World Health Suicide Prevention Day: हर 40 सेकंड में एक मौत की वजह है आत्महत्या...

Pankaj Kumar | News18Hindi
Updated: September 10, 2019, 4:41 PM IST
World Health Suicide Prevention Day: हर 40 सेकंड में एक मौत की वजह है आत्महत्या...
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक 80 लाख लोग हर साल आत्महत्या कर अपनी जान गवां बैठते हैं जो 15 से 29 साल के बीच के युवाओं में मृत्यु का दूसरा बड़ा कारण है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक 80 लाख लोग हर साल आत्महत्या कर अपनी जान गवां बैठते हैं जो 15 से 29 साल के बीच के युवाओं में मृत्यु का दूसरा बड़ा कारण है.

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  • Last Updated: September 10, 2019, 4:41 PM IST
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आज 10 सितंबर को वर्ल्ड हेल्थ सुसाइड प्रिवेंशन डे मनाया जाता है. वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आज के दिन '40 seconds of Action' लॉन्च कर लोगों में बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए जन जागरण का काम किया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक 80 लाख लोग हर साल आत्महत्या कर अपनी जान गवां बैठते हैं जो 15 से 29 साल के बीच के युवाओं में मृत्यु का दूसरा बड़ा कारण है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर 40 सेकंड में एक मौत आत्महत्या से होती है और 79 फीसदी आत्महत्या कम और मध्यम आय वाले देशों में होती है.

आत्महत्या का संबंध मानसिक असंतुलन से

आत्महत्या की वजह से कई लोग प्रभावित होते हैं. इनमें दोस्त, परिवार, समाज और साथ में काम करने वाले लोग शामिल हैं जिन पर उस आत्महत्या का असर कई प्रकार से होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक व्यक्तिगत, सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर लोगों की मदद से आत्म हत्याएं रोकी जा सकती हैं जिससे समाज हरेक स्तर पर लाभान्वित होगा. आत्महत्या की वजहों पर गौर फरमाया जाय तो रिसर्च में पाया गया है कि आत्महत्या का संबंध मानसिक असंतुलन और अत्यधिक शराब के सेवन के साथ कहीं ज्यादा है.

शादी का टूटना भी आत्महत्या का कारण हो सकता है

इतना ही नहीं संकट के समय जैसे अत्यधिक नुकसान, अकेलापन, प्रेम संबंधों में बिखराव, शादी का टूटना, गंभीर आर्थिक नुकसान, लंबी बीमारी से गुजर रहे इंसान में इन समस्याओं से उबरने का उपाय आत्महत्या ही नजर आता है. रिसर्च के मुताबिक आत्महत्या के लिए किया गया पिछला प्रयास एक बार फिर आत्महत्या करने के लिए और उकसाने जैसा काम करता है. इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन चार ऐसी चीजों पर बल देने के बात कर रहा है जो आत्महत्या को इंसानी स्तर से लेकर सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर रोकने में कारगर हो सकता है.

ये चार तरीके इस प्रकार हैं.
1 माध्यम तक पहुंचकर उस पर रोक लगाना
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2 युवाओं को तनाव से निपटने के लिए तैयार करना
3 ऐसे लोगों की पहचान शुरुआती दौर में ही कर लेना चाहिए जिनमें आत्महत्या करने की टेंडेंसी थोड़ी बहुत भी दिखाई पड़े या फिर उन्होंने कभी भी आत्महत्या करने की कोशिश की हो
4 मीडिया के साथ संपर्क कर आत्महत्या के मामले में जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग के लिए समझाना

सुसाइड पर रोक लगाने का प्रयास जारी

विश्व स्वास्थ संगठन इन मापदंडों का प्रचार प्रसार कर आत्महत्या की बढ़ रही प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए पुरजोर प्रयास कर रही है. हर साल इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन (IASP) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मिलकर 10 सितंबर को वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे के तौर पर मनाती है ताकि दुनिया भर के लोगों में जागरूकता पैदा की जा सके और युवा वर्गों में तुरंत जानलेवा कदम उठाने की जो आदतें होती हैं उन्हें रोका जा सके.

कॉफी कैफे डे के ऑनर वी जी सिद्धार्थ ने की थी आत्महत्या

31 जुलाई 2019 को कॉफी कैफे डे के ऑनर वी जी सिद्धार्थ द्वारा आत्महत्या किया जाना भारत जैसे मुल्क के लिए बेहद हैरंतअंगेज था. जहां इतने बड़े पूंजीपति ने बिजनेस में नुकसान को नहीं झेल पाने के लिए आत्महत्या का रास्ता चुना. ज़ाहिर है वी जी सिद्धार्थ उन लोगों में से एक हैं जिनके पास बेहतर शिक्षा के साथ साथ अकूत संपत्ति की भरमार थी लेकिन लगातार बुलंदियों को छूने के आदी हो चुके सिद्धार्थ के लिए कुछ समय का झटका इतना नागवार गुजरा कि वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गए.

आत्महत्या एक बीमारी है

इस विषय पर जब डॉक्टरों से बातचीत की गई तो कई तरह की बातें सामने आईं. प्रसिद्ध मनोचिकित्सक डॉ. संदीप गोविल ने बताया कि आत्महत्या एक बीमारी है और इसका अमीरी और गरीबी से कोई लेना देना नहीं है. दिमाग में सिरोटेनिन नामक केमिकल कम हो जाने से लोगों को अपना जीवन बेकार सा लगने लगता है और वो आत्महत्या का रास्ता चुनकर जीवन को त्यागना चाहते हैं. डॉ संदीप के मुताबिक वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे मनाने से लोगों में जागरूकता आएगी और वो इसे बीमारी समझकर डॉक्टर के नजदीक जाने से हिचकिचाएंगे नहीं.

इंसान का लाइफ स्टाइल जिम्मेदार

इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज (IBHAS) की प्रोफेसर डॉ. संगीता शर्मा NEWS 18 से बात करते हुए कहती हैं कि इंसान का लाइफ स्टाइल इस तरह बदल चुका है कि वो अपने मन की बात किसी से कर नहीं पाता है. इनमें से कुछ इंसान गहरे डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं और उनमें अपने आप को नुकसान पहुंचाने के तरह तरह के बुरे ख्याल आते रहते हैं. ऐसे मरीज को तुरंत मनोचिकित्सक की जरूरत होती है.

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First published: September 10, 2019, 4:32 PM IST
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