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World Environment Day 2021: प्रकृति को बचाने के लिए ये महिलाएं कर रहीं खून-पसीना एक

ये महिलाएं प्रकृति को बचाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं (credit: shutterstock/Maridav)

World Environment Day 2021: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हम आपको कुछ ऐसी पर्यावरणविद महिलाओं के बारे में बता रहे हैं. जो प्रकृति को बचाने की मुहिम में हर संभव प्रयासरत हैं और प्रकृति को संरक्षित करने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं.

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    World Environment Day 2021:  विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून यानि कि कल है. विश्व पर्यावरण दिवस लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के हेतु से मनाया जाता है. एक ओर जहां ऐसे लोग हैं जो किसी न किसी तरह से प्रकृति को नुकसान पहुंचाते रहते हैं. तो ऐसे लोग भी कम नहीं हैं जो प्रकृति को बचाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हम आपको कुछ ऐसी महिलाओं के बारे में बता रहे हैं जो अपने-अपने तरीके से प्रकृति को बचाने की मुहिम (Womens Who Trying To Save Environment )में जुटी हुई हैं.

    नेहा सिन्हा

    नेहा सिन्हा देश के कई हिस्सों में जीव-जंतुओं की लुप्त होती प्रजातियों और महत्वपूर्ण जैव विविधता वाले क्षत्रों के संरक्षण पर काम कर रही हैं. नेहा प्रकृति प्रेमी और पर्यावरण लेखिका हैं जो बाज की लुप्त हो रही प्रजाति अमुर के संरक्षण में लगी हुई हैं. इसके साथ ही वो दुर्लभ प्रजाति के पेड़-पौधों को बचाने और बाघ और प्रकृति के संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक भी करती हैं. बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के साथ काम कर रहीं नेहा सिन्हा दिल्ली यूनिवर्सिटी में पर्यावरण नीति पढ़ाती हैं. उनका मानना है कि हमें पर्यावरण को एक रोजमर्रा का मुद्दा बनाने की जरूरत है और जश्न मनाने के लिए केवल 5 जून का इंतजार नहीं करना चाहिए.

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    डॉ. कृति कारंथ

    डॉ. कृति कारंथ एक पर्यावरणविद् और वैज्ञानिक हैं. जो लगभग पिछले बीस वर्षों से 'पर्यावरण पर मानव प्रभाव' विषय पर स्टडी कर रही हैं. कृति ड्यूक विश्वविद्यालय से पर्यावरण विज्ञान और नीति में पीएचडी और येल विश्वविद्यालय से एम.ई.एससी कर चुकीं हैं. वन्यजीव अध्ययन केंद्र, बंगलूरू में मुख्य संरक्षण वैज्ञानिक के तौर पर कार्य कर रहीं डॉ. कृति कारंथ को बीते दिनों वर्ष 2021 के लिए वन्य अन्वेषक पुरस्कार से नवाजा गया.वह पहली ऐसी भारतीय और एशियाई महिला हैं जिनको इस पुरस्कार के लिए चुना गया. ये पुरस्कार वाइल्ड एलिमेंट फाउंडेशन की ओर से उन लोगों को दिया जाता है जो सतत विकास, जलवायु परिवर्तन और वन्य संरक्षण के लिए काम करते हैं. डॉ. कृति कारंथ अपना काम देश के पश्चिमी घाट वन क्षेत्र में करती हैं. जहां कई तरह की वनस्पति और जीव मौजूद हैं. उनके 90 से ज्यादा वैज्ञानिक आर्टिकल और एक बच्चों की किताब पब्लिश हो चुकी है.

    जिस सेबेस्टियन

    जिस सेबेस्टियन एक ऐसी परिस्थिति विज्ञान शास्री हैं जिन्होंने लैंगिक भेदभाव से लड़ाई लड़ी और पर्यावरण क्रांति को बढ़ावा देने के लिए जंगल में अकेले रहकर अपनी रिसर्च जारी रखी. जिस सेबेस्टियन पर्यावरण को बचाने और बचाने में मदद करने के लिए, पौधों और जानवरों के साथ काम करती हैं. उन्होंने वानिकी में उच्च शिक्षा हासिल की है और देश के पश्चिमी घाट वन क्षेत्र में आर्किड फूलों के संरक्षण की दिशा में काम कर रही हैं. उन्होंने एपिफाइटिक ऑर्किड के वितरण का अध्ययन किया है ताकि यह समझा जा सके कि उनकी पर्यावरणीय स्थिति जलवायु परिवर्तन का संकेत कैसे दे सकती है. एपिफाइट्स ऐसे पौधे होते हैं जो यांत्रिक विकास और समर्थन के लिए अन्य पेड़ों का उपयोग करते हैं लेकिन उनसे किसी पोषण को प्राप्त नहीं करते हैं. जिस सेबेस्टियन ऑर्किड को पुनर्स्थापित करने के लिए एक प्रोजेक्ट पर मदुरै कामराज विश्वविद्यालय से केरल के पश्चिमी जंगलों में अध्ययन कर रही हैं.

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    डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन

    डॉ. पूर्णिमा देवी बर्मन काफी चर्चित पर्यावरणविदों में से एक हैं. वो एक प्रकृति संरक्षक और जीव विज्ञानी हैं. वो एक एनजीओ आरण्यक के साथ काम करती हैं और उन्होंने 'हरगीला सेना' नाम का एक ग्रुप बनाया है. जिसके तहत उन्होंने हरगिला संरक्षण को लागू करने के लिए 400 से अधिक स्थानीय महिलाओं को इस सेना में संगठित किया है. इस सेना का काम जंगल में पेड़ पौधों की सुरक्षा और प्रकृति के प्रति अन्य ग्रामीणों को जागरूक करना है. उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है, जो भारतीय महिलाओं के लिए सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है. इसके साथ ही उनको सारस की लुप्त होती प्रजाति 'ग्रेटर एडजुटेंट स्टोर्क' के संरक्षण के लिए 'ग्रीन ऑस्कर' के रूप में जाना जाने वाला 'व्हिटले अवार्ड' से भी नवाज़ा जा चुका है.
    Published by:Meenal Tingel
    First published: