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World Spine Day 2021: रीढ़ की हड्डी के दर्द का शरीर और मन पर पड़ता है असर, एक्सपर्ट ने बताई 5 बातें

World Spine Day 2021: रीढ़ की हड्डी के दर्द का शरीर और मन पर पड़ता है असर, एक्सपर्ट ने बताई 5 बातें

लगातार झुककर बैठने से स्पाइन डिस्क कम्पैक्ट होने लगती है. (प्रतीकात्मक फोटो- shutterstock.com)

लगातार झुककर बैठने से स्पाइन डिस्क कम्पैक्ट होने लगती है. (प्रतीकात्मक फोटो- shutterstock.com)

World Spine Day 2021 : इस बार वर्ल्ड स्पाइन डे 2021 (World Spine Day 2021) की थीम है, 'बैक टू बैक (Back To Back)'.ये थीम रीढ़ की हड्डी में दर्द और अक्षमता को दोबारा ठीक करने और फिर से इस पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को दर्शाती है.

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    World Spine Day 2021 : हर साल 16 अक्टूबर को वर्ल्ड स्पाइन डे (World Spine Day) मनाया जाता है. ऐसे में आज यह दिन मनाया जा रहा है. इसका उद्देश्य रीढ़ की हड्डी से जुड़े रोगों के प्रति जागरूकता फैलाना है, क्योंकि रीढ़ की हड्डी संबंधी विकार विकलांगता के प्रमुख कारणों में से हैं. इस बार वर्ल्ड स्पाइन डे 2021 (World Spine Day 2021) की थीम है, ‘बैक टू बैक (Back To Back)’.ये थीम रीढ़ की हड्डी में दर्द और अक्षमता को दोबारा ठीक करने और फिर से इस पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता को दर्शाती है. बता दें कि दुनिया में अनुमानित 54 करोड़ (540 मिलियन) लोग किसी ना किसी टाइम लो बैक पेन (पीठ के निचले हिस्से में दर्द) से पीड़ित हैं, यह सालों तक विकलांगता के साथ जीने का प्रमुख कारण बना हुआ है. दैनिक भास्कर अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट में मुंबई के लीलावती अस्पताल के स्पाइन सर्जन डॉ विनोद अग्रवाल बताया कहते हैं, ‘रीढ़ को पहुंचे किसी भी प्रकार के नुकसान से ब्लड सर्कुलेश, श्वसन और स्पर्श प्रभावित होता है. मांसपेशियों में कमजोरी, शरीर के विभिन्न हिस्सों में दर्द यहां तक की कई लोगों में अवसाद की शिकायत भी हो जाती है.’

    डॉ अग्रवाल ने आगे कहा है कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिसर्च बताती है कि स्पाइन में गड़बड़ी का असर व्यक्ति पर शारीरिक और एवं भावनात्मक दोनों रूप से पड़ता है. उन्होंने रीढ़ को हुए नुकसान से शरीर और मन पर पड़ने वाले 5 बड़े असर के बारे में बताया है.

    पीठ में दर्द 
    लगातार झुककर बैठने से स्पाइन डिस्क कम्पैक्ट होने लगती है. साथ ही फिजिकल एक्टिविटी कम होने से स्पाइन के आसपास लिगामेंट टाइट होने लगते है, इससे स्पाइन की फ्लैक्सिबिलिटी घटती है, जिसकी वजह से लंबी सिटिंग से पीठ में दर्द होने लगता है.

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    कमजोर मसल्स
    स्पाइन आर्क (spine arch) के अप्राकृतिक फैलाव के कारण पेट एवं उसके आसपास की मांसपेशियां (मसल्स) कमजोर होने लगती हैं, ऐसा लंबी सिटिंग से होता है.

    नेक और शोल्डर में पेन
    स्पाइन को सिर से जोड़ने वाली सर्वाइकल वर्टेब्रा (cervical vertebrae) में तनाव पड़ने के कारण गर्दन में दर्द होने लगता है, इसके साथ ही कंधों और पीठ की मांसपेशियों को भी नुकसान पहुंचता है.

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    ब्रेन फॉग की शिकायत
    मूवमेंट ना होने से ब्रेन में पहुंचने वाले ब्लड और ऑक्सीजन की मात्रा घटने लगती है, इससे सोचने की क्षमता भी प्रभावित होती है. जिसे ब्रेन फॉग कहते हैं, इस दौरान लोग ना तो अपने कामकाज पर ध्यान दे पाते हैं और ना ही ना ही निजी जीवन में. कई बार व्यक्ति बहुत ज्यादा मूर्खतापूर्ण या अलग व्यवहार करने लगता है.

    बिहेवियर पर असर
    ज्यादा देर तक बैठने से न्यूरोप्लास्टिसिटी (Neuroplasticity) इफैक्ट होती है, न्यूरॉन्स (Neurons) यानी इंफोर्मेशन मैसेंजर्स की एक्टिविटी भी कमजोर होती है, जिससे व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर होता है और डिप्रेशन बढ़ता है.

    Tags: Health, Health tips, Lifestyle

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