उष्ट्रासन और उत्तान मंडूकासन हैं लाभकारी, सीखें योग सविता यादव से

सीखें योग सविता यादव से

सीखें योग सविता यादव से

Yoga Session-योग को अपनी नियमित दिनचर्या में जरूर शामिल करें. योगाभ्‍यास करते समय इस बात का ध्‍यान रखें कि इसे धीरे-धीरे करना चाहिए. व्‍यायाम से पहले ये तीन नियम जरूर ध्‍यान रखें कि अच्‍छा गहरा लंबा श्‍वास लें, गति का पालन करें और अपनी क्षमता के अनुसार योग करें

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 6, 2021, 12:38 PM IST
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Yoga Session- आज के लाइव योगा सेशन (Live Yoga Session) में हमने छोटे-छोटे कई योगाभ्यासों को सीखा. योग स्‍वास्‍थ्‍य को बेहतर बनाए रखते हैं. जो लोग चाहते हैं कि उनकी सहनशक्ति बढ़े और वे लंबे समय तक बैठ कर काम कर पाएं. तो योग जरूर करें. वहीं इम्युनिटी को बेहतर बनाए रखने में भी योग की महत्वपूर्ण भूमिका है. ये आसन पैरों की मजबूती को बढ़ाते हैं और पाचन बेहतर बनाए रखते हैं. इन आसन के जरिए स्वास्‍थ्‍य (Health) बेहतर बना रहता है और तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. इसलिए योग को अपनी नियमित दिनचर्या में जरूर शामिल करें. योगाभ्‍यास करते समय इस बात का ध्‍यान रखें कि इसे धीरे-धीरे करना चाहिए. व्‍यायाम से पहले ये तीन नियम जरूर ध्‍यान रखें कि अच्‍छा गहरा लंबा श्‍वास लें, गति का पालन करें और अपनी क्षमता के अनुसार योग करें

ग्रीवा शक्ति आसन:
इस योग क्रिया को करने के लिए अपनी जगह पर खड़े हो जाएं. जो लोग खड़े होकर इस क्रिया को करने में असमर्थ हैं वे इसे बैठकर भी कर सकते हैं. जो जमीन पर नहीं बैठ सकते वे कुर्सी पर बैठकर भी इसका अभ्यास कर सकते हैं. कंफर्टेबल पोजीशन में खड़े होकर हाथों को कमर पर टिकाएं. शरीर को ढीला रखें. कंधों को पूरी तरह से रिलैक्स रखें. सांस छोड़ते हुए गर्दन को आगे की ओर लेकर आएं. चिन को लॉक करने की कोशिश करें. जिन लोगों को सर्वाइकल या गर्दन में दर्द की समस्या हो वह गर्दन को ढीला छोड़ें चिन लॉक न करें. इसके बाद सांस भरते हुए गर्दन को पीछे की ओर लेकर जाएं.

सांस छोड़ते हुए फिर गर्दन को आगे की ओर लेकर जाएं. इसके बाद शरीर को पूरी तरह से ढीला छोड़ दें. इस क्रिया को 8 से 10 बार करें. इसके बाद दूसरी क्रिया करनी है. सांस छोड़ते हुए दाईं ओर गर्दन को झुकाएं. सांस भरते हुए सेंटर में गर्दन लेकर आएं. फिर सांस छोड़ते हुए बाईं ओर गर्दन लेकर जाएं और सांस भरते हुए सेंटर में गर्दन ले आएं. इसके बाद शरीर को ढीला छोड़ दें.




उष्ट्रासन:
उष्ट्र से तात्पर्य ऊंट से है. इस आसन को करने ले लिएअपने योग मैट पर घुटने के सहारे बैठ जाएं और कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें.
घुटने कंधो के समानांतर हो तथा पैरों के तलवे आसमान की तरफ हो.
सांस लेते हुए मेरुदंड को खींचे जैसे कि नाभि से खींचा जा रहा है.
गर्दन पर बिना दबाव डालें बैठे रहें
इसी स्थिति में कुछ सांसे लेते रहे.
सांस छोड़ते हुए अपने प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं.
हाथों को वापस अपनी कमर पर लाएं और सीधे हो जाएं.
उत्तान मंडूकासन : उत्तान मंडूकासन में आपको अपने शरीर को ऊपर की ले जाते हुए मेंढक की मुद्रा में आना होता है. इसे करते वक्त लोगों को वज्रासन मुद्रा में बैठना होता है और फिर दोनों घुटनों को फैलाना होता है. फिर दायां हाथ उठाकर हथेली को बाएं कंधे के पीछे और बाएं हाथ उठाकर दाएं कंधे के पीछे लगाना होता है. इस तरह गर्दन व कमर को सीधा रखते हुए श्वांस को स्थिर रखकर ये योगासन किया जाता है.

उत्तान मंडूकासन के फायदे
-उत्तान मंडूकासन वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है.
-उत्तान मंडूकासन कंधों और हाथों की ज्वाइंट्स को हेल्दी रखने में मदद करता है
-उत्तान मंडूकासन कंधे और पेट की मांसपेशियों को टोन करने में मदद करता है.
-अगर आपको पेट में गैस, कब्ज और अपच है, तो उत्तान मंडूकासन फादेमंद है.

शलभासन:
शलभासन एक संस्कृत भाषा का शब्द है, जो दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें पहले शब्द शलभ का अर्थ टिड्डे या कीट (Locust ) और दूसरा शब्द आसन का अर्थ होता है मुद्रा अर्थात शलभासन का अर्थ है टिड्डे के समान मुद्रा होना. इस आसन को अंग्रेजी में ग्रासहोपर पोज बोलते हैं. इससे आपकी रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है.

शलभासन करने का तरीका
शलभासन करने लिए सबसे पहले आप किसी साफ स्थान पर चटाई बिछा कर उलटे पेट के बल लेट जाएं यानि आपकी पीठ ऊपर की ओर रहे और पेट नीचे जमीन पर रहे. अपने दोनों पैरो को सीधा रखें और अपने पैर के पंजे को सीधे तथा ऊपर की ओर रखें. अपने दोनों हाथों को सीधा करें और उनको जांघों के नीचे दबा लें यानी अपना दायां हाथ दायीं जांघ के नीचे और बायां हाथ बायीं जांघ के नीचे दबा लें. अपने सिर और मुंह को सीधा रखें. फिर अपने को सामान्य रखें और एक गहरी सांस अंदर की ओर लें. अपने दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाने की कोशिश करें, जितना हो सकता हैं उतना अपनी अधिकतम ऊंचाई तक पैरों को ऊपर करें.

अगर आप योग अभ्यास में नए हैं, तो आप पैरों को ऊपर करने के लिए अपने हाथों का सहारा ले सकते हैं, इसके लिए आप अपने दोनों हाथों को जमीन पर टिका के अपने पैरों को ऊपर कर सकते हैं. आप इस मुद्रा में कम से कम 20 सेकंड तक रहने की कोशिश करें, इसे आप अपने क्षमता के अनुसार कम ज्यादा कर सकते हैं. इसके बाद आप धीरे धीरे अपनी सांस को बाहर छोड़ते हुए पैरों को नीचे करते जाएं. दोबारा अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं. इस अभ्यास को 3-4 बार दोहराएं.

शलभासन के फायदे
-शलभासन वजन को कम करने के लिए एक अच्छी योग मुद्रा मानी जाती है. यह शरीर में चर्बी को खत्म करने में मदद करती है.

-शरीर की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए शलभासन एक अच्छी मुद्रा है. यह शरीर के हाथों, जांघों, पैरों और पिंडरी को मजबूत करता है, इसके साथ यह पेट की चर्बी को कम करके उसे सुंदर बनाता है.

-रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने के लिए शलभासन एक अच्छा योग है. शलभासन से अनेक प्रकार की बीमारियों को ठीक किया जा सकता है.

-यह हमारे पेट के पाचन तंत्र को ठीक करता करता है, जिससे पेट संबंधी बीमारियां नहीं होती हैं, इसके साथ यह कब्ज को ठीक करता है, शरीर में अम्ल और क्षार के संतुलन को बनाए रखता है.
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