World Population Day 2020: गर्भवती महिलाओं के लिए घातक है कोरोना महामारी, बरतें ये सावधानियां

World Population Day 2020: गर्भवती महिलाओं के लिए घातक है कोरोना महामारी, बरतें ये सावधानियां
इस बार संयुक्त राष्ट्र (UN) ने विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day) की थीम ‘कोविड-19 (Covid- 19) की रोकथाम: महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ (Health) और अधिकारों की सुरक्षा कैसे हो’ रखा गया है.

इस बार संयुक्त राष्ट्र (UN) ने विश्व जनसंख्या दिवस (World Population Day) की थीम ‘कोविड-19 (Covid- 19) की रोकथाम: महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ (Health) और अधिकारों की सुरक्षा कैसे हो’ रखा गया है.

  • Last Updated: July 11, 2020, 6:36 AM IST
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हर साल 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य दुनिया में तेजी से बढ़ती आबादी की ओर सभी का ध्यान आकर्षित करना होता है. इस बार दुनिया कोरोना महामारी की गिरफ्त में है. ऐसे में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने साल 2020 की विश्व जनसंख्या दिवस की थीम में महिला स्वास्थ को जोड़ा है. यूएन ने इसका शीर्षक, ‘कोविड-19 की रोकथाम: महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ और अधिकारों की सुरक्षा कैसे हो’. यूएन इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण महिलाओं से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा है. यूनाइटेड नेशन्स पॉप्युलेशन फंड (यूएनपीएफ) के अनुसार, कोरोना महामारी के कारण महिलाओं के स्वास्थ से जुड़े मुद्दों से ध्यान हट गया है. न केवल दुनियाभर की महिलाओं के लिए नियमित यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुई हैं, बल्कि महिला स्वास्थ्य को बढ़ावा देने वाले संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न सरकारों के कार्यक्रमों पर भी असर पड़ा है.

कोरोना वायरस ने इस तरह बढ़ाई महिलाओं की परेशानी
myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. अजय मोहन बताते हैं कि कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर देखा गया है, जिनकी इम्युनिटी यानी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है. गर्भावस्था और नवजात शिशुओं में इसका खतरा अधिक है. यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस और लॉकडाउन के दौर में महिलाओं को दोहरी परेशानी से जूझना पड़ रहा है. एक तरफ उन्हें खुद को इस महामारी से बचना है, वहीं गर्भवती या नवजात शिशु होने की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का सामना भी करना है. अधिकांश देशों ने अपने स्वास्थ संसाधन पूरी तरह से कोरोना की रोकथाम में झोंक दिए हैं. गर्भवती या अभी-अभी मां बनी महिलाओं के लिए लॉकडाउन में घर से बाहर निकलना या कोरोना काल में अस्पताल जाना भी खतरे से खाली नहीं है. जिन महिलाओं ने इस दौरान अस्पताल में नवजात शिशु को जन्म दिया, उनकी सांसें भी हमेशा फूली रहीं. सुरक्षित यौन संबंधों के लिए गर्भनिरोधक साधनों का अभाव, परिवार नियोजन, घरेलू हिंसा, एचआईवी एड्स का खतरा, ऐसे मुद्दे रहे, जिनका सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ा.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया ऐसे में क्या करें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने समय-समय पर गाइडलाइन जारी कर बताया है कि ऐसे हालात में क्या किया जा सकता है. प्रभावित देशों से कहा गया है कि वे कोरोना वायरस की रोकथाम के साथ ही सामान्य स्वास्थ सेवाओं और अर्थव्यवस्था पर भी ध्यान दें. वहीं महिलाओं से विशेष तौर पर अपील की है कि वे कोरोना वायरस और लॉकडाउन के नियमों का पूरी तरह पालन करें और अपने बच्चों का भी ख्याल रखें. महिलाएं अपने नवजात शिशुओं को नियमित रूप से स्तनपान करवाएं, ताकि उनकी इम्युनिटी बढ़े. गर्भनिरोधकों का सही तरीके से इस्तेमाल करें. घरेलू हिंसा से खुद को बचाएं, क्योंकि इसका मानसिक असर सबसे ज्यादा पड़ता है.



myUphar से जुड़े डॉ. विशाल मकवाना के अनुसार, महिलाओं को शारीरिक संबंध बनाने से लेकर प्रेग्नेंट होने और नवजात शिशु को जन्म देने तक अपने शरीर के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य का भी बहुत ख्याल रखना होता है.

कोरोना काल में नहीं मिल रहे पोषक तत्व
मेडिकल जर्नल लांसेंट ने अपने अध्ययन में पाया है कि कोरोना वायरस के काल में 5 साल से कम उम्र के शिशुओं और उनकी माताओं की मृत्यु के ज्यादा मामले सामने आए हैं, क्योंकि इस दौर में उन्हें पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं और पोषक तत्व नहीं मिल रहे हैं. कोरोना काल के 6 महीनों में शिशुओं की मृत्यु के 2,53,500 और माताओं की मृत्यु के 12,200 अतिरिक्त मामले सामने आए हैं. इस तरह महिलाएं इस मुश्किल समय में अपना और नवजात का विशेष ख्याल रखें. किसी तरह की आशंका हो तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें. परिवार के अन्य सदस्य भी महिलाओं पर विशेष ध्यान दें और उनकी मदद करें.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, महिलाओं की यौन समस्याएं और समाधान पढ़ें।

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