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World Mental Health Day 2021: शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मेंटल हेल्थ संबंधी सेवाएं भी हैं जरूरी, एक्सपर्ट की राय

World Mental Health Day 2021: शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मेंटल हेल्थ संबंधी सेवाएं भी हैं जरूरी, एक्सपर्ट की राय

आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है. हालांकि कोरोना की वजह से इस बार मानसिक समस्‍याएं तेजी से बढ़ी हैं.

आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है. हालांकि कोरोना की वजह से इस बार मानसिक समस्‍याएं तेजी से बढ़ी हैं.

World Mental Health Day 2021: इस साल वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे की थीम है, 'सभी के लिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल: आइये इसे एक वास्तविकता बनाएं'.

    World Mental Health Day 2021: दुनिया भर में आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day 2021) मनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य मेंटल प्रोब्लम्स (मानसिक दिक्कतों) को लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाना है. ताकि लोग मानसिक परेशानियों के प्रति जागरूक हों और समय रहते डॉक्टर्स से सहायता ले सकें. इसके साथ ही मानसिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों की कठिनाई को उनके दोस्तों, रिश्तेदारों और सोसाइटी को भी समझाया जा सके. 2021 में वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे की थीम है, ‘सभी के लिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल: आइये इसे एक वास्तविकता बनाएं’.  दैनिक भास्कर अखबार में छपे लेख में जन नीति और स्वास्थ्य तंत्र विशेषज्ञ (Public Policy and Health System Specialist) डॉ चंद्रकांत लहारिया (Dr Chandrakant Lahariya) ने लिखा है कि हमारे देश में मानसिक बीमारियों को लोग नजरंदाज करते हैं.

    डॉ लहारिया का कहना है कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं (mental health services) की कमी है और मानसिक बीमारियों का इलाज करने के लिए डॉक्टर, नर्स व काउंसलर्स की भारी कमी है. साथी ही ये देखा गया है कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं (Mental health services) नहीं होती हैं.

    मानसिक स्वास्थ्य को लेकर भारत की स्थिति
    साल 2015-16 में हुए एक नेशनल सर्वे के अनुसार, भारत में हर 8 में एक व्यक्ति यानी करीब 17.5 करोड़ लोग, किसी एक तरह की मानसिक बीमारी (mental illness) से प्रभावित हैं. इनमें से 2.5 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो गंभीर बीमारी से प्रभावित हैं, जिन्हें Psychologist द्वारा नियमित इलाज की जरूरत है और बाकी बचे 15 करोड़ लोगों को, जिन्हें गंभीर मानसिक बीमारी नहीं है, उन्हें भी मजबूत और सुचारू आम स्वास्थ्य सेवाओं से फायदा मिल सकता है.

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    लोगों का नजरिया बना रुकावट
    डॉ लहारिया आगे लिखते हैं, यहां ये बात भी गौर करने वाली है कि ज्यादातर लोग अपनी मानसिक बीमारी को छिपाते हैं. वो स्वास्थ्य सेवाओं के संपर्क में ही नहीं आते हैं, जिसकी वजह है हमारा समाज. जो मानसिक बीमारी को नीची नजर से देखता है. पता नहीं क्यों लोग मानसिक रोगों को भी दिल, लीवर और फेफड़े जुड़ी बीमारियों की तरह नहीं देखते? ये भी अन्य बीमारियों की तरह ही इलाज से ठीक हो सकती है.

    क्या करने की जरूरत है?
    कोरोना महामारी के बाद तो मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत बढ़ गई है. समय है जब राज्य सरकारें मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करें और इनके लिए सरकारी बजट आबंटन बढ़ाएं. ऐसी नीतियां बनाई जाएं, जिनसे मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता (Availability) लोगों के करीब बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से पहुंचे.

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    स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स के अलावा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में प्रशिक्षित नर्स व अन्य काउंसलर की उपलब्धता बढ़े. इनके इनोवेशन की जरूरत है और टेली मेडिसिन से इन सेवाओं के सुदूर ग्रामीण इलाकों तक पहुंचने के प्रयास होने चाहिए. इसके साथ ही ये भी सुनिश्चित किया जाए कि मानसिक बीमारियों का इलाज मुफ्त हो और दवाएं आसानी से उपलब्ध हों. सरकार को विशेष अभियान चलाकर मानसिक रोगों से जुड़ी भ्रांतियां को दूर करने की जरूरत है, जिससे लोग इलाज में सकुचाएं (hesitate) नहीं.

    Tags: Health, Health News, Health tips, Lifestyle, Mental health

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