Yoga For Lungs: कोरोना काल में फेफड़े बने रहेंगे स्वस्थ, करें ये खास योगासन

नियमित योगाभ्‍यास से सांसों से संबंधित समस्‍याएं दूर होंगी.

नियमित योगाभ्‍यास से सांसों से संबंधित समस्‍याएं दूर होंगी.

योगासन (Yoga Postur) संक्रमण (Corona Infection) से बचाव करने में मददगार हो सकते हैं. इसलिए अपने रूटीन में योग शामिल करने चाहिए. ताकि रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ फेफड़ों की कैपिसिटी (Lung Capacity) भी बढ़े.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 24, 2021, 11:36 AM IST
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इस समय कोरोना संक्रमण (Corona Infection) की दूसरी लहर तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रही है और इसमें लोगों को सांसों से संबंधित समस्‍याएं ज्‍यादा हो रही हैं. ऐसे में नियमित तौर पर किए जाने वाले योगासन (Yoga Postur) संक्रमण से बचाव करने में मददगार हो सकते हैं. इसलिए अपने रूटीन में योग शामिल करने चाहिए, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता के साथ लंग्‍स की क्षमता (Lung Capacity) को भी बढ़ाएं. आज के इस लाइव योगा सेशन में फेफड़ों को मजबूत बनाने वाले कई योगाभ्‍यास सिखाए गए. इनको करने से लंग्‍स की होल्‍ड करने की केपिसिटी भी बढ़ेगी और आप अच्‍छी तरह सांस ले पाएंगे.

इसके अलावा जो लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं उन्‍हें भी नियमित योगाभ्‍यास करना चाहिए. ताकि वे तनाव से दूर हों और लंबे समय तक बैठे रहने से कमर दर्द आदि समस्‍याएं होती हैं, उनसे भी राहत पा सकें. पर्वत आसन, भुजंग आसन आदि कई ऐसे आसन हैं जो लंग्‍स की क्षमता को बढ़ाते हैं और कमर दर्द में भी आराम देते हैं. कमर लचीली बनती है. इसके अलावा योग करते समय इन नियमों का पालन करें. योगाभ्‍यास धीरे-धीरे करना चाहिए. साथ ही अपनी क्षमता अनुसार ही योग करें.

मार्जरी आसन

मार्जरी आसन को अंग्रेजी में कैट पोज (Cat pose) के नाम से बुलाया जाता है. इसे कैट खिंचाव मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है. इस आसन को करने से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों का लचीलापन बना रहता है. मार्जरी आसन एक आगे की ओर झुकने और पीछे मुड़ने वाला योग आसन है. कैट वॉक दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन हम योग आसन वर्ग में कैट पोज के बारे में चर्चा करते हैं. यह आसन आपके शरीर के लिए अनके प्रकार से लाभदायक है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को एक अच्छा खिंचाव देता है. इसके साथ यह पीठ दर्द और गर्दन दर्द में राहत दिलाता है.


मार्जरी आसन के फायदे

रीढ़ की हड्डी को अधिक लचीला बनने में मदद करता है



पाचन क्रिया में सुधार करने में मदद करती है

रक्त परिसंचरण में सुधार करती है

पेट से अनावश्यक वसा को कम करने में मदद करता है

पेट को टोन करने में मदद करता है

तनाव को दूर करने में बहुत मदद करता है

मन को शांत करके मानसिक शांति प्रदान करता है

कंधे और कलाई दोनों को मजबूत बनाता है

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ताड़ासन

ताड़ासन योग पूरे शरीर को लचीला बनाता है. यह एक ऐसा योगासन है जो मांसपेशियों में काफी हद तक लचीलापन लाता है. यह शरीर को हल्का करता है और आराम देता है. इसके अलावा शरीर को सुडौल और खूबसूरती भी प्रदान करता है. शरीर की अतिरिक्त चर्बी को पिघालता है और आपके पर्सनैलिटी में नई निखार लेकर आता है.

ताड़ासन करने का तरीका

-इसके लिए सबसे पहले आप खड़े हो जाएं और अपने कमर और गर्दन को सीधा रखें.

-अब आप अपने हाथ को सिर के ऊपर करें और सांस लेते हुए धीरे धीरे पूरे शरीर को खींचें.

-खिंचाव को पैर की उंगली से लेकर हाथ की उंगलियों तक महसूस करें.

-इस अवस्था को कुछ समय के लिए बनाए रखें ओर सांस ले सांस छोड़ें.

-फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने हाथ और शरीर को पहली अवस्था में लेकर आएं.

-इस तरह से एक चक्र पूरा होता है.

ऊष्‍ट्र आसन

यह आसन रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए बहुत ही कारगर आसन है. इस आसन में शरीर ऊंट की मुद्रा में होता है. इस मुद्रा में शरीर को पीछे की तरफ झुकाया जाता है. इससे रीढ़ की हड्डी पर सकारात्मक दबाव बनता है. इस दबाव के कारण जल्दी ही रीढ़ की हड्डी की समस्याएं दूर होने लगती हैं. साथ ही यह लंग की कैपिसिटी को बढ़ाता है.

पर्वतासन

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले बैठ जाएं. अपनी रीढ़ को सीधा रखें और अपने दोनों हाथों की उंगलियों को एक-दूसरे के साथ इंटरलॉक कर लें. अब अपनी हथेलियों को पलट लें और इन्‍हें अपने सिर की सीध में रखे रहें. इसके बाद अपने हाथों को ऊपर की तरफ ले जाएं. ध्‍यान रहे आपके हाथ सीधे हों. इसके बाद गहरी सांस लेते हुए कंधे, बाजू और पीठ की मांसपेशियों में एक साथ खिंचाव महसूस करें. इस स्थिति में दो मिनट तक रहें. फिर सांस छोड़ते हुए अपने हाथों को नीचे की ओर ले आएं. इस आसन को नियमित करीब 10 मिनट तक करें.

शशकासन

शशक का का अर्थ होता है खरगोश. इस आसन को करते वक्त व्यक्ति की खरगोश जैसी आकृति बन जाती है इसीलिए इसे शशकासन कहते हैं. इस आसन को कई तरीके से किया जाता है. सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं और फिर अपने दोनों हाथों को श्वास भरते हुए ऊपर उठा लें. कंधों को कानों से सटा हुआ महसूस करें. फिर सामने की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को आगे समानांतर फैलाते हुए, श्वास बाहर निकालते हुए हथेलियां को भूमि पर टिका दें. फिर माथा भी भूमि पर टिका दें. कुछ समय तक इसी स्थिति में रहकर फिर से वज्रासन की स्थिति में आ जाएं.

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शशकासन के फायदे

हृदय रोगियों के लिए यह आसन लाभदायक है. यह आसन पेट, कमर व कूल्हों की चर्बी कम करके आंत, यकृत, अग्न्याशय व गुर्दों को बल प्रदान करता है. इस आसन के नियमित अभ्यास से तनाव, क्रोध, चिड़चिड़ापन जैसे मानसिक रोग भी दूर हो जाते हैं.
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