Yoga Session: पश्चिमोत्तानासन, पूर्वोत्तनासन और ये व्यायाम हैं शरीर के लिए फायदेमंद, सीखें योग

योग एक्सपर्ट सविता यादव से सीखें योग

योग एक्सपर्ट सविता यादव से सीखें योग

Yoga Session: कोरोना काल (Corona time) में अच्छी इम्यूनिटी (Immunity) एक जरूरत बन गई है. इसके लिए जमकर योग (Yoga) करें. नियमित रूप से योग करने से शरीर में एनर्जी का संचार तो होता ही है साथ ही कई प्रकार की बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है.

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  • Last Updated: April 19, 2021, 11:22 AM IST
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Yoga Session: आज के योग सेशन में शरीर को मजबूत और रिलैक्स करने वाले और इम्यूनिटी मजबूत करने वाले कई आसनों के बारे में बताया और सिखाया गया. कोरोना काल (Corona) में अच्छी इम्यूनिटी (Immunity) एक जरूरत बन गई है. इसके लिए जमकर योग (Yoga) भी करें. नियमित रूप से योग करने से शरीर में एनर्जी का संचार तो होता ही है साथ ही कई प्रकार की बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है. योग का मतलब है जोड़ना. ये आपके बाहरी मन को आपके आंतरिक मन से जोड़ना है. शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए दिन में एक घंटा योग जरूर करें. योग करने के लिए इसका रोज अभ्यास करना जरूरी है. योग से व्यक्तित्व में भी विकास आता है.

पश्चिमोत्तानासन:

पश्चिमोत्तानासन योग का नाम दो शब्दों के मेल से बना है- पश्चिम और उत्तान. पश्चिम यानी पश्चिम दिशा या शरीर का पिछला हिस्सा और उत्तान मतलब खिंचा हुआ. रीढ़ की हड्डी के दर्द से निजात पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पश्चिमोत्तानासन योग करना चाहिए. इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से यानी रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है. इस आसन को करने से शरीर का पूरा हिस्सा खिंच जाता है और यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनके लिए पश्चिमोत्तानासन रामबाण की तरह काम करता है और इस रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है.


पश्चिमोत्तानासन के फायदे:

तनाव दूर करने में फायदेमंद

पेट की चर्बी दूर करने में मददगार



हड्डियों को लचीला बनाने में कारगर

बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद

अनिद्रा की समस्या को दूर करता है.

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पूर्वोत्तनासन:

पैरों को सामने की ओर सीधा फैलाते हुए बैठ जाएं, पैरों को साथ में रखें, रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें. हथेलियों को जमीन पर सटाएं , कमर के पास या कन्धों के पास, उंगलियों के सिरे शरीर से दूर, बाहों को सीधा रखें. पीछे की ओर झुकें और हाथों से शरीर को सहारा दें. लंबी सांस भरें ,पेल्विक को ऊपर उठाएं, शरीर को सीधा रखें. घुटने सीधे रखें,पैरों को जमीन पर टिकाएं, पंजों को जमीन पर रखें ,ऐसा करने पर तलवा जमीन पर ही रहेगा,सिर को ज़मीन की ओर पीछे जाने दें. ऐसे ही सांस लेते रहें. इस आसन को करने से आंतो और पेट में खिंचाव होता है.

उष्ट्रासन:

उष्ट्र से तात्पर्य ऊंट से है. इस आसन को करने ले लिएअपने योग मैट पर घुटने के सहारे बैठ जाएं और कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें. घुटने कंधो के समानांतर हो तथा पैरों के तलवे आसमान की तरफ हो. सांस लेते हुए मेरुदंड को खींचे जैसे कि नाभि से खींचा जा रहा है. गर्दन पर बिना दबाव डालें बैठे रहें. इसी स्थिति में कुछ सांसे लेते रहे. सांस छोड़ते हुए अपने प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं. हाथों को वापस अपनी कमर पर लाएं और सीधे हो जाएं.

शशकासन:

शशक का मतलब खरगोश. इस आसन में खरगोश की तरह बैठना होता है. इस आसन को करने के लिए सबसे पहले वज्रासन में बैठ जाएं और फिर अपने दोनों हाथों को श्वास भरते हुए ऊपर उठा लें. कंधों को कानों से सटाएं. फिर सामने की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को आगे समानांतर फैलाते हुए, श्वास बाहर निकालते हुए हथेलियां को भूमि पर टिका दें. फिर माथा भी भूमि पर टिका दें. कुछ समय तक इसी स्थिति में रहकर पुनः वज्रासन की स्थिति में आ जाइए. यदि आपके पेट और सिर में कोई गंभीर समस्या हो तो यह आसन नहीं करें. यह आसन पेट, कमर व कूल्हों की चर्बी कम करता है. इस आसन के नियमित अभ्यास से तनाव, क्रोध, चिड़चिड़ापन भी दूर हो जाते हैं.

भुजंगासन:

भुजंगासन को सर्पासन, कोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है. इस मुद्रा में शरीर सांप की आकृति बनाता है. ये आसन जमीन पर लेटकर और पीठ को मोड़कर किया जाता है जबकि सिर सांप के उठे हुए फन की मुद्रा में होता है.

कपालभारती:

कपालभारती प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें. इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं. इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैं लेकिन एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें. क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं. इसे कम से कम 5 मिनट और अधिकतम 30 मिनट तक कर सकते हैं.

अनुलोम विलोम प्राणायाम:

सबसे पहले पालथी मार कर सुखासन में बैठें. इसके बाद दाएं अंगूठे से अपनी दाहिनी नासिका पकड़ें और बाई नासिका से सांस अंदर लें लीजिए. अब अनामिका उंगली से बाई नासिका को बंद कर दें. इसके बाद दाहिनी नासिका खोलें और सांस बाहर छोड़ दें. अब दाहिने नासिका से ही सांस अंदर लें और उसी प्रक्रिया को दोहराते हुए बाई नासिका से सांस बाहर छोड़ दें.

अनुलोम विलोम प्राणायाम के फायदे:

-फेफड़े मजबूत होते हैं

-बदलते मौसम में शरीर जल्दी बीमार नहीं होता.

-वजन कम करने में मददगार
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