैयार कर आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय को सौंप दिया गया है जो कि अभी विचाराधीन है. एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर इस प्रयोग को बड़े तबके पर प्रयोग किया गया तो हिन्दुस्तान को डायबिटीज कैपिटल बनाए जाने से रोका जा सकता है.

जीवन की गुणवत्ता भी कई गुणा बढ़ सकती है
इतना ही नहीं भारतीय परंपरा के मुताबिक अपनाए गए इस इलाज से करोड़ों लोगों की जान बच सकती है जो पैसों को अभाव में डायबिटीज और उससे जुड़े कई बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं. ज़ाहिर है भारत जैसे देश में इस प्रयोग को लागू करना लोगों के जीवन की गुणवत्ता भी कई गुणा बढ़ा सकती है.

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First published: November 13, 2019, 5:41 AM IST
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