अनुलोम विलोम से बढ़ेगी इम्यूनिटी, योग एक्सपर्ट सविता यादव से सीखें योग

अनुलोम विलोम से बढ़ेगी इम्यूनिटी, योग एक्सपर्ट सविता यादव से सीखें योग
योग एक्सपर्ट सविता यादव से सीखें योग

योग से व्यक्तित्व में भी विकास आता है. योग करने से पहले लयबद्ध और गतिबद्ध तरीके से सांसों पर ध्यान स्थापत करना चाहिए. अपनी क्षमता के अनुसार की योग करें. शुरुआत में कुछ सूक्ष्म व्यायाम करें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 5, 2020, 10:27 AM IST
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कोरोना (Corona) जैसे किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचने के लिए जरूरी है शरीर की इम्यूनिटी (Immunity) बढ़ाना. ऐसे में इम्यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए न सिर्फ हेल्दी खाना खाएं बल्कि जमकर योग (Yoga) भी करें. नियमित रूप से योग करने से शरीर में एनर्जी का संचार तो होता ही है साथ ही कई प्रकार की बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है. योग का मतलब है जोड़ना. ये आपके बहिर्मन को आपके अंतर्मन से जोड़ता है. शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए दिन में एक घंटा योग जरूर करें. योग करने के लिए इसका रोज अभ्यास करना जरूरी है. योग से व्यक्तित्व में भी विकास आता है. योग करने से पहले लयबद्ध और गतिबद्ध तरीके से सांसों पर ध्यान स्थापत करना चाहिए. अपनी क्षमता के अनुसार की योग करें. शुरुआत में कुछ सूक्ष्म व्यायाम करें.

पद्मासन: पद्मासन शब्द दो अलग शब्दों से मिलकर बना है. पद्मासन में पहला शब्द पद्म है, जिसका अर्थ कमल होता है जबकि दूसरा शब्द आसन है, जिसका अर्थ बैठना होता है. पद्मासन में योगी ऐसी स्थिति में बैठता है जैसे कमल का फूल.

Posted by News18 Hindi Life on Friday, 4 September 2020


पद्मासन के फायदे


पद्मासन करने से शरीर को बहुत जबरदस्त फायदे मिलते हैं. अगर आप कभी अशांत और बेचैन महसूस कर रहे हों तो पद्मासन का अभ्यास करें. ये आपके मन को शांत करने में मदद करेगा. इस आसन को अलौकिक ऊर्जा प्राप्त करने, मेडिटेशन या ध्यान करने, चक्र या कुंडलिनी को जाग्रत करने के लिए करते हैं. पद्मासन बहुत ही शक्तिशाली आसन है. ये कमर और हृदय रोगों के लिए बेहतरीन आसन है. इसके तमाम भौतिक और आध्यात्मिक लाभ योगशास्त्र में बताए गए हैं. ये मेडिटेशन के लिए बताए गए बेहतरीन आसनों में से एक है.

उत्तानपादासन: पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं. दोनों हथेलियों को जांघों के साथ भूमि पर स्पर्श करने दें. दोनों पैरों के घुटनों, एड़ियों और अंगूठों को आपस में सटाए रखें और टांगें तानकर रखें. अब सांस भरते हुए दोनों पैरों को मिलाते हुए धीमी गति से भूमि से करीब डेढ़ फुट ऊपर उठाएं अर्थात करीब 45 डिग्री कोण बनने तक ऊंचे उठाकर रखें. फिर श्वास जितनी देर आसानी से रोक सकें उतनी देर तक पैर ऊपर रखें.

फिर धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए पांव नीचे लाकर बहुत धीरे से भूमि पर रख दें और शरीर को ढीला छोड़कर शवासन करें. इसे 10 बार करें. इसके बाद यही प्रक्रिया एंटी- क्लॉकवाइज करें. यह आसान मोटापा घटाने में सहायक है.

कपालभाती: कपालभारती बहुत ऊर्जावान उच्च उदर श्वास व्यायाम है. कपाल अर्थात मस्तिष्क और भाति यानी स्वच्छता अर्थात 'कपालभारती' वह प्राणायाम है जिससे मस्तिष्क स्वच्छ होता है और इस स्थिति में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से संचालित होती है. वैसे इस प्राणायाम के अन्य लाभ भी हैं. लीवर किडनी और गैस की समस्या के लिए बहुत लाभ कारी है. कपालभाति प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें. इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं. इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैं लेकिन एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें. क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं. इसे कम से कम 5 मिनट और अधिकतम 30 मिनट तक कर सकते हैं.

कपालभारती के फायदे
ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है
सांस संबंधी बीमारियों को दूर करमे में मदद मिलती है. विशेष रूप से अस्थमा के पेशेंट्स को खास लाभ होता है.
महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी
पेट की चर्बी को कम करता है
पेट संबंधी रोगों और कब्ज की परेशानी दूर होती है
रात को नींद अच्छी आती है

ये लोग कपालभारती न करें
प्रेग्नेंट महिलाओं को इसे करने से बचना चाहिए
जिनकी कोई सर्जरी हुई हो वह इसे न करें
गैसट्रिक और एसिटिडी वाले पेशेंट्स इसे धीरे-धीरे करने की कोशिश करें.
पीरियड्स में बिल्कुल न करें.
हाई बीपी और हार्ट संबंधी रोगों के पैशेंट्स इसे करने से बचें.

अनुलोम विलोम प्राणायाम: सबसे पहले पालथी मार कर सुखासन में बैठें. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए. अब अनामिका उंगली से बाई नासिका को बंद कर दें. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड़ दें.

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे
-फेफड़े मजबूत होते हैं
-बदलते मौसम में शरीर जल्दी बीमार नहीं होता.
-वजन कम करने में मददगार
-पाचन तंत्र को दुरुस्त बनाता है
-तनाव या डिप्रेशन को दूर करने के लिए मददगार
-गठिया के लिए भी फायदेमंद
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