विश्व निमोनिया दिवसः क्या है निमोनिया? जानें इसके लक्षण और कैसे करें इससे अपना बचाव

लगातार खांसी आना इसका मुख्य लक्षण है. बैक्टीरियल निमोनिया में हरे या पीले रंग का थूक निकलता है.

लगातार खांसी आना इसका मुख्य लक्षण है. बैक्टीरियल निमोनिया में हरे या पीले रंग का थूक निकलता है.

जब किसी व्यक्ति को निमोनिया होता है, तो उसके फेफड़ों के अंदर हवा की जगह धीरे-धीरे मवाद और अन्य तरल पदार्थ बनने शुरू हो जाते हैं जिससे ऑक्सीजन का मार्ग कम हो जाता है.

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  • Last Updated: November 12, 2019, 12:22 PM IST
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निमोनिया जैसी बीमारी का शिकार होना आजकल एक आम बात हो गई है. हालांकि यह बीमारी उतनी साधारण नहीं है जितनी आसानी से लोगों को अपनी चपेट में ले लेती है. ये बीमारी अचानक ही लोगों को अपना शिकार बना लेती है. इससे अपना बचाव करना बहुत जरूरी होता है. विश्व निमोनिया दिवस के मौकर पर जानते हैं कि क्या होता है निमोनिया, क्या हैं इसके लक्षण और कैसे करें इसका इलाज.



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निमोनिया क्या है?

निमोनिया एक प्रकार से फेफड़ों की सूजन या इन्फेक्शन है. यदि इन्फेक्शन फेफड़ों के एक हिस्से को प्रभावित करता है, तो इसे लोबर निमोनिया कहा जाता है और यदि यह दोनों फेफड़ों को प्रभावित करता है, तो इसे मल्टीबॉबर निमोनिया के कहा जाता है. जब किसी व्यक्ति को निमोनिया होता है, तो उसके फेफड़ों के अंदर हवा की जगह धीरे-धीरे मवाद और अन्य तरल पदार्थ बनने शुरू हो जाते हैं जिससे ऑक्सीजन का मार्ग कम हो जाता है. सप्प्रेस्सड इम्यून सिस्टम, हृदय और फेफड़ों के रोग, किडनी फेलियर, एचआईवी, डायबिटीज से पीड़ित लोगों को इसका सबसे अधिक खतरा होता है. बच्चों को भी इससे बहुत अधिक खतरा होता है.
निमोनिया के प्रकार



निमोनिया विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं जैसे बैक्टीरियल निमोनिया, वायरल निमोनिया, फंगल निमोनिया. स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया सबसे आम जीवाणु है जो फेफड़ों की सूजन का कारण बनता है. अन्य बैक्टीरिया क्लैमाइडोफिला निमोनिया और लेगियोनेला न्यूमोफिला हैं. इन्फ्लूएंजा टाइप A & B और श्वसन संकरी वायरस (RSV) जैसे वायरस पैदा करने वाले कुछ फ्लू अक्सर छोटे बच्चों और बुजुर्गों में वायरल निमोनिया के लिए जिम्मेदार होते हैं.



निमोनिया के लक्षण

लगातार खांसी आना इसका मुख्य लक्षण है. बैक्टीरियल निमोनिया में हरे या पीले रंग का थूक निकलता है. फेफड़े के उतकों में इसके रोगाणुओं के संक्रमण के कारण कभी-कभी थूक में खून के धब्बे भी दिखते हैं. लेजिनोला निमोनिया में खूनी बलगम भी आता है. निमोनिया में बच्चों को तेज ठंड के साथ तेज बुखार आता हैृ. बड़े लोगों में बुखार की तीव्रता कम होती है. निमोनिया फेफड़ों के वायु छिद्रों पर अटैक करते हैं, जिससे सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होने लगती है. संक्रमण बढ़ जाने पर लगातार खांसी आने लगती है और ज्यादा खांसने के कारण सीने में दर्द भी होने लगता है.



सांसों में तकलीफ के कारण हमारे मस्तिष्क को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं. परिणामस्वरूप कई उम्रदराज लोगों में मेमोरी लॉस होने लगती है. बैक्टीरियल निमोनिया के संक्रमण में कई लोगों को ठंड के साथ आने वाले तेज बुखार में पसीना आते भी देखा गया है. बैक्टीरियल निमोनिया में कोशिकाओं में ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम हो जाती है, जिससे नाखूनों का रंग सफेद और होंठ पीले पड़ जाते हैं. ऑक्सीजन लेवल कम होने के कारण लगातार थकान, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और पूरे शरीर में कमजोरी होने लगती है.



निमोनिया के लक्षण दिखने पर क्या करें

निमोनिया के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं, क्योंकि थोड़ी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है. बैक्टीरिया के कारण होने वाले निमोनिया रोग दो से चार सप्ताह में ठीक हो सकते हैं. दूसरी ओर वायरल जनित निमोनिया ठीक होने में अधिक समय लग जाता है. लहसुन को अपने खाने में नियमित रूप से शामिल करें क्योंकि यह प्राकृतिक एंटीबायोटिक के रूप में काम करता है. हल्दी को अपने भोजन में जरूर शामिल करें क्योंकि यह निमोनिया को जल्द खत्म करने में सहायक होती है.



अदरक भी सांस से संबंधित समस्या को दूर करती है. तुलसी एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जो खराब बैक्टीरिया को शरीर से बाहर निकालती है. इसे दिन में 6 बार लेना चाहिए. विटामिन सी से युक्त फलों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करें. इस रोग में पर्याप्त पानी पीना चाहिए. गाजर का सेवन आंखों के लिए ही नहीं, बल्कि फेफड़ों के लिए भी अच्छा होता है. निमोनिया में गाजर का जूस जरूर पिएं. इस बीमारी की स्थिति में चीनी के बदले शहद खाएं, क्योंकि इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो खराब बैक्टीरिया से शरीर को बचाने में मदद करते हैं.



जिन्हें निमोनिया हो, उन्हें दूध के बने उत्पादों से दूरी बना कर रखनी चाहिए. इस दौरान काली चाय का सेवन करना चाहिए. चुकंदर में काफी ऊर्जा होती है और यह शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूती प्रदान करता है. इस बीमारी में आपको इसका सेवन जरूर करना चाहिए. निमोनिया होने पर मरीज को सादा भोजन करना चाहिए और खूब पानी पीना चाहिए. निमोनिया के रोगी को मांस, तेल, मसाले और बाहर के खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए.



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निमोनिया से बचाव

जीवन के शुरुआती चरणों में टीकाकरण के माध्यम से निमोनिया को रोका जा सकता है. प्रीव्नर (शिशुओं के लिए PVC13) और न्यूमोवैक्स (बच्चों और वयस्कों के लिए PPSV23) नाम के टीके आमतौर पर बैक्टीरिया एस निमोनिया के कारण होने वाले निमोनिया से लड़ने के लिए उपयोग किए जाते हैं. निमोनिया को रोकने के अन्य उपायों में धूम्रपान को प्रतिबंधित करना या सीमित करना, नियमित रूप से हाथ धोना, खांसी या छींकने पर मुंह और नाक को ढंकना, स्वस्थ आहार का सेवन करना, संक्रमित व्यक्ति के थूक या खांसी के कण के संपर्क से बचना, पर्याप्त आराम करना और शारीरिक गतिविधियां है.



Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.
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